{"_id":"6a7b82e0ffaf3341e8005c79","slug":"water-is-spreading-disease-robbing-children-of-childhood-palwal-news-c-24-1-pal1009-126915-2026-08-12","type":"story","status":"publish","title_hn":"Palwal News: पानी पीला रहा बीमारी, छीन रहा बचपन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Palwal News: पानी पीला रहा बीमारी, छीन रहा बचपन
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पानी में क्लोराइड की अधिकता से बढ़ रहा कुपोषण का खतरा, आठ माह में 160 बच्चे पहुंचे एनआरसी
एनआरसी में भर्ती कर बच्चों को दिया जा रहा पोषण और दवाएं
पोषण की कमी, कम उम्र में स्तनपान छुड़ाना और पैकेट दूध प्रमुख कारण
मोहम्मद अम्मार
पलवल। जिले में कुपोषण की समस्या बच्चों के लिए चिंता का कारण बनी हुई है। पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में कुपोषित बच्चों के पहुंचने का सिलसिला जारी है। प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, 2025 में करीब 240 कुपोषित बच्चे उपचार के लिए एनआरसी पहुंचे थे। वहीं, जनवरी 2026 से अब तक करीब 160 मामले सामने आ चुके हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों में कुपोषण का प्रमुख कारण पर्याप्त पोषण नहीं मिलना, कम उम्र में स्तनपान छुड़ा देना, पैकेट वाले दूध पर निर्भरता और बच्चों के खान-पान पर पर्याप्त ध्यान नहीं देना है।
रिपोर्ट के अनुसार, उच्च टीडीएस (घुले हुए ठोस पदार्थ) के मामले में पलवल प्रदेश के सबसे अधिक प्रभावित जिलों में शामिल है। राज्य के 78 प्रभावित गांवों में से 36 गांव अकेले पलवल जिले के हैं। वहीं, कठोर पानी (हार्डनेस) से प्रभावित 87 गांवों में से 34 गांव पलवल के हैं। इसके अलावा 11 गांवों में फ्लोराइड, नौ गांवों में क्लोराइड, पांच गांवों में अत्यधिक क्षारीयता और तीन गांवों में सल्फेट की मात्रा निर्धारित सीमा से अधिक पाई गई।
पोषण की कमी से कमजोर हो रहे बच्चे
विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों को जन्म के शुरुआती महीनों में पर्याप्त स्तनपान और इसके बाद उम्र के अनुसार पौष्टिक आहार नहीं मिलने से उनका शारीरिक विकास प्रभावित होता है। विशेषकर जन्म के बाद के शुरुआती महीनों में, मां का दूध अमृत समान होता है। यह न केवल आवश्यक पोषण और ऊर्जा प्रदान करता है, बल्कि रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी मजबूत करता है। हालांकि, यह देखा जा रहा है कि कई मामलों में माताएं कम उम्र में ही बच्चों का दूध छुड़ा देती हैं।
विज्ञापन
इसके बाद बच्चों को पर्याप्त पौष्टिक आहार देने के बजाय बाजार में मिलने वाले पैकेट वाले दूध पर निर्भर कर दिया जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि पैकेट वाले दूध को सही मात्रा में और सही तरीके से तैयार न किया जाए, तो यह बच्चों के लिए हानिकारक भी साबित हो सकता है।
पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में किया जाता है इलाज
अस्पताल में स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में आने वाले कुपोषित बच्चों की स्थिति की नियमित निगरानी की जाती है। प्रभारी स्नेहा ने बताया कि बच्चों को चिकित्सकीय सलाह के अनुसार पोषणयुक्त आहार देने के साथ विटामिन, मल्टीविटामिन और आयरन की दवाएं दी जाती हैं। उन्होंने बताया कि बच्चों में कुपोषण के कई कारण सामने आते हैं। पर्याप्त पोषण नहीं मिलना, कम उम्र में मां का दूध छुड़ा देना, पैकेट वाले दूध पर अधिक निर्भरता और परिवार बड़ा होने के कारण बच्चों के खान-पान पर पर्याप्त ध्यान नहीं देना प्रमुख कारण हैं। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि छह माह तक बच्चों को केवल मां का दूध दें और इसके बाद स्तनपान के साथ पौष्टिक पूरक आहार जरूर शुरू करें।
विज्ञापन
एनआरसी में भर्ती कर बच्चों को दिया जा रहा पोषण और दवाएं
पोषण की कमी, कम उम्र में स्तनपान छुड़ाना और पैकेट दूध प्रमुख कारण
मोहम्मद अम्मार
पलवल। जिले में कुपोषण की समस्या बच्चों के लिए चिंता का कारण बनी हुई है। पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में कुपोषित बच्चों के पहुंचने का सिलसिला जारी है। प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, 2025 में करीब 240 कुपोषित बच्चे उपचार के लिए एनआरसी पहुंचे थे। वहीं, जनवरी 2026 से अब तक करीब 160 मामले सामने आ चुके हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों में कुपोषण का प्रमुख कारण पर्याप्त पोषण नहीं मिलना, कम उम्र में स्तनपान छुड़ा देना, पैकेट वाले दूध पर निर्भरता और बच्चों के खान-पान पर पर्याप्त ध्यान नहीं देना है।
रिपोर्ट के अनुसार, उच्च टीडीएस (घुले हुए ठोस पदार्थ) के मामले में पलवल प्रदेश के सबसे अधिक प्रभावित जिलों में शामिल है। राज्य के 78 प्रभावित गांवों में से 36 गांव अकेले पलवल जिले के हैं। वहीं, कठोर पानी (हार्डनेस) से प्रभावित 87 गांवों में से 34 गांव पलवल के हैं। इसके अलावा 11 गांवों में फ्लोराइड, नौ गांवों में क्लोराइड, पांच गांवों में अत्यधिक क्षारीयता और तीन गांवों में सल्फेट की मात्रा निर्धारित सीमा से अधिक पाई गई।
विज्ञापन
पोषण की कमी से कमजोर हो रहे बच्चे
विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों को जन्म के शुरुआती महीनों में पर्याप्त स्तनपान और इसके बाद उम्र के अनुसार पौष्टिक आहार नहीं मिलने से उनका शारीरिक विकास प्रभावित होता है। विशेषकर जन्म के बाद के शुरुआती महीनों में, मां का दूध अमृत समान होता है। यह न केवल आवश्यक पोषण और ऊर्जा प्रदान करता है, बल्कि रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी मजबूत करता है। हालांकि, यह देखा जा रहा है कि कई मामलों में माताएं कम उम्र में ही बच्चों का दूध छुड़ा देती हैं।
विज्ञापन
इसके बाद बच्चों को पर्याप्त पौष्टिक आहार देने के बजाय बाजार में मिलने वाले पैकेट वाले दूध पर निर्भर कर दिया जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि पैकेट वाले दूध को सही मात्रा में और सही तरीके से तैयार न किया जाए, तो यह बच्चों के लिए हानिकारक भी साबित हो सकता है।
पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में किया जाता है इलाज
अस्पताल में स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में आने वाले कुपोषित बच्चों की स्थिति की नियमित निगरानी की जाती है। प्रभारी स्नेहा ने बताया कि बच्चों को चिकित्सकीय सलाह के अनुसार पोषणयुक्त आहार देने के साथ विटामिन, मल्टीविटामिन और आयरन की दवाएं दी जाती हैं। उन्होंने बताया कि बच्चों में कुपोषण के कई कारण सामने आते हैं। पर्याप्त पोषण नहीं मिलना, कम उम्र में मां का दूध छुड़ा देना, पैकेट वाले दूध पर अधिक निर्भरता और परिवार बड़ा होने के कारण बच्चों के खान-पान पर पर्याप्त ध्यान नहीं देना प्रमुख कारण हैं। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि छह माह तक बच्चों को केवल मां का दूध दें और इसके बाद स्तनपान के साथ पौष्टिक पूरक आहार जरूर शुरू करें।