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पंजाब में ठेका व अस्थायी कर्मचारियों पर बना 2016 का कानून अब भी लागू : हाईकोर्ट
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चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अपने अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि पंजाब एडहॉक, कॉन्ट्रैक्चुअल, डेली वेज, टेम्परेरी, वर्क चार्ज्ड एंड आउटसोर्स्ड इंप्लाइज वेलफेयर अधिनियम, 2016 अब भी प्रभावी है। हाईकोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार ने 2021 में इसे बदलने के लिए विधेयक पेश किया था लेकिन उसे राज्यपाल की मंजूरी नहीं मिली इसलिए वह कानून नहीं बन सका। अदालत ने कहा कि जब तक किसी कानून को विधायिका की ओर से विधिवत निरस्त नहीं किया जाता या सक्षम अदालत उसे असांविधानिक घोषित नहीं करती, तब तक वह लागू रहता है।
अमृतसर नगर निगम के संविदा कर्मचारी ने अपनी सेवाओं को नियमित करने की मांग की थी। याचिकाकर्ता ने 20 जनवरी 2017 को एक आवेदन देकर कहा था कि उसकी सेवाएं 2016 के अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार नियमित की जाएं। हाईकोर्ट ने नवंबर 2021 में नगर निगम के आयुक्त को निर्देश दिया था कि वे कानून के अनुसार कारण सहित आदेश पारित करते हुए याचिकाकर्ता के आवेदन पर फैसला लें।
सुनवाई के दौरान तर्क दिया गया कि याचिकाकर्ता का दावा इस आधार पर खारिज किया गया कि 2016 का कानून 2021 के प्रस्तावित विधेयक से समाप्त हो चुका है लेकिन अदालत ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 200 के अनुसार किसी भी विधेयक को कानून बनने के लिए राज्यपाल की मंजूरी आवश्यक होती है। चूंकि पंजाब प्रोटेक्शन एंड रेगुलराइजेशन ऑफ कॉन्ट्रैक्चुअल इंप्लाइज बिल, 2021 को ऐसी मंजूरी नहीं मिली इसलिए वह कानून का दर्जा प्राप्त नहीं कर सका और उसके निरस्तीकरण संबंधी प्रावधान भी लागू नहीं हो सकते।
हालांकि अदालत ने यह स्पष्ट किया कि 2016 का कानून अब भी लागू है लेकिन याचिकाकर्ता को राहत देने से इन्कार कर दिया। अदालत ने कहा कि नियमितीकरण के लिए प्रारंभिक नियुक्ति का पारदर्शी प्रक्रिया से होना जरूरी है जबकि इस मामले में यह शर्त पूरी नहीं हुई थी। इस वजह से कर्मचारी की नियमितीकरण की मांग स्वीकार नहीं की जा सकती।
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अमृतसर नगर निगम के संविदा कर्मचारी ने अपनी सेवाओं को नियमित करने की मांग की थी। याचिकाकर्ता ने 20 जनवरी 2017 को एक आवेदन देकर कहा था कि उसकी सेवाएं 2016 के अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार नियमित की जाएं। हाईकोर्ट ने नवंबर 2021 में नगर निगम के आयुक्त को निर्देश दिया था कि वे कानून के अनुसार कारण सहित आदेश पारित करते हुए याचिकाकर्ता के आवेदन पर फैसला लें।
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सुनवाई के दौरान तर्क दिया गया कि याचिकाकर्ता का दावा इस आधार पर खारिज किया गया कि 2016 का कानून 2021 के प्रस्तावित विधेयक से समाप्त हो चुका है लेकिन अदालत ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 200 के अनुसार किसी भी विधेयक को कानून बनने के लिए राज्यपाल की मंजूरी आवश्यक होती है। चूंकि पंजाब प्रोटेक्शन एंड रेगुलराइजेशन ऑफ कॉन्ट्रैक्चुअल इंप्लाइज बिल, 2021 को ऐसी मंजूरी नहीं मिली इसलिए वह कानून का दर्जा प्राप्त नहीं कर सका और उसके निरस्तीकरण संबंधी प्रावधान भी लागू नहीं हो सकते।
हालांकि अदालत ने यह स्पष्ट किया कि 2016 का कानून अब भी लागू है लेकिन याचिकाकर्ता को राहत देने से इन्कार कर दिया। अदालत ने कहा कि नियमितीकरण के लिए प्रारंभिक नियुक्ति का पारदर्शी प्रक्रिया से होना जरूरी है जबकि इस मामले में यह शर्त पूरी नहीं हुई थी। इस वजह से कर्मचारी की नियमितीकरण की मांग स्वीकार नहीं की जा सकती।