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Rewari News: ग्रैप-वन की पाबंदियां लागू होने के बाद भी बिगड़ी आबोहवा, एक्यूआई 160 पहुंचा
Sat, 24 Oct 2026 11:28 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Sat, 24 Oct 2026 11:28 PM IST
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अनाज मंडी मार्ग पर सुबह के समय छाया प्रदूषण। संवाद
रेवाड़ी। जिले की आबोहवा फिर बिगड़ने लगी है। ग्रैप वन की पाबंदियां लगने के बाद भी शनिवार को एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 160 पहुंच गया जो सेहत के लिए नुकसानदायक है। एक्यूआई के इस स्तर पर अस्थमा और सांस की अन्य बीमारियों से पीडि़त लोगों की परेशानी बढ़ सकती है।
पांच दिन पहले जिले में अधिकतम वायु प्रदूषण का स्तर 80 दर्ज किया गया था। महज 5 दिनों में एक्यूआई में हुई बढ़ोतरी से साफ है कि वातावरण में प्रदूषण का असर बढ़ रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में हवा की गुणवत्ता पर नजर रखना जरूरी हो गया है। जिला यलो जोन में पहुंच गया है।
इस जोन में हवा में पीएम 2.5 प्रमुख प्रदूषक होने के कारण फेफड़ों, अस्थमा और हृदय संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों को सांस लेने में परेशानी हो सकती है।
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प्रदूषण का स्तर बढ़ने के साथ ही जिले में वायु गुणवत्ता को लेकर सतर्कता बढ़ गई है। फिलहाल ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रैप) के पहले चरण की पाबंदियां लागू की गई हैं। इसके बाद भी एक्यूआई बढ़ने का मतलब पाबंदियों पर अमल नहीं किया जाना हो सकता है।
सर्दियों की शुरुआत के साथ ही क्षेत्र में वायु प्रदूषण की समस्या बढ़ने लगती है। इस दौरान मौसम की परिस्थितियां, हवा की गति में कमी, वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल और अन्य प्रदूषणकारी गतिविधियां वायु गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती हैं।
रेड कैटेगरी में शामिल औद्योगिक इकाइयों की चिमनियों पर ऑनलाइन मॉनिटरिंग डिवाइस एप भी लगवाए गए हैं। जिनकी लाइव मॉनिटरिंग होगी। इस एप से पता लग सकेगा कि कंपनी की चिमनियों से कितनी धुआं निकल रही है। ऐसे में इसकी सीधी निगरानी हो सकेगी।
धूल नियंत्रण के उपायों पर रहेगा विशेष फोकस
प्रदूषण बोर्ड के एसडीओ अनिल ने बताया कि ग्रैप-1 के तहत इसके अंतर्गत निर्माण और तोड़फोड़ स्थलों पर धूल रोकने के उपाय करना, निर्माण सामग्री को ढककर रखना, सड़कों की नियमित सफाई और आवश्यकतानुसार पानी का छिड़काव करना अनिवार्य किया गया है। इसके अलावा, खुले में कचरा या अन्य सामग्री जलाने पर रोक रहेगी। प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की निगरानी की जाएगी, साथ ही वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र (पीयूसीसी) और उद्योगों में निर्धारित उत्सर्जन मानकों की पालना सुनिश्चित कराने के लिए संबंधित विभागों को मुस्तैद कर दिया गया है।
सांस संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों की बढ़ी परेशानी
फिजिशियन डॉक्टर मनीष ने बताया कि मौजूदा प्रदूषण के स्तर से अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और सीओपीडी जैसी सांस संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों की परेशानी बढ़ सकती है। इसके अलावा खांसी, गले में खराश, आंखों में जलन और सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्याएं हो सकती हैं। लंबे समय तक प्रदूषित हवा के संपर्क में रहने से फेफड़ों की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है। वहीं, हृदय रोगियों के लिए भी प्रदूषण नुकसानदायक हो सकता है। बच्चों, बुजुर्गों और सांस या हृदय संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
दिन : एक्यूआई
19 अक्तूबर 80
20 अक्तूबर 120
21 अक्तूबर 128
22 अक्तूबर 113
23 अक्तूबर 110
एक्यूआई स्तर-- श्रेणी -- स्वास्थ्य पर प्रभाव
0–50 अच्छा-- स्वास्थ्य पर न्यूनतम प्रभाव
51–100 संतोषजनक -संवेदनशील लोगों को सांस लेने में मामूली परेशानी हो सकती है
101–200 मध्यम -फेफड़ों, अस्थमा और हृदय रोग से पीड़ित लोगों को सांस लेने में परेशानी हो सकती है
201–300 खराब -लंबे समय तक प्रदूषित हवा में रहने से अधिकांश लोगों को सांस लेने में परेशानी हो सकती है
301–400 बहुत खराब -लंबे समय तक संपर्क में रहने से सांस संबंधी बीमारियां हो सकती हैं
401–500 गंभीर -स्वस्थ लोगों पर भी असर पड़ सकता है, जबकि पहले से बीमार लोगों की स्थिति गंभीर हो सकती है
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पांच दिन पहले जिले में अधिकतम वायु प्रदूषण का स्तर 80 दर्ज किया गया था। महज 5 दिनों में एक्यूआई में हुई बढ़ोतरी से साफ है कि वातावरण में प्रदूषण का असर बढ़ रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में हवा की गुणवत्ता पर नजर रखना जरूरी हो गया है। जिला यलो जोन में पहुंच गया है।
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इस जोन में हवा में पीएम 2.5 प्रमुख प्रदूषक होने के कारण फेफड़ों, अस्थमा और हृदय संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों को सांस लेने में परेशानी हो सकती है।
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प्रदूषण का स्तर बढ़ने के साथ ही जिले में वायु गुणवत्ता को लेकर सतर्कता बढ़ गई है। फिलहाल ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रैप) के पहले चरण की पाबंदियां लागू की गई हैं। इसके बाद भी एक्यूआई बढ़ने का मतलब पाबंदियों पर अमल नहीं किया जाना हो सकता है।
सर्दियों की शुरुआत के साथ ही क्षेत्र में वायु प्रदूषण की समस्या बढ़ने लगती है। इस दौरान मौसम की परिस्थितियां, हवा की गति में कमी, वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल और अन्य प्रदूषणकारी गतिविधियां वायु गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती हैं।
रेड कैटेगरी में शामिल औद्योगिक इकाइयों की चिमनियों पर ऑनलाइन मॉनिटरिंग डिवाइस एप भी लगवाए गए हैं। जिनकी लाइव मॉनिटरिंग होगी। इस एप से पता लग सकेगा कि कंपनी की चिमनियों से कितनी धुआं निकल रही है। ऐसे में इसकी सीधी निगरानी हो सकेगी।
धूल नियंत्रण के उपायों पर रहेगा विशेष फोकस
प्रदूषण बोर्ड के एसडीओ अनिल ने बताया कि ग्रैप-1 के तहत इसके अंतर्गत निर्माण और तोड़फोड़ स्थलों पर धूल रोकने के उपाय करना, निर्माण सामग्री को ढककर रखना, सड़कों की नियमित सफाई और आवश्यकतानुसार पानी का छिड़काव करना अनिवार्य किया गया है। इसके अलावा, खुले में कचरा या अन्य सामग्री जलाने पर रोक रहेगी। प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की निगरानी की जाएगी, साथ ही वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र (पीयूसीसी) और उद्योगों में निर्धारित उत्सर्जन मानकों की पालना सुनिश्चित कराने के लिए संबंधित विभागों को मुस्तैद कर दिया गया है।
सांस संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों की बढ़ी परेशानी
फिजिशियन डॉक्टर मनीष ने बताया कि मौजूदा प्रदूषण के स्तर से अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और सीओपीडी जैसी सांस संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों की परेशानी बढ़ सकती है। इसके अलावा खांसी, गले में खराश, आंखों में जलन और सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्याएं हो सकती हैं। लंबे समय तक प्रदूषित हवा के संपर्क में रहने से फेफड़ों की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है। वहीं, हृदय रोगियों के लिए भी प्रदूषण नुकसानदायक हो सकता है। बच्चों, बुजुर्गों और सांस या हृदय संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
दिन : एक्यूआई
19 अक्तूबर 80
20 अक्तूबर 120
21 अक्तूबर 128
22 अक्तूबर 113
23 अक्तूबर 110
एक्यूआई स्तर
0–50 अच्छा
51–100 संतोषजनक -संवेदनशील लोगों को सांस लेने में मामूली परेशानी हो सकती है
101–200 मध्यम -फेफड़ों, अस्थमा और हृदय रोग से पीड़ित लोगों को सांस लेने में परेशानी हो सकती है
201–300 खराब -लंबे समय तक प्रदूषित हवा में रहने से अधिकांश लोगों को सांस लेने में परेशानी हो सकती है
301–400 बहुत खराब -लंबे समय तक संपर्क में रहने से सांस संबंधी बीमारियां हो सकती हैं
401–500 गंभीर -स्वस्थ लोगों पर भी असर पड़ सकता है, जबकि पहले से बीमार लोगों की स्थिति गंभीर हो सकती है