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मॉकड्रिल : आपात स्थिति में समय पर पहुंची मदद
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संवाद न्यूज एजेंसी
नूंह। अचानक भूकंप के झटके और उसके बाद मची अफरा-तफरी... कोई मदद के लिए चिल्ला रहा था तो कोई सुरक्षित बाहर निकलने की कोशिश कर रहा था। इसी बीच राहत एवं बचाव दल मौके पर पहुंचते हैं और घायलों को बाहर निकालने का सिलसिला शुरू हो जाता है। हालांकि, यह किसी वास्तविक आपदा का दृश्य नहीं, बल्कि नूंह के लघु सचिवालय में मंगलवार को आयोजित की गई मॉकड्रिल का हिस्सा था। ड्रिल के जरिए प्रशासन ने भूकंप और आगजनी जैसी आपात स्थिति में अपनी तैयारियों को जमीन पर परखा।
मॉक ड्रिल के दौरान लघु सचिवालय परिसर में फंसे 11 लोगों को रेस्क्यू करने का अभ्यास किया गया। बचाव दल ने घायलों को सुरक्षित बाहर निकालने के साथ प्राथमिक उपचार की प्रक्रिया भी पूरी की। इनमें पांच घायल व्यक्तियों को मौके पर ही सीपीआर देने का अभ्यास किया गया, जबकि गंभीर रूप से घायल लोगों को तत्काल अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था को भी परखा गया।
मॉकड्रिल के दौरान प्रशासन, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, अग्निशमन विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियों की टीमें निर्धारित जिम्मेदारियों के साथ मौके पर पहुंचीं। आपदा की सूचना मिलने से लेकर राहत दलों के पहुंचने, लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने, प्राथमिक उपचार देने और गंभीर घायलों को अस्पताल भेजने तक की पूरी प्रक्रिया को व्यावहारिक रूप से दोहराया गया।
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एसडीएम कुंवर आदित्य विक्रम ने बताया कि ऐसी परिस्थितियों में कुछ मिनटों का समय भी बेहद महत्वपूर्ण होता है। इसलिए मॉक ड्रिल का उद्देश्य केवल तैयारियों का प्रदर्शन करना नहीं, बल्कि यह देखना भी है कि वास्तविक आपदा के समय विभिन्न विभाग कितनी तेजी और बेहतर तालमेल के साथ काम कर सकते हैं।
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नूंह। अचानक भूकंप के झटके और उसके बाद मची अफरा-तफरी... कोई मदद के लिए चिल्ला रहा था तो कोई सुरक्षित बाहर निकलने की कोशिश कर रहा था। इसी बीच राहत एवं बचाव दल मौके पर पहुंचते हैं और घायलों को बाहर निकालने का सिलसिला शुरू हो जाता है। हालांकि, यह किसी वास्तविक आपदा का दृश्य नहीं, बल्कि नूंह के लघु सचिवालय में मंगलवार को आयोजित की गई मॉकड्रिल का हिस्सा था। ड्रिल के जरिए प्रशासन ने भूकंप और आगजनी जैसी आपात स्थिति में अपनी तैयारियों को जमीन पर परखा।
मॉक ड्रिल के दौरान लघु सचिवालय परिसर में फंसे 11 लोगों को रेस्क्यू करने का अभ्यास किया गया। बचाव दल ने घायलों को सुरक्षित बाहर निकालने के साथ प्राथमिक उपचार की प्रक्रिया भी पूरी की। इनमें पांच घायल व्यक्तियों को मौके पर ही सीपीआर देने का अभ्यास किया गया, जबकि गंभीर रूप से घायल लोगों को तत्काल अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था को भी परखा गया।
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मॉकड्रिल के दौरान प्रशासन, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, अग्निशमन विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियों की टीमें निर्धारित जिम्मेदारियों के साथ मौके पर पहुंचीं। आपदा की सूचना मिलने से लेकर राहत दलों के पहुंचने, लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने, प्राथमिक उपचार देने और गंभीर घायलों को अस्पताल भेजने तक की पूरी प्रक्रिया को व्यावहारिक रूप से दोहराया गया।
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एसडीएम कुंवर आदित्य विक्रम ने बताया कि ऐसी परिस्थितियों में कुछ मिनटों का समय भी बेहद महत्वपूर्ण होता है। इसलिए मॉक ड्रिल का उद्देश्य केवल तैयारियों का प्रदर्शन करना नहीं, बल्कि यह देखना भी है कि वास्तविक आपदा के समय विभिन्न विभाग कितनी तेजी और बेहतर तालमेल के साथ काम कर सकते हैं।