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Rewari News: शहर में 34.42 लाख रुपये से पकड़े जाएंगे बेसहारा पशु
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Thu, 15 Jan 2026 12:09 AM IST
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फोटो: 01रेवाड़ी। अनाज मंडी मार्ग के पास खड़े पशु। संवाद
- फोटो : शव मिलने के बाद रोते बिलखते परिजन।
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रेवाड़ी। शहर में लगातार बढ़ रही बेसहारा पशुओं की समस्या से निजात दिलाने के लिए नगर परिषद ने आखिरकार टेंडर जारी कर दिया है। क्षेत्र में गाय, बछड़े, बैल को पकड़ने के लिए 34.42 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। टेंडर भरने की अंतिम तिथि 17 जनवरी निर्धारित की गई है।
पशुओं को पकड़कर गोशालाओं तक पहुंचाने की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की पालना को लेकर 18 दिसंबर 2025 को डीसी अभिषेक मीणा ने संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ लघु सचिवालय स्थित सभागार में बैठक की थी। उन्होंने कहा था कि सार्वजनिक स्थानों बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, अस्पताल, स्टेडियम व शिक्षण संस्थानों के आसपास कुत्ते और खुले में घूम रहे पशु आने वाले दिनों में नहीं दिखाई देंगे।
इन जगहों को पूर्णत: कुत्तों और खुले में घूम रहे पशुओं से मुक्त बनाया जाएगा। नोडल अधिकारी को नियुक्त किया गया। इसके बाद कुत्तों के बधियाकरण को लेकर 45 लाख रुपये खर्च कर कार्य शुरू किया जा चुका है। अब पशुओं को पकड़ने का कार्य शुरू किया जाएगा।
इंसेट
इन नियमों का करना होगा पालन
यह निविदा केवल पशुओं को पकड़ने तक सीमित नहीं है बल्कि उन्हें सुरक्षित स्थानांतरित करने और मानवीय व्यवहार सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है। ठेकेदार को पशु क्रूरता अधिनियम के नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा। इसके तहत किसी भी पशु के साथ अमानवीय व्यवहार नहीं किया जाना चाहिए। पशुओं को पकड़ने के लिए प्रशिक्षित कर्मचारियों और उपयुक्त वाहनों की व्यवस्था करनी होगी।
इंसेट
29 पालकों को पशु छोड़ने के लिए किया जा चुका चिह्नित
वर्ष 2025 में तमाम कोशिशों के बावजूद पशुओं की संख्या में कोई खास कमी नहीं आई तो इस समस्या की जड़ तक जाने की कोशिश की गई। नगर परिषद के अधिकारियों को पता चला कि शहर में 29 पालक जानबूझकर पशुओं को छोड़ देते हैं। जांच में ऐसे 29 पशुपालक चिह्नित किए गए, जिनके कारण सड़कों पर पशुओं की संख्या बढ़ती जा रही है। ऐसा पहली बार हुआ था जब नगर परिषद ने पशुपालकों के खिलाफ कार्रवाई के लिए कहा गया था। इस बार भी यह स्थिति देखने को मिल सकती है।
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इस वजह से बढ़ती है पशुओं की संख्या
हर साल पशुओं की संख्या बढ़ने का एक मुख्य कारण यह भी है कि लक्ष्य हमेशा एक जैसा ही रहा है। औसतन हर साल की बात करें तो 1300 के आसपास पशु पकड़े जाते हैं। साल 2021 में भी 1300 पशु, 2022, 2023, 2024 में कुछ सुधार हुआ। 1800 से अधिक पशु पकड़े गए। नगर परिषद इस बार भी लक्ष्य बढ़ाने पर जोर दे रहा है। दूसरी सबसे बड़ी चुनौती ये रहती है कि गौशालाएं फुल हो जाती हैं। ऐसे में समस्या काफी बढ़ जाती है। इस बार भी यही समस्या देखने को मिली।
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पशुओं की वजह से हो चुके कई हादसे
बेसहारा पशु के हमले से करीब 4 साल पहले एक फोटोग्राफर की मौत हो गई थी। इसके बाद शहर के लोगों ने कई दिन तक धरना-प्रदर्शन भी किया था। दिसंबर में को भाड़ावास फाटक के पास एक सांड़ ने शिक्षिका पर हमला कर दिया था। इससे उसके हाथ, पैर, सिर में गंभीर चोट लगी थी। कुछ दिनों पहले अनाज मंडी में दो सांड़ों के लड़ने की वजह से एक खंभा भी टूट गया था। पिछले वर्ष फरवरी में गढ़ी बोलनी रोड पर एक निर्माणाधीन साइट पर काम कर रहे पांच मजदूरों पर एक पागल कुत्ते ने हमला कर दिया था। इससे सभी लोग जख्मी हो गए थे। पिछले वर्ष पशुओं ने सेक्टरों ओर बाजारों में कई लोगों को नुकसान पहुंचाया था।
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वर्जन:
पशुओं को पकड़ने का कार्य नगर परिषद की तरफ से किया जाएगा। इसके लिए नगर परिषद जल्द कार्य शुरू करेगी। - पूनम यादव, चेयरपर्सन, नगर परिषद रेवाड़ी।
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पशुओं को पकड़कर गोशालाओं तक पहुंचाने की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की पालना को लेकर 18 दिसंबर 2025 को डीसी अभिषेक मीणा ने संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ लघु सचिवालय स्थित सभागार में बैठक की थी। उन्होंने कहा था कि सार्वजनिक स्थानों बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, अस्पताल, स्टेडियम व शिक्षण संस्थानों के आसपास कुत्ते और खुले में घूम रहे पशु आने वाले दिनों में नहीं दिखाई देंगे।
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इन जगहों को पूर्णत: कुत्तों और खुले में घूम रहे पशुओं से मुक्त बनाया जाएगा। नोडल अधिकारी को नियुक्त किया गया। इसके बाद कुत्तों के बधियाकरण को लेकर 45 लाख रुपये खर्च कर कार्य शुरू किया जा चुका है। अब पशुओं को पकड़ने का कार्य शुरू किया जाएगा।
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इन नियमों का करना होगा पालन
यह निविदा केवल पशुओं को पकड़ने तक सीमित नहीं है बल्कि उन्हें सुरक्षित स्थानांतरित करने और मानवीय व्यवहार सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है। ठेकेदार को पशु क्रूरता अधिनियम के नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा। इसके तहत किसी भी पशु के साथ अमानवीय व्यवहार नहीं किया जाना चाहिए। पशुओं को पकड़ने के लिए प्रशिक्षित कर्मचारियों और उपयुक्त वाहनों की व्यवस्था करनी होगी।
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29 पालकों को पशु छोड़ने के लिए किया जा चुका चिह्नित
वर्ष 2025 में तमाम कोशिशों के बावजूद पशुओं की संख्या में कोई खास कमी नहीं आई तो इस समस्या की जड़ तक जाने की कोशिश की गई। नगर परिषद के अधिकारियों को पता चला कि शहर में 29 पालक जानबूझकर पशुओं को छोड़ देते हैं। जांच में ऐसे 29 पशुपालक चिह्नित किए गए, जिनके कारण सड़कों पर पशुओं की संख्या बढ़ती जा रही है। ऐसा पहली बार हुआ था जब नगर परिषद ने पशुपालकों के खिलाफ कार्रवाई के लिए कहा गया था। इस बार भी यह स्थिति देखने को मिल सकती है।
इस वजह से बढ़ती है पशुओं की संख्या
हर साल पशुओं की संख्या बढ़ने का एक मुख्य कारण यह भी है कि लक्ष्य हमेशा एक जैसा ही रहा है। औसतन हर साल की बात करें तो 1300 के आसपास पशु पकड़े जाते हैं। साल 2021 में भी 1300 पशु, 2022, 2023, 2024 में कुछ सुधार हुआ। 1800 से अधिक पशु पकड़े गए। नगर परिषद इस बार भी लक्ष्य बढ़ाने पर जोर दे रहा है। दूसरी सबसे बड़ी चुनौती ये रहती है कि गौशालाएं फुल हो जाती हैं। ऐसे में समस्या काफी बढ़ जाती है। इस बार भी यही समस्या देखने को मिली।
पशुओं की वजह से हो चुके कई हादसे
बेसहारा पशु के हमले से करीब 4 साल पहले एक फोटोग्राफर की मौत हो गई थी। इसके बाद शहर के लोगों ने कई दिन तक धरना-प्रदर्शन भी किया था। दिसंबर में को भाड़ावास फाटक के पास एक सांड़ ने शिक्षिका पर हमला कर दिया था। इससे उसके हाथ, पैर, सिर में गंभीर चोट लगी थी। कुछ दिनों पहले अनाज मंडी में दो सांड़ों के लड़ने की वजह से एक खंभा भी टूट गया था। पिछले वर्ष फरवरी में गढ़ी बोलनी रोड पर एक निर्माणाधीन साइट पर काम कर रहे पांच मजदूरों पर एक पागल कुत्ते ने हमला कर दिया था। इससे सभी लोग जख्मी हो गए थे। पिछले वर्ष पशुओं ने सेक्टरों ओर बाजारों में कई लोगों को नुकसान पहुंचाया था।
वर्जन:
पशुओं को पकड़ने का कार्य नगर परिषद की तरफ से किया जाएगा। इसके लिए नगर परिषद जल्द कार्य शुरू करेगी। - पूनम यादव, चेयरपर्सन, नगर परिषद रेवाड़ी।