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Panipat News: चोरी हुए ट्रक का क्लेम न देना बीमा कंपनी को पड़ा भारी
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पानीपत। ट्रक चोरी होने के मामले में क्लेम न देना बीमा कंपनी को भारी पड़ गया। जिला उपभोक्ता आयोग ने कंपनी को छह प्रतिशत ब्याज के साथ 13 लाख रुपये का क्लेम देने के आदेश दिए हैं, साथ ही पांच हजार रुपये मानसिक क्षतिपूर्ति और 5500 रुपये मुकदमा खर्च के रूप में भी देने होंगे। समालखा निवासी रणबीर सिंह ने आयोग में याचिका दाखिल की थी।
उनका कहना था कि ट्रक दिसंबर 2019 में सोनीपत के गांव नाहरी से चोरी हो गया था। उन्होंने बीमा कंपनी से वाहन का बीमा करा रखा था। बीमे की धनराशि 13 लाख रुपये तय थी। चोरी की घटना के बाद प्राथमिकी दर्ज की गई थी। शिकायकर्ता ने बीमा कंपनी को इसकी सूचना दी और क्लेम की मांग की लेकिन कंपनी ने क्लेम देने से इन्कार कर दिया। बीमा कंपनी ने सुनवाई के दौरान दलील दी कि शिकायतकर्ता ने आवश्यक दस्तावेज समय पर उपलब्ध नहीं कराए, जिसके कारण क्लेम लंबित रहा। वहीं शिकायतकर्ता ने अनट्रेस रिपोर्ट सहित सभी जरूरी दस्तावेज आयोग के समक्ष पेश किए। सुनवाई के दौरान आयोग ने पाया कि वाहन चोरी होना सिद्ध है और घटना बीमा अवधि के दौरान हुई।
दस्तावेज में कोई ऐसी कमी नहीं पाई गई, जिससे क्लेम खारिज किया जा सके। ऐसे में बीमा कंपनी का दावा न देना सेवा में कमी माना गया।
आयोग ने बीमा कंपनी को 13 लाख रुपये का क्लेम छह प्रतिशत ब्याज के साथ शिकायतकर्ता को अदा करने के आदेश दिए। आयोग ने स्पष्ट किया कि आदेश का पालन 45 दिनों के भीतर किया जाए, अन्यथा राशि पर नौ प्रतिशत ब्याज देना होगा।
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उनका कहना था कि ट्रक दिसंबर 2019 में सोनीपत के गांव नाहरी से चोरी हो गया था। उन्होंने बीमा कंपनी से वाहन का बीमा करा रखा था। बीमे की धनराशि 13 लाख रुपये तय थी। चोरी की घटना के बाद प्राथमिकी दर्ज की गई थी। शिकायकर्ता ने बीमा कंपनी को इसकी सूचना दी और क्लेम की मांग की लेकिन कंपनी ने क्लेम देने से इन्कार कर दिया। बीमा कंपनी ने सुनवाई के दौरान दलील दी कि शिकायतकर्ता ने आवश्यक दस्तावेज समय पर उपलब्ध नहीं कराए, जिसके कारण क्लेम लंबित रहा। वहीं शिकायतकर्ता ने अनट्रेस रिपोर्ट सहित सभी जरूरी दस्तावेज आयोग के समक्ष पेश किए। सुनवाई के दौरान आयोग ने पाया कि वाहन चोरी होना सिद्ध है और घटना बीमा अवधि के दौरान हुई।
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दस्तावेज में कोई ऐसी कमी नहीं पाई गई, जिससे क्लेम खारिज किया जा सके। ऐसे में बीमा कंपनी का दावा न देना सेवा में कमी माना गया।
आयोग ने बीमा कंपनी को 13 लाख रुपये का क्लेम छह प्रतिशत ब्याज के साथ शिकायतकर्ता को अदा करने के आदेश दिए। आयोग ने स्पष्ट किया कि आदेश का पालन 45 दिनों के भीतर किया जाए, अन्यथा राशि पर नौ प्रतिशत ब्याज देना होगा।