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Panchkula News: बेअदबी कानून को चुनौती, याचिकाकर्ता की विश्वसनीयता पर उठे सवाल

Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 30 Apr 2026 01:58 AM IST
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Sacrilege law challenged, questions raised on the credibility of the petitioner
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चंडीगढ़। पंजाब सरकार के जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) कानून को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान मामला इसकी सांविधानिकता से पहले याचिकाकर्ता की साख और याचिका की वैधता पर केंद्रित हो गया। कोर्ट ने स्पष्ट संकेत दिए कि सांविधानिक प्रश्नों पर विचार करने से पहले यह तय किया जाएगा कि क्या याचिकाकर्ता ने अदालत का दरवाजा साफ हाथों से खटखटाया है या नहीं।
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बुधवार को याची ने दलील दी कि पंजाब सरकार द्वारा 2008 के मूल अधिनियम में संशोधन कर बेअदबी और संबंधित अपराधों के लिए सजा को अत्यधिक कठोर बनाया गया है, जबकि भारतीय न्याय संहिता और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता में धार्मिक भावनाएं आहत करने और पूजा स्थलों के अपमान से जुड़े अपराधों के लिए पहले से प्रावधान मौजूद हैं। याचिकाकर्ता ने तर्क रखा कि चूंकि आपराधिक कानून संविधान की समवर्ती सूची का विषय है इसलिए यदि राज्य कानून केंद्रीय कानून से प्रतिकूल है तो अनुच्छेद 254 के तहत राष्ट्रपति की स्वीकृति आवश्यक थी। बिना राष्ट्रपति की मंजूरी यह कानून शून्य घोषित किया जा सकता है।
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पंजाब सरकार ने याची की पृष्ठभूमि पर गंभीर सवाल उठाते हुए बताया कि याचिकाकर्ता ने अपने खिलाफ पूर्व एफआईआर, बार काउंसिल से जुड़े विवाद, लाइसेंस निलंबन, पूर्व में लगाए गए जुर्माने और अन्य महत्वपूर्ण तथ्यों को पूर्ण रूप से उजागर नहीं किया। सरकार ने उसे आदती शिकायतकर्ता बताते हुए कहा कि बार-बार महत्वपूर्ण तथ्य छिपाकर जनहित याचिका दायर करना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग हो सकता है। पीठ ने कहा कि पहले यह देखा जाएगा कि याचिका सुनवाई योग्य है या प्रारंभिक स्तर पर ही खारिज की जानी चाहिए।
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