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Panchkula News: पोस्ट-मैट्रिक स्कॉलरशिप घोटाले में एफआईआर में कई साल देरी, जवाब दें मुख्य सचिव

Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 30 Apr 2026 01:59 AM IST
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FIR in post-matric scholarship scam delayed by several years, Chief Secretary should respond
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चंडीगढ़। अनुसूचित जाति विद्यार्थियों की पोस्ट-मैट्रिक स्कॉलरशिप योजना में सामने आए करोड़ों रुपये के घोटाले के बावजूद एफआईआर दर्ज करने में कई साल की देरी पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को फटकार लगाई है। एफआईआर में 6 साल से अधिक की देरी के बाद 2 एफआईआर दर्ज करने की पंजाब सरकार ने कोर्ट को जानकारी दी थी। देरी को अस्वीकार्य मानते हुए हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव का हलफनामा तलब किया है।
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जनहित याचिका में चंडीगढ़ निवासी सतबीर सिंह वालिया ने आरोप लगाया था कि केंद्र सरकार द्वारा मार्च 2019 में जारी 303.92 करोड़ रुपये की राशि में अनियमितताएं हुईं। ट्रेजरी एक्सपेंडिचर रिपोर्ट के अनुसार 248.11 करोड़ निकाले गए जबकि लगभग 39 करोड़ रुपये के भुगतान संबंधी रिकॉर्ड और दस्तावेज तक उपलब्ध नहीं थे।
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आरोप यह रहा कि रकम संदिग्ध या अज्ञात संस्थानों तक पहुंची। हाईकोर्ट के कड़े रुख के बाद कोर्ट को एफआईआर के बारे में जानकारी देते हुए पंजाब सरकार ने बताया कि पहली एफआईआर मोहाली विजिलेंस ब्यूरो द्वारा तत्कालीन डिप्टी डायरेक्टर परमिंदर सिंह गिल, सीनियर असिस्टेंट बलदेव सिंह, राकेश अरोड़ा, सेक्शन ऑफिसर मुकेश कुमार, परमजीत सिंह (डीसीएफए) तथा बठिंडा स्थित एक पॉलिटेक्निक संस्थान के चेयरमैन/प्रिंसिपल के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज की गई।
दूसरी एफआईआर लुधियाना की आर्थिक अपराध शाखा में फिरोजपुर स्थित शहीद भगत सिंह टेक कैंप इंजीनियरिंग विंग के चेयरमैन/प्रिंसिपल के खिलाफ दर्ज हुई। केंद्र सरकार पहले ही वर्ष 2022 में हाईकोर्ट को बता चुकी थी कि योजना केंद्र प्रायोजित है और उसका वित्तीय हिस्सा राज्य को जारी किया जा चुका था लेकिन घोटाले संबंधी रिपोर्ट पंजाब सरकार ने केंद्र को अब तक नहीं भेजी थी। यही तथ्य अदालत के लिए और अधिक चिंताजनक रहा।


हाईकोर्ट ने कहा कि यह अत्यंत हैरानी की बात है कि इतने बड़े वित्तीय घोटाले के आरोप सामने आने, ऑडिट, विभागीय जांच और कैबिनेट स्तर के निर्णयों के बावजूद वर्षों तक केवल जांच चलती रही पर आपराधिक मामला दर्ज करने की दिशा में प्रभावी कदम नहीं उठाया गया। अदालत ने टिप्पणी की कि यदि करोड़ों रुपये की छात्रवृत्ति राशि के दुरुपयोग के आरोप थे तो एफआईआर दर्ज करने में इतनी देरी क्यों हुई, यह राज्य को बताना होगा।
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