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मित्रता में ऊंच-नीच का कोई स्थान नहीं : आचार्य लालमणि पांडेय
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
Updated Mon, 15 Jun 2026 02:21 AM IST
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श्रीमद्भागवत कथा में पूजा करते धनराज बंसल, राजबाला बंसल, अंकुर बंसल और प्रियंका बंसल। संवाद
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माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। आचार्य लालमणि पांडेय ने कहा कि मित्रता सबसे बड़ा संबंध है, जिसमें छोटा-बड़ा, ऊंच-नीच का कोई भेद नहीं होता। श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता से समाज को प्रेरणा लेनी चाहिए। जब सुदामा के आगमन की सूचना द्वारपाल ने श्रीकृष्ण को दी तो वे सभी कार्य छोड़कर अपने मित्र से मिलने पहुंचे और उनका सम्मान एक सच्चे मित्र की तरह किया।
वे रविवार को प्राचीन श्री देवी मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आज समाज में अवसरवादी प्रवृत्ति बढ़ रही है, जहां लोग स्वार्थ सिद्ध होते ही संबंधों को भूल जाते हैं, जिससे सामाजिक ताना-बाना कमजोर हो रहा है।
आचार्य ने कहा कि व्यक्ति को कभी भी अपने धन और बल का अभिमान नहीं करना चाहिए, क्योंकि यही विनाश का प्रमुख कारण बनता है। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण द्वारा बाणासुर के अहंकार के अंत और राजसूय यज्ञ में शिशुपाल के वध का उल्लेख करते हुए धर्म और मर्यादा का संदेश दिया।
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उन्होंने सुदामा चरित्र का विस्तार से वर्णन करते हुए कहा कि सच्ची मित्रता में न तो मांग होती है और न ही दिखावा। सुदामा ने अपनी गरीबी श्रीकृष्ण को नहीं बताई, जो एक सच्चे ब्राह्मण का परिचय है, जबकि भगवान श्रीकृष्ण ने उनकी स्थिति समझकर बिना मांगे ही उन्हें सब कुछ प्रदान कर दिया।
कथा के दौरान आचार्य लालमणि पांडेय ने हरे कृष्णा-हरे कृष्णा, कृष्णा-कृष्णा हरे-हरे, हरे रामा-हरे रामा, रामा-रामा हरे-हरे सहित कई भजनों की मनमोहक प्रस्तुति दी, जिस पर श्रद्धालु भावविभोर होकर झूम उठे।
इससे पूर्व धनराज बंसल, राजबाला बंसल, अंकुर बंसल और प्रियंका बंसल ने आचार्य का स्वागत किया। कथा के उपरांत आरती कर भोग लगाया गया और सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। प्रमोद बंसल ने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा के समापन पर सोमवार को सुबह मंदिर परिसर में हवन के साथ भंडारे का आयोजन होगा।
पानीपत। आचार्य लालमणि पांडेय ने कहा कि मित्रता सबसे बड़ा संबंध है, जिसमें छोटा-बड़ा, ऊंच-नीच का कोई भेद नहीं होता। श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता से समाज को प्रेरणा लेनी चाहिए। जब सुदामा के आगमन की सूचना द्वारपाल ने श्रीकृष्ण को दी तो वे सभी कार्य छोड़कर अपने मित्र से मिलने पहुंचे और उनका सम्मान एक सच्चे मित्र की तरह किया।
वे रविवार को प्राचीन श्री देवी मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आज समाज में अवसरवादी प्रवृत्ति बढ़ रही है, जहां लोग स्वार्थ सिद्ध होते ही संबंधों को भूल जाते हैं, जिससे सामाजिक ताना-बाना कमजोर हो रहा है।
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आचार्य ने कहा कि व्यक्ति को कभी भी अपने धन और बल का अभिमान नहीं करना चाहिए, क्योंकि यही विनाश का प्रमुख कारण बनता है। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण द्वारा बाणासुर के अहंकार के अंत और राजसूय यज्ञ में शिशुपाल के वध का उल्लेख करते हुए धर्म और मर्यादा का संदेश दिया।
उन्होंने सुदामा चरित्र का विस्तार से वर्णन करते हुए कहा कि सच्ची मित्रता में न तो मांग होती है और न ही दिखावा। सुदामा ने अपनी गरीबी श्रीकृष्ण को नहीं बताई, जो एक सच्चे ब्राह्मण का परिचय है, जबकि भगवान श्रीकृष्ण ने उनकी स्थिति समझकर बिना मांगे ही उन्हें सब कुछ प्रदान कर दिया।
कथा के दौरान आचार्य लालमणि पांडेय ने हरे कृष्णा-हरे कृष्णा, कृष्णा-कृष्णा हरे-हरे, हरे रामा-हरे रामा, रामा-रामा हरे-हरे सहित कई भजनों की मनमोहक प्रस्तुति दी, जिस पर श्रद्धालु भावविभोर होकर झूम उठे।
इससे पूर्व धनराज बंसल, राजबाला बंसल, अंकुर बंसल और प्रियंका बंसल ने आचार्य का स्वागत किया। कथा के उपरांत आरती कर भोग लगाया गया और सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। प्रमोद बंसल ने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा के समापन पर सोमवार को सुबह मंदिर परिसर में हवन के साथ भंडारे का आयोजन होगा।

श्रीमद्भागवत कथा में पूजा करते धनराज बंसल, राजबाला बंसल, अंकुर बंसल और प्रियंका बंसल। संवाद