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Rewari News: बिजली चोरी मामले में सिविल कोर्ट ने खारिज की याचिका
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रेवाड़ी। सिविल जज (सीनियर डिवीजन) जोगिंद्री की अदालत ने बिजली चोरी से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में वादी की याचिका खारिज कर दी है। यह मामला गांव चिमनावास निवासी सुभाष द्वारा दायर किया गया था जिसमें उन्होंने दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम लिमिटेड द्वारा जारी किए गए दो मेमो को अवैध और निरस्त घोषित करने की मांग की थी।
वादी ने अदालत में दायर वाद में कहा था कि उनके पास घरेलू बिजली कनेक्शन है और वे नियमित रूप से बिलों का भुगतान करते रहे हैं। 11 जुलाई 2019 को निगम की ओर से उन्हें 72,458 रुपये का आकलन शुल्क और 10 हजार रुपये का कंपाउंडिंग शुल्क जमा कराने का नोटिस दिया गया।
वादी का आरोप था कि उन्होंने किसी प्रकार की बिजली चोरी नहीं की और न ही मीटर के साथ छेड़छाड़ की गई। उन्होंने निगम पर गलत तरीके से कार्रवाई कर उत्पीड़न करने का आरोप लगाया।
वहीं निगम की ओर से अदालत में प्रस्तुत जवाब में कहा गया कि 9 जुलाई 2019 को जांच के दौरान पाया गया कि वादी दो कोर तार के माध्यम से सीधे सप्लाई लेकर घरेलू उपयोग कर रहे थे। जांच रिपोर्ट, फोटो और अन्य साक्ष्य अदालत में पेश किए गए। निगम ने दावा किया कि यह बिजली चोरी का स्पष्ट मामला था और नियमानुसार ही जुर्माना लगाया गया।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अदालत ने स्पष्ट किया कि इस प्रकार के विवादों के निस्तारण के लिए अधिनियम में विशेष प्रावधान और प्राधिकृत मंच निर्धारित हैं।
इसी आधार पर अदालत ने वादी की घोषणा और स्थायी निषेधाज्ञा संबंधी मांग को अस्वीकार करते हुए वाद खारिज कर दिया। हालांकि, संबंधित अधिनियम के तहत उपलब्ध उचित उपाय का लाभ उठाने के लिए स्वतंत्र है।
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वादी ने अदालत में दायर वाद में कहा था कि उनके पास घरेलू बिजली कनेक्शन है और वे नियमित रूप से बिलों का भुगतान करते रहे हैं। 11 जुलाई 2019 को निगम की ओर से उन्हें 72,458 रुपये का आकलन शुल्क और 10 हजार रुपये का कंपाउंडिंग शुल्क जमा कराने का नोटिस दिया गया।
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वादी का आरोप था कि उन्होंने किसी प्रकार की बिजली चोरी नहीं की और न ही मीटर के साथ छेड़छाड़ की गई। उन्होंने निगम पर गलत तरीके से कार्रवाई कर उत्पीड़न करने का आरोप लगाया।
वहीं निगम की ओर से अदालत में प्रस्तुत जवाब में कहा गया कि 9 जुलाई 2019 को जांच के दौरान पाया गया कि वादी दो कोर तार के माध्यम से सीधे सप्लाई लेकर घरेलू उपयोग कर रहे थे। जांच रिपोर्ट, फोटो और अन्य साक्ष्य अदालत में पेश किए गए। निगम ने दावा किया कि यह बिजली चोरी का स्पष्ट मामला था और नियमानुसार ही जुर्माना लगाया गया।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अदालत ने स्पष्ट किया कि इस प्रकार के विवादों के निस्तारण के लिए अधिनियम में विशेष प्रावधान और प्राधिकृत मंच निर्धारित हैं।
इसी आधार पर अदालत ने वादी की घोषणा और स्थायी निषेधाज्ञा संबंधी मांग को अस्वीकार करते हुए वाद खारिज कर दिया। हालांकि, संबंधित अधिनियम के तहत उपलब्ध उचित उपाय का लाभ उठाने के लिए स्वतंत्र है।