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आईडीएफसी घोटाला: आईएएस पंकज अग्रवाल की जमानत का विरोध, CBI बोली-मुख्य आरोपी रिभव ऋषि के संपर्क में थे

Fri, 31 Jul 2026 08:33 AM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पंचकूला
संवाद न्यूज एजेंसी, पंचकूला Published by: चंडीगढ़ ब्यूरो Updated Fri, 31 Jul 2026 08:33 AM IST
सार

पंकज अग्रवाल ने 10 दिसंबर 2024 से 16 जून 2025 तक स्कूल शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव रहते हुए हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद (एचएसएसपीपी) का खाता आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में खुलवाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी।

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IDFC scam: CBI says IAS Pankaj Agarwal was in touch with Ribhav Rishi
आईडीएफसी बैंक - फोटो : फाइल

विस्तार

हरियाणा के चर्चित आईडीएफसी फर्स्ट बैंक से जुड़े 657 करोड़ रुपये के कथित सरकारी धन गबन मामले में गिरफ्तार आईएएस अधिकारी पंकज अग्रवाल की नियमित जमानत याचिका पर वीरवार को सीबीआई की विशेष अदालत में सुनवाई हुई।
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सीबीआई ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि अग्रवाल मामले के मुख्य आरोपी और आईडीएफसी फर्स्ट बैंक, सेक्टर-32 चंडीगढ़ के पूर्व अधिकारी रिभव ऋषि के करीबी संपर्क में थे तथा उन्हें कथित रूप से आर्थिक और अन्य अनुचित लाभ मिलते रहे। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई तीन अगस्त तय की है।
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आईडीएफसी खाते पर सवाल
सीबीआई ने अदालत में दायर जवाब में कहा कि पंकज अग्रवाल ने 10 दिसंबर 2024 से 16 जून 2025 तक स्कूल शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव रहते हुए हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद (एचएसएसपीपी) का खाता आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में खुलवाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। इसके बाद 31 दिसंबर 2024 को कोटक महिंद्रा बैंक से 100 करोड़ रुपये इस खाते में स्थानांतरित करने की स्वीकृति भी दी गई। 
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जांच एजेंसी का दावा है कि यह फैसला वित्त विभाग के दिशा-निर्देशों के विपरीत था। प्रतिस्पर्धी बैंकों से प्रस्ताव नहीं मंगाए गए, ब्याज दरों की तुलना नहीं की गई और बैंक की निर्धारित निवेश सीमा से अधिक राशि जमा कराई गई। सीबीआई के अनुसार, बाद में इसी खाते से फर्जी डेबिट और क्रेडिट प्रविष्टियों के जरिए 50.54 करोड़ रुपये का गबन किया गया। एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया कि अग्रवाल ने अधीनस्थ अधिकारियों पर फाइलों और नोटशीट में बदलाव का दबाव बनाया।


संपर्क के साक्ष्य मिलने का दावा
सीबीआई ने अदालत को बताया कि जांच में पंकज अग्रवाल और रिभव ऋषि के बीच लगातार संपर्क के साक्ष्य मिले हैं। एजेंसी का कहना है कि रिभव ऋषि के बैंक के पद से हटने के बाद भी दोनों के बीच बातचीत जारी रही और अग्रवाल कथित सरकारी धन के डायवर्जन की साजिश से पूरी तरह अवगत थे। वहीं, बचाव पक्ष ने आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि अग्रवाल ने केवल प्रशासनिक स्तर पर प्रस्तावों को मंजूरी दी थी। उनका किसी अवैध लेनदेन, रिश्वत या व्यक्तिगत लाभ से कोई संबंध नहीं है। अब मामले में तीन अगस्त को आगे सुनवाई होगी।
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