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Rewari News: शहर में 30 से अधिक जर्जर भवन, मानसून सीजन में जमींदोज होने का डर
Fri, 10 Jul 2026 11:55 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Fri, 10 Jul 2026 11:55 PM IST
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संघी का बास मोहल्ले में जर्जर पड़ा मकान। संवाद
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रेवाड़ी। मानसून सीजन में शहर के विभिन्न मोहल्लों और गांवों में स्थित 30 से अधिक बेहद जर्जर भवनों के जमींदोज होने का खतरा बढ़ गया है। ऐसे भवनों की दीवारों में दरारें आ रही हैं। छतें कमजोर हो गई हैं। जगह-जगह से प्लास्टर छूट कर गिर रहा है। ऐसे भवनों की मरम्मत वर्षों से नहीं कराई गई है और न ही इन्हें गिराया गया है।
नगर परिषद की ओर से ऐसे भवनों को मालिकों को नोटिस देने का दावा तो किया जा रहा है लेकिन जर्जर भवनों को गिराने की कार्रवाई नहीं की गई।
शहर के मुक्तिवाड़ा में वर्षों पुरानी मुक्ति हवेली काफी जर्जर हो गई है। यह ऐतिहासिक भवन लंबे समय से उपेक्षा का शिकार है। बरसात के दौरान इसकी हालत और अधिक खराब हो जाती है। शहर के कई पुराने भवन खाली पड़े हैं। नींव में बारिश का पानी भरने से ऐसे भवनों को ढहने का खतरा बढ़ गया है।
तीन वर्ष पहले बारिश के दौरान शहर के ऐतिहासिक भाड़ावास गेट का एक हिस्सा गिर गया था। उस समय नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे थे।
शहर के मोहल्ला मुक्तिवाड़ा, शुक्रपुरा, तेजपुरा, बास सिताबराय, संघी का बास, चौधरीवाड़ा में पुराने जर्जर भवन हैं, जो खंडहर में तब्दील हो चुके हैं। इनमें से कई तो ऐसे हैं जो लंबे समय से बंद हैं। भवन मालिकों ने थोड़े मुनाफे के लिए जर्जर भवनों में किरायेदार बसा दिए हैं।
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जर्जर भवनों को गिराने के लिए नगर परिषद में शिकायत की जाती है। नगर परिषद के इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारी मौके का मुआयना करके लोक निर्माण विभाग को स्थिति से अवगत कराते हैं। इसके बाद लोक निर्माण विभाग के अधिकारी भवन का निरीक्षण कर उसे ध्वस्त करने या नहीं कराने के निर्देश देते हैं।
जर्जर भवनों की सूची बनाने तक ही कार्रवाई सीमित
नगर परिषद समय-समय पर सर्वे करने और भवन मालिकों को नोटिस जारी करने का दावा करती है लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति में खास बदलाव नहीं दिखाई देता। प्रशासन के पास खतरनाक भवनों की सूची होने के बावजूद कार्रवाई की रफ्तार बेहद धीमी है। कई भवन अब भी आबादी के बीच खड़े हैं, जिससे आसपास रहने वाले लोगों में हर बारिश के दौरान भय का माहौल बना रहता है। नगर परिषद की ओर से जर्जर भवनों की सूची तो बनाई जाती है लेकिन ध्वस्तीकरण की कार्रवाई नहीं की जाती है।
चिह्नित कर सुरक्षित किए जाएं खतरनाक भवन
भाड़ावास गेट निवासी रोहित ने बताया कि मानसून के दौरान किसी बड़े हादसे से पहले सभी खतरनाक भवनों की पहचान कर उन्हें सुरक्षित कराया जाए या तत्काल ध्वस्त कराया जाए। कायस्थवाड़ा निवासी राजेश कुमार ने बताया कि वर्षों से अपने जर्जर भवनों की अनदेखी करने वाले भवन मालिकों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में किसी की जान जोखिम में न पड़े।
वर्जन
शहर में जर्जर भवनों की नई सूची तैयार कराई जा रही है। सूची तैयार होने के बाद संबंधित विभागों और भवन मालिकों को कार्रवाई के लिए पत्र भेजे जाएंगे। आवश्यकतानुसार ऐसे भवनों को गिराने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।- अरुण नांदल, कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद।
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नगर परिषद की ओर से ऐसे भवनों को मालिकों को नोटिस देने का दावा तो किया जा रहा है लेकिन जर्जर भवनों को गिराने की कार्रवाई नहीं की गई।
शहर के मुक्तिवाड़ा में वर्षों पुरानी मुक्ति हवेली काफी जर्जर हो गई है। यह ऐतिहासिक भवन लंबे समय से उपेक्षा का शिकार है। बरसात के दौरान इसकी हालत और अधिक खराब हो जाती है। शहर के कई पुराने भवन खाली पड़े हैं। नींव में बारिश का पानी भरने से ऐसे भवनों को ढहने का खतरा बढ़ गया है।
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तीन वर्ष पहले बारिश के दौरान शहर के ऐतिहासिक भाड़ावास गेट का एक हिस्सा गिर गया था। उस समय नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे थे।
शहर के मोहल्ला मुक्तिवाड़ा, शुक्रपुरा, तेजपुरा, बास सिताबराय, संघी का बास, चौधरीवाड़ा में पुराने जर्जर भवन हैं, जो खंडहर में तब्दील हो चुके हैं। इनमें से कई तो ऐसे हैं जो लंबे समय से बंद हैं। भवन मालिकों ने थोड़े मुनाफे के लिए जर्जर भवनों में किरायेदार बसा दिए हैं।
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जर्जर भवनों को गिराने के लिए नगर परिषद में शिकायत की जाती है। नगर परिषद के इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारी मौके का मुआयना करके लोक निर्माण विभाग को स्थिति से अवगत कराते हैं। इसके बाद लोक निर्माण विभाग के अधिकारी भवन का निरीक्षण कर उसे ध्वस्त करने या नहीं कराने के निर्देश देते हैं।
जर्जर भवनों की सूची बनाने तक ही कार्रवाई सीमित
नगर परिषद समय-समय पर सर्वे करने और भवन मालिकों को नोटिस जारी करने का दावा करती है लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति में खास बदलाव नहीं दिखाई देता। प्रशासन के पास खतरनाक भवनों की सूची होने के बावजूद कार्रवाई की रफ्तार बेहद धीमी है। कई भवन अब भी आबादी के बीच खड़े हैं, जिससे आसपास रहने वाले लोगों में हर बारिश के दौरान भय का माहौल बना रहता है। नगर परिषद की ओर से जर्जर भवनों की सूची तो बनाई जाती है लेकिन ध्वस्तीकरण की कार्रवाई नहीं की जाती है।
चिह्नित कर सुरक्षित किए जाएं खतरनाक भवन
भाड़ावास गेट निवासी रोहित ने बताया कि मानसून के दौरान किसी बड़े हादसे से पहले सभी खतरनाक भवनों की पहचान कर उन्हें सुरक्षित कराया जाए या तत्काल ध्वस्त कराया जाए। कायस्थवाड़ा निवासी राजेश कुमार ने बताया कि वर्षों से अपने जर्जर भवनों की अनदेखी करने वाले भवन मालिकों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में किसी की जान जोखिम में न पड़े।
वर्जन
शहर में जर्जर भवनों की नई सूची तैयार कराई जा रही है। सूची तैयार होने के बाद संबंधित विभागों और भवन मालिकों को कार्रवाई के लिए पत्र भेजे जाएंगे। आवश्यकतानुसार ऐसे भवनों को गिराने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।- अरुण नांदल, कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद।

संघी का बास मोहल्ले में जर्जर पड़ा मकान। संवाद