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Rohtak News: सीईओ की स्थायी नियुक्ति की मांग को लेकर पार्षदों ने दिया धरना
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45 रोहतक के जिला विकास भवन में सीईओ की तैनाती की मांग को लेकर धरना देते पार्षद। संवाद
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रोहतक। जिला परिषद के कुछ पार्षदों ने स्थायी सीईओ की नियुक्ति की मांग को लेकर मंगलवार को जिला विकास भवन के बाहर धरना दिया। जब तक स्थायी सीईओ नहीं मिलेगा, धरना प्रदर्शन जारी रहेगा।
पार्षदों ने कहा कि एडीसी नरेंद्र कुमार जिला परिषद के सीईओ हैं। इनके पास कई विभागों की जिम्मेदारी है। एडीसी के अलावा जिला परिषद के सीईओ, नगर निगम के आयुक्त, एचएसवीपी का कार्य भी उन्हीं के पास है। समाधान शिविर व वीआईपी मूवमेंट में भी उनकी ड्यूटी लगाई जाती है। इस कारण वह जिला परिषद को समय नहीं दे पा रहे हैं।
जिला परिषद धीरज मलिक ने कहा कि स्थायी सीईओ नहीं होने से पूरे जिले के काम प्रभावित हो रहे हैं। एडीसी के पास काम का बोझ अधिक है। सरपंच आते हैं तो लंबा इंतजार करना पड़ता है। कई बार तो इंतजार के बावजूद समय नहीं मिल पाता है। इस कारण बगैर समस्या पर चर्चा या समाधान के ही लौटना पड़ता है।
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पार्षद जयदेव डागर ने कहा कि एडीसी अच्छे अधिकारी हैं। इसका मतलब यह नहीं कि अधिकारी काबिल हो तो उस पर काम का बोझ लाद दिया जाए। एडीसी के पास चार विभागों का कार्यभार है। इस कारण वह समय नहीं दे पा रहे हैं। जनता के काम अटके हुए हैं।
जिला परिषद के वाइस चेयरमैन अनिल हुड्डा ने कहा कि उन्हें मजबूर होकर धरने पर बैठना पड़ा है। सीईओ अपना समय नहीं दे पा रहे हैं। सरकार ने कई जिलों में स्थायी सीईओ लगाए हैं। यह समय भी दे रहे हैं। काम भी कर रहे हैं। हम सरकार या अधिकारी की खिलाफत न करके स्थायी सीईओ की मांग कर रहे हैं।
पार्षदों ने कहा कि एडीसी नरेंद्र कुमार जिला परिषद के सीईओ हैं। इनके पास कई विभागों की जिम्मेदारी है। एडीसी के अलावा जिला परिषद के सीईओ, नगर निगम के आयुक्त, एचएसवीपी का कार्य भी उन्हीं के पास है। समाधान शिविर व वीआईपी मूवमेंट में भी उनकी ड्यूटी लगाई जाती है। इस कारण वह जिला परिषद को समय नहीं दे पा रहे हैं।
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जिला परिषद धीरज मलिक ने कहा कि स्थायी सीईओ नहीं होने से पूरे जिले के काम प्रभावित हो रहे हैं। एडीसी के पास काम का बोझ अधिक है। सरपंच आते हैं तो लंबा इंतजार करना पड़ता है। कई बार तो इंतजार के बावजूद समय नहीं मिल पाता है। इस कारण बगैर समस्या पर चर्चा या समाधान के ही लौटना पड़ता है।
पार्षद जयदेव डागर ने कहा कि एडीसी अच्छे अधिकारी हैं। इसका मतलब यह नहीं कि अधिकारी काबिल हो तो उस पर काम का बोझ लाद दिया जाए। एडीसी के पास चार विभागों का कार्यभार है। इस कारण वह समय नहीं दे पा रहे हैं। जनता के काम अटके हुए हैं।
जिला परिषद के वाइस चेयरमैन अनिल हुड्डा ने कहा कि उन्हें मजबूर होकर धरने पर बैठना पड़ा है। सीईओ अपना समय नहीं दे पा रहे हैं। सरकार ने कई जिलों में स्थायी सीईओ लगाए हैं। यह समय भी दे रहे हैं। काम भी कर रहे हैं। हम सरकार या अधिकारी की खिलाफत न करके स्थायी सीईओ की मांग कर रहे हैं।