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निजी स्कूलों की शर्त : किताबें, वर्दी और जूते भी तय दुकानों से खरीदना अनिवार्य

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 29 Mar 2026 03:35 AM IST
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Condition of private schools: It is mandatory to buy books, uniforms and shoes from designated shops.
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पानीपत। निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ चल रहे एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। अब अभिभावकों को केवल किताबें ही नहीं, बल्कि स्कूल वर्दी और जूते भी निर्धारित दुकानों से ही खरीदने के लिए बाध्य किया जा रहा है। इन दुकानों पर छात्रों की वर्दी के साथ-साथ जूते भी तय रेट पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे अभिभावकों के पास कोई विकल्प नहीं बचता।
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अभिभावकों का कहना है कि बच्चों के भविष्य को देखते हुए वे मजबूरी में स्कूलों के नियम मानने को विवश हैं। निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें और निर्धारित दुकानों से वर्दी खरीदने के कारण उनका आर्थिक बोझ लगातार बढ़ रहा है। खुले बाजार में सस्ता विकल्प होने के बावजूद उन्हें निर्धारित दुकानों से ही खरीदारी करनी पड़ रही है।
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वहीं, शिक्षा विभाग शिकायत न मिलने का हवाला देकर कार्रवाई से बचता नजर आ रहा है। अभिभावकों का आरोप है कि शिकायत करने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती, जिससे स्कूलों के हौसले बुलंद हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार यह स्थिति स्कूलों और दुकानदारों के बीच संभावित गठजोड़ की ओर इशारा करती है, जो नियमों के खिलाफ है। यदि प्रशासन समय रहते हस्तक्षेप नहीं करता, तो यह समस्या और गंभीर रूप ले सकती है।
पारदर्शी व्यवस्था और सख्त निगरानी की आवश्यकता लगातार महसूस की जा रही है। पड़ताल के दाैरान लोगों ने अपनी पीड़ा बताते हुए शिक्षा व्यवस्था पर कई सवाल उठाए। कहा कि एक बार फिर शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता को उजागर कर दिया है।
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