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Panchkula News: लोधा कमेटी की रोक के बावजूद पर्ल ग्रुप की जमीन की जीपीए रजिस्टर
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विजिलेंस जांच में बड़ा खुलासा, जीपीए के आधार पर बाद में हुई करोड़ों की जमीन की रजिस्ट्री
सीबीआई अटैच संपत्ति पर पंजीकरण नहीं करने के थे स्पष्ट निर्देश
संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। रायपुररानी स्थित पर्ल ग्रुप से जुड़ी 125 कनाल 19 मरला जमीन के मामले में विजिलेंस जांच और राजस्व रिकॉर्ड से बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित लोधा कमेटी के स्पष्ट प्रतिबंध के बावजूद जनवरी 2021 में जमीन की जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (जीपीए) रजिस्टर कर दी गई। इसी जीपीए के आधार पर वर्ष 2025 में जमीन की रजिस्ट्री भी कर दी गई। मामले में विजिलेंस तीन एफआईआर दर्ज कर जांच कर रही है।
रिकॉर्ड के अनुसार तत्कालीन तहसीलदार ने 10 दिसंबर 2020 को लोधा कमेटी और सीबीआई से इस जमीन के संबंध में मार्गदर्शन मांगा था। इसके जवाब में 14 दिसंबर 2020 को लोधा कमेटी ने ई-मेल के माध्यम से स्पष्ट निर्देश दिए थे कि पर्ल ग्रुप की सीबीआई द्वारा अटैच संपत्तियों का किसी भी प्रकार का रजिस्ट्रेशन, म्यूटेशन या बिक्री नहीं की जाए। इसके बावजूद जनवरी 2021 में जीपीए का पंजीकरण कर दिया गया।
विजिलेंस जांच में यह भी सामने आया है कि बाद में इसी जीपीए के आधार पर पूर्व तहसीलदार विक्रम सिंगला ने वर्ष 2025 में जमीन की रजिस्ट्री कर दी। जांच एजेंसी के अनुसार मामले में कई स्तरों पर अनियमितताओं के संकेत मिले हैं।
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जांच में यह आरोप भी सामने आया है कि पूर्व डीआरओ सरकारी वाहन और सुरक्षा कर्मियों के साथ जमीन मालिक के घर पहुंचे थे। आरोप है कि दबाव बनाकर जमीन का सौदा कराया गया और बिक्री से प्राप्त करीब आठ करोड़ रुपये विभिन्न बैंक खातों में स्थानांतरित किए गए। विजिलेंस मामले में कई आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है, जबकि अन्य की तलाश जारी है।
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सीबीआई अटैच संपत्ति पर पंजीकरण नहीं करने के थे स्पष्ट निर्देश
संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। रायपुररानी स्थित पर्ल ग्रुप से जुड़ी 125 कनाल 19 मरला जमीन के मामले में विजिलेंस जांच और राजस्व रिकॉर्ड से बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित लोधा कमेटी के स्पष्ट प्रतिबंध के बावजूद जनवरी 2021 में जमीन की जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (जीपीए) रजिस्टर कर दी गई। इसी जीपीए के आधार पर वर्ष 2025 में जमीन की रजिस्ट्री भी कर दी गई। मामले में विजिलेंस तीन एफआईआर दर्ज कर जांच कर रही है।
रिकॉर्ड के अनुसार तत्कालीन तहसीलदार ने 10 दिसंबर 2020 को लोधा कमेटी और सीबीआई से इस जमीन के संबंध में मार्गदर्शन मांगा था। इसके जवाब में 14 दिसंबर 2020 को लोधा कमेटी ने ई-मेल के माध्यम से स्पष्ट निर्देश दिए थे कि पर्ल ग्रुप की सीबीआई द्वारा अटैच संपत्तियों का किसी भी प्रकार का रजिस्ट्रेशन, म्यूटेशन या बिक्री नहीं की जाए। इसके बावजूद जनवरी 2021 में जीपीए का पंजीकरण कर दिया गया।
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विजिलेंस जांच में यह भी सामने आया है कि बाद में इसी जीपीए के आधार पर पूर्व तहसीलदार विक्रम सिंगला ने वर्ष 2025 में जमीन की रजिस्ट्री कर दी। जांच एजेंसी के अनुसार मामले में कई स्तरों पर अनियमितताओं के संकेत मिले हैं।
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जांच में यह आरोप भी सामने आया है कि पूर्व डीआरओ सरकारी वाहन और सुरक्षा कर्मियों के साथ जमीन मालिक के घर पहुंचे थे। आरोप है कि दबाव बनाकर जमीन का सौदा कराया गया और बिक्री से प्राप्त करीब आठ करोड़ रुपये विभिन्न बैंक खातों में स्थानांतरित किए गए। विजिलेंस मामले में कई आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है, जबकि अन्य की तलाश जारी है।