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Panchkula News: आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के घोटाले में 15 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दायर
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बैंक अफसरों, सरकारी कर्मचारियों और फर्जी कंपनियों के गठजोड़ से सरकारी खातों से उड़ाए करोड़ों रुपये
संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक में हरियाणा सरकार के विभिन्न विभागों के खातों से हुए 504 करोड़ रुपये के बहुचर्चित घोटाले में सीबीआई ने बड़ा कदम उठाते हुए 15 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है। पंचकूला स्थित विशेष सीबीआई अदालत में पेश आरोप पत्र में बैंक अधिकारियों, सरकारी कर्मचारियों, फर्जी कंपनियों के संचालकों और एक निजी व्यक्ति को आरोपी बनाया है।
सीबीआई के अनुसार पूरा खेल सरकारी खातों से करोड़ों रुपये निकालकर उन्हें फर्जी कंपनियों और अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करने का था। जांच एजेंसी का दावा है कि बैंक अधिकारियों और सरकारी कर्मचारियों की मिलीभगत से सरकारी धन को सुनियोजित तरीके से ठिकाने लगाया गया।
सरकारी विभागों के कर्मचारी भी घेरे में
सीबीआई की चार्जशीट में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के छह अधिकारियों, हरियाणा सरकार के तीन कर्मचारियों, दो फर्जी कंपनियों और उनके तीन साझेदारों/निदेशकों तथा एक निजी व्यक्ति को नामजद किया गया है। जिन सरकारी कर्मचारियों के नाम सामने आए हैं, वे हरियाणा पावर जेनरेशन कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीजीसीएल), विकास एवं पंचायत विभाग और हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद (एचएसएसपीपी) से जुड़े बताए गए हैं। एजेंसी का आरोप है कि इन अधिकारियों और कर्मचारियों की सांठगांठ से सरकारी खातों से करोड़ों रुपये निकालकर अन्य खातों में ट्रांसफर किए गए।
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फर्जी कंपनियों के जरिए घुमाई गई रकम
सीबीआई के अनुसार चार्जशीट में नामजद सभी 15 आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। उनके खिलाफ आपराधिक साजिश, आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी, जालसाजी, साक्ष्य नष्ट करने और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं। जांच एजेंसी का कहना है कि सरकारी विभागों के खातों से निकाली गई रकम को फर्जी कंपनियों और कई बैंक खातों के जरिए घुमाया गया, ताकि पैसों के वास्तविक स्रोत को छिपाया जा सके।
अभी और बढ़ सकती है आरोपियों की सूची
सीबीआई ने स्पष्ट किया है कि जिन 15 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई है, उनके संबंध में जांच पूरी कर ली गई है। हालांकि अन्य संदिग्ध व्यक्तियों और दूसरे विभागों में धन के कथित दुरुपयोग को लेकर जांच अभी जारी है। एजेंसी के अनुसार जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आने वाले समय में अतिरिक्त चार्जशीट भी अदालत में दाखिल की जाएंगी।
पहले विजिलेंस के पास था मामला
यह मामला शुरुआत में हरियाणा राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के पास था। बाद में करोड़ों रुपये के इस कथित घोटाले की गंभीरता को देखते हुए जांच सीबीआई को सौंप दी गई। जांच एजेंसी ने बैंकिंग लेन-देन, सरकारी खातों और संबंधित दस्तावेजों की गहन पड़ताल के बाद यह चार्जशीट दाखिल की है। सीबीआई का कहना है कि भ्रष्टाचार और वित्तीय अपराधों के मामलों में निष्पक्ष और त्वरित जांच उसकी प्राथमिकता है तथा दोषियों को कानून के दायरे में लाने के लिए कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।
संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक में हरियाणा सरकार के विभिन्न विभागों के खातों से हुए 504 करोड़ रुपये के बहुचर्चित घोटाले में सीबीआई ने बड़ा कदम उठाते हुए 15 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है। पंचकूला स्थित विशेष सीबीआई अदालत में पेश आरोप पत्र में बैंक अधिकारियों, सरकारी कर्मचारियों, फर्जी कंपनियों के संचालकों और एक निजी व्यक्ति को आरोपी बनाया है।
सीबीआई के अनुसार पूरा खेल सरकारी खातों से करोड़ों रुपये निकालकर उन्हें फर्जी कंपनियों और अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करने का था। जांच एजेंसी का दावा है कि बैंक अधिकारियों और सरकारी कर्मचारियों की मिलीभगत से सरकारी धन को सुनियोजित तरीके से ठिकाने लगाया गया।
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सरकारी विभागों के कर्मचारी भी घेरे में
सीबीआई की चार्जशीट में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के छह अधिकारियों, हरियाणा सरकार के तीन कर्मचारियों, दो फर्जी कंपनियों और उनके तीन साझेदारों/निदेशकों तथा एक निजी व्यक्ति को नामजद किया गया है। जिन सरकारी कर्मचारियों के नाम सामने आए हैं, वे हरियाणा पावर जेनरेशन कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीजीसीएल), विकास एवं पंचायत विभाग और हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद (एचएसएसपीपी) से जुड़े बताए गए हैं। एजेंसी का आरोप है कि इन अधिकारियों और कर्मचारियों की सांठगांठ से सरकारी खातों से करोड़ों रुपये निकालकर अन्य खातों में ट्रांसफर किए गए।
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सीबीआई के अनुसार चार्जशीट में नामजद सभी 15 आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। उनके खिलाफ आपराधिक साजिश, आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी, जालसाजी, साक्ष्य नष्ट करने और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं। जांच एजेंसी का कहना है कि सरकारी विभागों के खातों से निकाली गई रकम को फर्जी कंपनियों और कई बैंक खातों के जरिए घुमाया गया, ताकि पैसों के वास्तविक स्रोत को छिपाया जा सके।
अभी और बढ़ सकती है आरोपियों की सूची
सीबीआई ने स्पष्ट किया है कि जिन 15 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई है, उनके संबंध में जांच पूरी कर ली गई है। हालांकि अन्य संदिग्ध व्यक्तियों और दूसरे विभागों में धन के कथित दुरुपयोग को लेकर जांच अभी जारी है। एजेंसी के अनुसार जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आने वाले समय में अतिरिक्त चार्जशीट भी अदालत में दाखिल की जाएंगी।
पहले विजिलेंस के पास था मामला
यह मामला शुरुआत में हरियाणा राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के पास था। बाद में करोड़ों रुपये के इस कथित घोटाले की गंभीरता को देखते हुए जांच सीबीआई को सौंप दी गई। जांच एजेंसी ने बैंकिंग लेन-देन, सरकारी खातों और संबंधित दस्तावेजों की गहन पड़ताल के बाद यह चार्जशीट दाखिल की है। सीबीआई का कहना है कि भ्रष्टाचार और वित्तीय अपराधों के मामलों में निष्पक्ष और त्वरित जांच उसकी प्राथमिकता है तथा दोषियों को कानून के दायरे में लाने के लिए कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।