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Rewari News: रंगमंच पर जलवा बिखेर रहे हैं बंजारा संस्था के कलाकार
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रेवाड़ी। ये दुनिया एक रंगमंच है, हम सब एक पात्र हैं और विधाता इस ब्रह्मांड का निर्देशक है। विश्व रंगमंच दिवस पर यदि कला की दुनिया की बात करें तो रेवाड़ी में अनेक संस्थाओं के नाम उभरकर आते हैं। इनमें बंजारा संस्था का नाम रेवाड़ी में ही नहीं बल्कि विभिन्न शहरों में शान के साथ लिया जाता है।
संस्था के कलाकार जहां राष्ट्रीय स्तर की नाट्य प्रतियोगिताओं में अपनी पहचान बना चुके हैं वहीं मायानगरी मुंबई में भी कला का जलवा बिखेर चुके हैं। पिछले वर्ष संस्था ने पहली बार मुंबई रंगमंच पर अपने अनूठे हरियाणवी हास्य का प्रदर्शन कर इतिहास रच दिया था।
बंजारा के कलाकार पिछले 35 वर्षों से रंगमंच को जिंदा रखे हुए हैं। रंगमंच को दिशा देने और हरियाणवी संस्कृति को सहेजने के उद्देश्य से जिले के कुछ कलाकारों ने 1988 में संस्था का गठन किया और 1990 में संस्था का पंजीकरण हुआ। इसके बाद से नाटकों का सिलसिला जारी रहा।
संस्था भोंदू नाटक के अतिरिक्त महाभोज, गिरगिट, कोर्ट मार्शल, शहीदों ने लौ जगाई, संक्रमण, दीवाली 62 की समेत 25 से अधिक नाटकों का मंचन कर चुकी है। कलाकार भविष्य में एक भव्य आयोजन की तैयारी में जुटे हैं।
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संस्था के कलाकारों ने देश में कमाया नाम
संस्था के सचिव वरिष्ठ रंगकर्मी गोपाल शर्मा ने बताया कि संस्था के कलाकारों ने रेवाड़ी ही नहीं, देश की राजधानी दिल्ली, गुरुग्राम, रोहतक, चंडीगढ़, अलवर, जयपुर जैसे शहरों में अभिनय की छाप छोड़ी है। राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त अनूठे हरियाणवी हास्य सुख तै चाहवै जीवणा तो भोदूं बण के रह का गोल्डन जुबली शो मुंबई में हुआ। समाज को जागरूक करने के लिए साक्षरता अभियान व 1995 में बाढ़ पीड़ितों की मदद के साथ एक दशक तक संगीत नाटक अकादमी के सौजन्य से बाल कलाकारों के लिए प्रशिक्षण शिविर लगाकार रंगमंच के लिए नई पौध भी तैयार की। 1995 में उत्तरप्रदेश के रामनगर में आयोजित राष्ट्रीय नाट्य महोत्सव में संस्था ने एक साथ चार पुरस्कार जीते। अनूठे हरियाणवी हास्य-जै सुख तै चाहवै जीवणा तो भोंदू बण के रह-को राष्ट्रीय स्तर पर सर्वश्रेष्ठ हास्य नाटक, संस्था को सर्वश्रेष्ठ सांस्कृतिक संस्था सम्मान मिला।
हिंदी फिल्मों में काम कर चुके हैं संस्था निदेशक भाटोटिया
संस्था के निदेशक विजय भाटोटिया रंगमंच के साथ-साथ हरियाणवी फिल्मों का जाना माना चेहरा हैं। वे अनेक हिंदी फिल्मों में काम कर चुके हैं। उन्हें नाटक भोंदू के लिए सर्वश्रेष्ठ निदेशक का सम्मान मिल चुका है। रंगकर्मी, गोपाल शर्मा वशिष्ठ राष्ट्रीय स्तर पर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार पाकर पूरे प्रदेश को गौरवान्वित कर चुके हैं। फरवरी में उन्हें अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम में संचालन के लिए भी सम्मानित किया जा चुका है। संस्था के संरक्षकों में बॉलीवुड के अभिनेता गोबिंद नामदेव अग्रणी हैं तो खूबराम सैनी, ऋषि सिंघल आदि कलाकार अभिनय के साथ निर्देशन व निर्माता के रूप में पहचान बना चुके हैं। दिनेश गुप्ता, एडवोकेट विनय सैनी, एडवोकेट जितेंद्र शर्मा, एडवोकेट ममता रानी विनोद रंजन, योगेश कौशिक के अलावा वर्तमान पीढ़ी में विक्रांत सैनी, रविंद्र, मयंक, राघव आदि कलाकार संस्था की यात्रा को गति देने में लगे हैं।
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संस्था के कलाकार जहां राष्ट्रीय स्तर की नाट्य प्रतियोगिताओं में अपनी पहचान बना चुके हैं वहीं मायानगरी मुंबई में भी कला का जलवा बिखेर चुके हैं। पिछले वर्ष संस्था ने पहली बार मुंबई रंगमंच पर अपने अनूठे हरियाणवी हास्य का प्रदर्शन कर इतिहास रच दिया था।
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बंजारा के कलाकार पिछले 35 वर्षों से रंगमंच को जिंदा रखे हुए हैं। रंगमंच को दिशा देने और हरियाणवी संस्कृति को सहेजने के उद्देश्य से जिले के कुछ कलाकारों ने 1988 में संस्था का गठन किया और 1990 में संस्था का पंजीकरण हुआ। इसके बाद से नाटकों का सिलसिला जारी रहा।
संस्था भोंदू नाटक के अतिरिक्त महाभोज, गिरगिट, कोर्ट मार्शल, शहीदों ने लौ जगाई, संक्रमण, दीवाली 62 की समेत 25 से अधिक नाटकों का मंचन कर चुकी है। कलाकार भविष्य में एक भव्य आयोजन की तैयारी में जुटे हैं।
संस्था के कलाकारों ने देश में कमाया नाम
संस्था के सचिव वरिष्ठ रंगकर्मी गोपाल शर्मा ने बताया कि संस्था के कलाकारों ने रेवाड़ी ही नहीं, देश की राजधानी दिल्ली, गुरुग्राम, रोहतक, चंडीगढ़, अलवर, जयपुर जैसे शहरों में अभिनय की छाप छोड़ी है। राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त अनूठे हरियाणवी हास्य सुख तै चाहवै जीवणा तो भोदूं बण के रह का गोल्डन जुबली शो मुंबई में हुआ। समाज को जागरूक करने के लिए साक्षरता अभियान व 1995 में बाढ़ पीड़ितों की मदद के साथ एक दशक तक संगीत नाटक अकादमी के सौजन्य से बाल कलाकारों के लिए प्रशिक्षण शिविर लगाकार रंगमंच के लिए नई पौध भी तैयार की। 1995 में उत्तरप्रदेश के रामनगर में आयोजित राष्ट्रीय नाट्य महोत्सव में संस्था ने एक साथ चार पुरस्कार जीते। अनूठे हरियाणवी हास्य-जै सुख तै चाहवै जीवणा तो भोंदू बण के रह-को राष्ट्रीय स्तर पर सर्वश्रेष्ठ हास्य नाटक, संस्था को सर्वश्रेष्ठ सांस्कृतिक संस्था सम्मान मिला।
हिंदी फिल्मों में काम कर चुके हैं संस्था निदेशक भाटोटिया
संस्था के निदेशक विजय भाटोटिया रंगमंच के साथ-साथ हरियाणवी फिल्मों का जाना माना चेहरा हैं। वे अनेक हिंदी फिल्मों में काम कर चुके हैं। उन्हें नाटक भोंदू के लिए सर्वश्रेष्ठ निदेशक का सम्मान मिल चुका है। रंगकर्मी, गोपाल शर्मा वशिष्ठ राष्ट्रीय स्तर पर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार पाकर पूरे प्रदेश को गौरवान्वित कर चुके हैं। फरवरी में उन्हें अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम में संचालन के लिए भी सम्मानित किया जा चुका है। संस्था के संरक्षकों में बॉलीवुड के अभिनेता गोबिंद नामदेव अग्रणी हैं तो खूबराम सैनी, ऋषि सिंघल आदि कलाकार अभिनय के साथ निर्देशन व निर्माता के रूप में पहचान बना चुके हैं। दिनेश गुप्ता, एडवोकेट विनय सैनी, एडवोकेट जितेंद्र शर्मा, एडवोकेट ममता रानी विनोद रंजन, योगेश कौशिक के अलावा वर्तमान पीढ़ी में विक्रांत सैनी, रविंद्र, मयंक, राघव आदि कलाकार संस्था की यात्रा को गति देने में लगे हैं।