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Rewari News: अब परिवार पहचान पत्र के बिना भी स्कूलों में मिलेगा दाखिला
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Thu, 09 Apr 2026 11:34 PM IST
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रेवाड़ी। जिले के सरकारी स्कूलों में अब दाखिले के लिए परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) अनिवार्य नहीं रहेगा। जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय ने सभी स्कूलों को निर्देश दिए हैं कि किसी भी बच्चे को दस्तावेजों की कमी के आधार पर प्रवेश से वंचित न किया जाए। ऐसे बच्चों को अस्थायी दाखिला देने के आदेश जारी किए गए हैं।
अधिकारियों के अनुसार कई प्रवासी श्रमिक परिवारों के बच्चों के पास हरियाणा का परिवार पहचान पत्र या आधार कार्ड नहीं होता है। इसके चलते उन्हें अब तक स्कूलों में प्रवेश लेने में परेशानी का सामना करना पड़ता था। नए निर्देशों के बाद अब इन बच्चों की पढ़ाई बाधित नहीं होगी।
स्कूल स्टाफ अपनी एमआईएस कर्मचारी आईडी का उपयोग करते हुए ऐसे बच्चों के लिए अस्थायी प्रवेश आईडी तैयार करेगा। यह आईडी तब तक मान्य रहेगा, जब तक संबंधित बच्चे का परिवार पहचान पत्र नहीं बन जाता।
विभाग की ओर से यह भी निर्देश दिए गए हैं कि जिन बच्चों का दाखिला अस्थायी आईडी के आधार पर किया गया है, उनका अलग से रजिस्टर तैयार किया जाए। इससे रिकॉर्ड व्यवस्थित रहेगा और आगे की प्रक्रिया में सुविधा होगी। शिक्षा विभाग के इस फैसले से जिले में खासकर प्रवासी परिवारों के बच्चों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
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दस्तावेज की कमी पर नहीं रोका जाएगा दाखिला
मौलिक शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि किसी भी बच्चे को दस्तावेजों की कमी के आधार पर स्कूल में प्रवेश से वंचित नहीं किया जा सकता। विभाग ने अपने आदेश में बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम (आरटीई) का हवाला देते हुए कहा है कि 6 से 14 वर्ष तक के प्रत्येक बच्चे को शिक्षा प्राप्त करना उसका कानूनी अधिकार है। यदि किसी बच्चे के पास आवश्यक दस्तावेज नहीं हैं, तब भी स्कूल उसे अस्थायी रूप से दाखिला देने के लिए बाध्य होंगे। बाद में आवश्यक कागजात पूरे कराए जा सकते हैं। विभाग ने सभी सरकारी स्कूलों को यह भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं कि वे अपने आसपास के क्षेत्र में रहने वाले 6 से 14 वर्ष आयु वर्ग के सभी बच्चों का सर्वे कर उन्हें स्कूल से जोड़ें। आदेश में कहा गया है कि किसी भी परिस्थिति में बच्चे को शिक्षा से वंचित नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि यह कानून के खिलाफ है।
वर्जन
स्कूलों में ड्रॉप आउट की स्थिति को पूरी तरह खत्म किया जाए। इसके लिए विभाग निर्देश जारी कर रहा है। हर वर्ष ऐसे मामले सामने आते हैं जिसमें बच्चों का दाखिला दस्तावेजों की कमी के कारण नहीं हो पाता है जिससे वे शिक्षा से वंचित रह जाते हैं।- बिजेंद्र हुड्डा, जिला शिक्षा अधिकारी, रेवाड़ी।
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स्कूल स्टाफ अपनी एमआईएस कर्मचारी आईडी का उपयोग करते हुए ऐसे बच्चों के लिए अस्थायी प्रवेश आईडी तैयार करेगा। यह आईडी तब तक मान्य रहेगा, जब तक संबंधित बच्चे का परिवार पहचान पत्र नहीं बन जाता।
विभाग की ओर से यह भी निर्देश दिए गए हैं कि जिन बच्चों का दाखिला अस्थायी आईडी के आधार पर किया गया है, उनका अलग से रजिस्टर तैयार किया जाए। इससे रिकॉर्ड व्यवस्थित रहेगा और आगे की प्रक्रिया में सुविधा होगी। शिक्षा विभाग के इस फैसले से जिले में खासकर प्रवासी परिवारों के बच्चों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
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दस्तावेज की कमी पर नहीं रोका जाएगा दाखिला
मौलिक शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि किसी भी बच्चे को दस्तावेजों की कमी के आधार पर स्कूल में प्रवेश से वंचित नहीं किया जा सकता। विभाग ने अपने आदेश में बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम (आरटीई) का हवाला देते हुए कहा है कि 6 से 14 वर्ष तक के प्रत्येक बच्चे को शिक्षा प्राप्त करना उसका कानूनी अधिकार है। यदि किसी बच्चे के पास आवश्यक दस्तावेज नहीं हैं, तब भी स्कूल उसे अस्थायी रूप से दाखिला देने के लिए बाध्य होंगे। बाद में आवश्यक कागजात पूरे कराए जा सकते हैं। विभाग ने सभी सरकारी स्कूलों को यह भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं कि वे अपने आसपास के क्षेत्र में रहने वाले 6 से 14 वर्ष आयु वर्ग के सभी बच्चों का सर्वे कर उन्हें स्कूल से जोड़ें। आदेश में कहा गया है कि किसी भी परिस्थिति में बच्चे को शिक्षा से वंचित नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि यह कानून के खिलाफ है।
वर्जन
स्कूलों में ड्रॉप आउट की स्थिति को पूरी तरह खत्म किया जाए। इसके लिए विभाग निर्देश जारी कर रहा है। हर वर्ष ऐसे मामले सामने आते हैं जिसमें बच्चों का दाखिला दस्तावेजों की कमी के कारण नहीं हो पाता है जिससे वे शिक्षा से वंचित रह जाते हैं।- बिजेंद्र हुड्डा, जिला शिक्षा अधिकारी, रेवाड़ी।