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Panchkula News: पिंजौर अपहरण-लूटकांड का 48 घंटे में खुलासा, मुठभेड़ में दो बदमाश घायल
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पंचकूला। पिंजौर में युवक के अपहरण और लूटपाट के सनसनीखेज मामले का पंचकूला पुलिस ने महज 48 घंटे के भीतर खुलासा कर दिया। कार्रवाई के दौरान बरवाला के अलीपुर इंडस्ट्रियल एरिया में पुलिस और आरोपियों के बीच हुई मुठभेड़ में दो बदमाश घायल हो गए। गिरफ्तार आरोपियों में रोहित गोदारा और लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़ा एक कथित हथियार सप्लायर भी शामिल है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से एक अवैध .32 बोर पिस्टल, दो जिंदा कारतूस और वारदात में इस्तेमाल की गई काले रंग की स्कॉर्पियो बरामद की है।
डीसीपी क्राइम एंड ट्रैफिक अमरिंदर सिंह ने बताया कि 15 जून को पिंजौर निवासी एक युवक पेट्रोल पंप से स्कूटी में तेल डलवाकर घर लौट रहा था। इसी दौरान गौरी शंकर मंदिर के पास स्कॉर्पियो सवार चार युवकों ने रास्ता पूछने के बहाने उसे रोका और चाकू दिखाकर जबरन गाड़ी में बैठा लिया। आरोपियों ने युवक को चंडीमंदिर और बरवाला टोल प्लाजा की ओर ले जाकर कई घंटे तक बंधक बनाए रखा। इस दौरान बदमाशों ने पीड़ित से 12 हजार रुपये नकद, मोबाइल फोन और अन्य सामान लूट लिया। आरोपियों ने उसके ऑनलाइन पेमेंट ऐप का भी इस्तेमाल किया और रास्ते में पेट्रोल भरवाया। बाद में युवक को बरवाला अनाज मंडी के पास छोड़कर फरार हो गए। पुलिस जांच में यह तथ्य सामने आया कि आरोपी करीब एक सप्ताह पहले मनाली घूमने गए थे। वहां से लौटने के बाद उनके पास पैसे खत्म हो गए थे। इसके बाद उन्होंने आसान शिकार तलाश कर लूटपाट की वारदात को अंजाम देने की योजना बनाई और पिंजौर क्षेत्र में युवक का अपहरण कर लूट की घटना को अंजाम दिया।
सीसीटीवी और टेक्निकल सर्विलांस से आरोपियों तक पहुंची पुलिस
घटना के बाद पुलिस की कई टीमों को जांच में लगाया गया। सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर क्राइम ब्रांच सेक्टर-19 की टीम ने एसीपी अमन और इंस्पेक्टर प्रवीण मलिक के नेतृत्व में 16 जून को दो आरोपी वीरेन और आशीष, निवासी चरखी दादरी को सेक्टर-19 फेज-1 क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ के दौरान मिली जानकारी के आधार पर पुलिस को शेष दो आरोपियों के अलीपुर इंडस्ट्रियल एरिया में छिपे होने की सूचना मिली। बुधवार सुबह पुलिस टीम जब मौके पर पहुंची और आरोपियों को आत्मसमर्पण करने के लिए कहा तो उन्होंने पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी।
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पुलिस पर चली गोलियां, जवाबी कार्रवाई में दोनों घायल
पुलिस के अनुसार आरोपियों की ओर से चलाई गई दो गोलियां पुलिसकर्मियों की बुलेटप्रूफ जैकेट पर लगीं, जिससे बड़ा हादसा टल गया। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने तीन राउंड फायर किए, जिनमें दोनों आरोपियों के पैरों में गोली लगी। घायल होने के बाद उन्हें काबू कर लिया गया। घायल आरोपियों की पहचान भिवानी निवासी योगेश कुमार और चरखी दादरी निवासी दीपेश कुमार के रूप में हुई है। दोनों को उपचार के लिए सेक्टर-6 नागरिक अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
हथियार सप्लाई नेटवर्क से जुड़े तार
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि योगेश कुमार कथित तौर पर रोहित गोदारा गैंग के लिए काम करता है और हरियाणा व दिल्ली-एनसीआर में अवैध हथियारों की सप्लाई से जुड़ा रहा है। उसके खिलाफ गुरुग्राम में संगठित अपराध और आर्म्स एक्ट के मामले दर्ज हैं। वहीं दीपेश पर अपहरण और जानलेवा हमला करने जैसे संगीन मामले दर्ज बताए गए हैं। पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि चारों आरोपी छात्र हैं और वारदात को अंजाम देने के लिए उन्होंने एक परिचित से किराये पर स्कॉर्पियो वाहन लिया था।
5 हजार रुपये का ऑनलाइन ट्रांसफर बना अहम सुराग
वारदात के दौरान नकदी लूटने के बावजूद आरोपियों को और पैसों की जरूरत महसूस हुई। उन्होंने पीड़ित को धमकाकर अपने बताए गए गूगल पे नंबर पर 5 हजार रुपये ट्रांसफर करवाए। पुलिस के अनुसार यही ऑनलाइन ट्रांजेक्शन जांच में महत्वपूर्ण सुराग साबित हुआ और आरोपियों तक पहुंचने में मददगार रहा। फिलहाल पहले गिरफ्तार किए गए दो आरोपियों को अदालत ने दो दिन के पुलिस रिमांड पर भेजा है, जबकि घायल आरोपियों से अस्पताल में उपचार के बाद पूछताछ की जाएगी। पुलिस पूरे नेटवर्क और संभावित आपराधिक संबंधों की जांच में जुटी हुई है।
डीसीपी क्राइम एंड ट्रैफिक अमरिंदर सिंह ने बताया कि 15 जून को पिंजौर निवासी एक युवक पेट्रोल पंप से स्कूटी में तेल डलवाकर घर लौट रहा था। इसी दौरान गौरी शंकर मंदिर के पास स्कॉर्पियो सवार चार युवकों ने रास्ता पूछने के बहाने उसे रोका और चाकू दिखाकर जबरन गाड़ी में बैठा लिया। आरोपियों ने युवक को चंडीमंदिर और बरवाला टोल प्लाजा की ओर ले जाकर कई घंटे तक बंधक बनाए रखा। इस दौरान बदमाशों ने पीड़ित से 12 हजार रुपये नकद, मोबाइल फोन और अन्य सामान लूट लिया। आरोपियों ने उसके ऑनलाइन पेमेंट ऐप का भी इस्तेमाल किया और रास्ते में पेट्रोल भरवाया। बाद में युवक को बरवाला अनाज मंडी के पास छोड़कर फरार हो गए। पुलिस जांच में यह तथ्य सामने आया कि आरोपी करीब एक सप्ताह पहले मनाली घूमने गए थे। वहां से लौटने के बाद उनके पास पैसे खत्म हो गए थे। इसके बाद उन्होंने आसान शिकार तलाश कर लूटपाट की वारदात को अंजाम देने की योजना बनाई और पिंजौर क्षेत्र में युवक का अपहरण कर लूट की घटना को अंजाम दिया।
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सीसीटीवी और टेक्निकल सर्विलांस से आरोपियों तक पहुंची पुलिस
घटना के बाद पुलिस की कई टीमों को जांच में लगाया गया। सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर क्राइम ब्रांच सेक्टर-19 की टीम ने एसीपी अमन और इंस्पेक्टर प्रवीण मलिक के नेतृत्व में 16 जून को दो आरोपी वीरेन और आशीष, निवासी चरखी दादरी को सेक्टर-19 फेज-1 क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ के दौरान मिली जानकारी के आधार पर पुलिस को शेष दो आरोपियों के अलीपुर इंडस्ट्रियल एरिया में छिपे होने की सूचना मिली। बुधवार सुबह पुलिस टीम जब मौके पर पहुंची और आरोपियों को आत्मसमर्पण करने के लिए कहा तो उन्होंने पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी।
पुलिस पर चली गोलियां, जवाबी कार्रवाई में दोनों घायल
पुलिस के अनुसार आरोपियों की ओर से चलाई गई दो गोलियां पुलिसकर्मियों की बुलेटप्रूफ जैकेट पर लगीं, जिससे बड़ा हादसा टल गया। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने तीन राउंड फायर किए, जिनमें दोनों आरोपियों के पैरों में गोली लगी। घायल होने के बाद उन्हें काबू कर लिया गया। घायल आरोपियों की पहचान भिवानी निवासी योगेश कुमार और चरखी दादरी निवासी दीपेश कुमार के रूप में हुई है। दोनों को उपचार के लिए सेक्टर-6 नागरिक अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
हथियार सप्लाई नेटवर्क से जुड़े तार
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि योगेश कुमार कथित तौर पर रोहित गोदारा गैंग के लिए काम करता है और हरियाणा व दिल्ली-एनसीआर में अवैध हथियारों की सप्लाई से जुड़ा रहा है। उसके खिलाफ गुरुग्राम में संगठित अपराध और आर्म्स एक्ट के मामले दर्ज हैं। वहीं दीपेश पर अपहरण और जानलेवा हमला करने जैसे संगीन मामले दर्ज बताए गए हैं। पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि चारों आरोपी छात्र हैं और वारदात को अंजाम देने के लिए उन्होंने एक परिचित से किराये पर स्कॉर्पियो वाहन लिया था।
5 हजार रुपये का ऑनलाइन ट्रांसफर बना अहम सुराग
वारदात के दौरान नकदी लूटने के बावजूद आरोपियों को और पैसों की जरूरत महसूस हुई। उन्होंने पीड़ित को धमकाकर अपने बताए गए गूगल पे नंबर पर 5 हजार रुपये ट्रांसफर करवाए। पुलिस के अनुसार यही ऑनलाइन ट्रांजेक्शन जांच में महत्वपूर्ण सुराग साबित हुआ और आरोपियों तक पहुंचने में मददगार रहा। फिलहाल पहले गिरफ्तार किए गए दो आरोपियों को अदालत ने दो दिन के पुलिस रिमांड पर भेजा है, जबकि घायल आरोपियों से अस्पताल में उपचार के बाद पूछताछ की जाएगी। पुलिस पूरे नेटवर्क और संभावित आपराधिक संबंधों की जांच में जुटी हुई है।