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Rohtak News: पीजीआई में अब डॉक्टरों को मरीजों का पूरा विवरण लेना होगा
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11- मेडिकल सुपरिटेंडेंट कार्यालय की ओर से जारी किया गया पत्र। संवाद
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रोहतक। पीजीआई में अब डॉक्टरों को जिम्मेदारी बढ़ने वाली है। मरीज के इलाज के साथ-साथ अब उनकी पूरी जानकारी और केस का संक्षिप्त विवरण तैयार कर मेडिकल सुपरिटेंडेंट (एमएस) कार्यालय में जमा कराना होगा। 24 फरवरी को एमएस की ओर से यह आदेश जारी किया गया है।
सभी विभागों व यूनिटों के अध्यक्षों को चार बीमारियों को शामिल कर विवरण जमा कराने को कहा गया है। इसमें डायबिटीज, हाइपरटेंशन, सीओपीडी (क्रोनिक आर्ब्जक्टिव प्लमोनरी डिजीज) व इस्केमिक हृदय रोग से ग्रस्त होकर आने वाले मरीजों को शामिल किया गया है।
आदेश के अनुसार डॉक्टरों को ओपीडी के साथ आईपीडी वार्ड में भर्ती मरीजों का इलाज संबंधी विवरण तैयार करना पड़ेगा। आदेश में इसको लाने का कारण भविष्य के रिकॉर्ड व अधिकारियों के मांगे जाने पर जमा कराने की आवश्यकता को बताया है।
संस्थान में स्टाफ कम, डॉक्टर इलाज करें या विवरण तैयार
संस्थान के एक डॉक्टर ने कहा, मेडिकल सुपरिटेंडेंट की ओर से नोटिस जारी कर नए मरीजों का संक्षिप्त विवरण तैयार करने के आदेश तो दे दिए लेकिन अलग से असिस्टेंट की व्यवस्था नहीं बनाई है। संस्थान के पास पहले ही स्टाफ की कमी है। ऐसे में डॉक्टर मरीज का इलाज करें या विवरण तैयार करें। इलाज के बाद विवरण तैयार करेंगे तो समय लगेगा। दूसरे मरीज को इंतजार करना पड़ेगा। रोजाना हजारों मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। डॉक्टरों के पास उनके छात्र बैठते हैं। अगर वे उनसे विवरण तैयार कराएं तो भी स्थिति यही होगी।
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सभी विभागों व यूनिटों के अध्यक्षों को चार बीमारियों को शामिल कर विवरण जमा कराने को कहा गया है। इसमें डायबिटीज, हाइपरटेंशन, सीओपीडी (क्रोनिक आर्ब्जक्टिव प्लमोनरी डिजीज) व इस्केमिक हृदय रोग से ग्रस्त होकर आने वाले मरीजों को शामिल किया गया है।
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आदेश के अनुसार डॉक्टरों को ओपीडी के साथ आईपीडी वार्ड में भर्ती मरीजों का इलाज संबंधी विवरण तैयार करना पड़ेगा। आदेश में इसको लाने का कारण भविष्य के रिकॉर्ड व अधिकारियों के मांगे जाने पर जमा कराने की आवश्यकता को बताया है।
संस्थान में स्टाफ कम, डॉक्टर इलाज करें या विवरण तैयार
संस्थान के एक डॉक्टर ने कहा, मेडिकल सुपरिटेंडेंट की ओर से नोटिस जारी कर नए मरीजों का संक्षिप्त विवरण तैयार करने के आदेश तो दे दिए लेकिन अलग से असिस्टेंट की व्यवस्था नहीं बनाई है। संस्थान के पास पहले ही स्टाफ की कमी है। ऐसे में डॉक्टर मरीज का इलाज करें या विवरण तैयार करें। इलाज के बाद विवरण तैयार करेंगे तो समय लगेगा। दूसरे मरीज को इंतजार करना पड़ेगा। रोजाना हजारों मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। डॉक्टरों के पास उनके छात्र बैठते हैं। अगर वे उनसे विवरण तैयार कराएं तो भी स्थिति यही होगी।