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यूपी: सिलिंडर की कमी के बाद अब खाने वाले तेल पर संकट, थोक बाजार में महंगा हुआ रिफांइड-सरसों का तेल

अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Wed, 11 Mar 2026 06:24 PM IST
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सार

Iran war impact on UP:  ईरान युद्ध का असर पेट्रोलियम पदार्थों के बाद खाने वाले तेल पर पड़ रहा है। आयात न हो पाने की वजह से कई तेलों की कीमतें बढ़ गईं। 

UP: After cylinder queues, now there's a crisis over edible oil, with refined and mustard oil becoming more ex
ईरान युद्ध का असर। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार

 ईरान युद्ध की वजह से खाद्य तेलों का आयात न हो पाने की वजह से खाद्य तेल के दामों में महंगाई आ गई है। थोक बाजार में ही सरसों के तेल में 30 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है। वहीं, रिफाइंड में 30 और पॉम ऑयल में 15 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है। कारोबारी बताते हैं कि बाजार में माल ही नहीं है, जिसकी वजह से महंगाई बढ़ रही है।

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पांडेयगंज व यहियागंज के बड़े किराना व्यापारियों ने बताया कि थोक बाजार में 130 रुपये वाला सरसों तेल 30 रुपये बढ़कर 160 रुपये हो गया है। 140 वाला सोया रिफाइंड 170 रुपये में पहुंच गया है। वहीं, 140 वाला पॉम ऑयल 155 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है। कृषि विशेषज्ञ डॉ सत्येंद्र सिंह बताते हैं कि सरसों की नई फसल तैयार हो गई है। कुछ जगह कटाई भी हो गई है लेकिन इस तरह से महंगाई बढ़ना चिंता का विषय है। फुटकर कारोबारी संतोष गुप्ता बताते हैं कि होली तक जो दाम नहीं बढ़े थे वह भी अब बढ़ने लगे हैं। इससे बाजार में खाद्य तेलों की शॉर्टेज भी बढ़ गई है।

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कारोबारी बोले, सीजर भी बड़ी वजह

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बढ़ रहे हैं तेल के दाम। सांकेतिक तस्वीर।

एफसडीए की ओर से 23 फरवरी से 26 फरवरी तक प्रदेश भर में खाद्य तेलों की गुणवत्ता जांचने का अभियान चलाया था। इस दौरान अकेले लखनऊ में ही 2 करोड़ से ज्यादा का तेल सीज किए जाने की बात सामने आई है। नाम न छापने की शर्त पर कारोबारियों ने बताया कि एफएसडीए की टीम ने बड़े पैमाने पर तेल के नमूने लेकर सीज कर दिया है। इसकी वजह से हजारों टिन खाद्य तेल गोदामों में सील पड़ा है। न तो कोई जांच की गई है, न ही कोई रिपोर्ट आई है। अगर यह तेल मार्केट में होता तो खाद्य तेल की शॉर्टेज नहीं होती।

14 दिन बीते, नहीं आई रिपोर्ट
खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की ओर से 23 से 26 फरवरी तक अभियान चला। इस हिसाब से 14 दिन हो गए जबकि 14 दिन के अंदर संगृहित नमूनों की जांच हो जानी चाहिए। खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम की धारा 142 के तहत नमूनों के विश्लेषण और रिपोर्ट जारी करने की अवधि 14 दिन तय है लेकिन अभी तक कोई रिपोर्ट नहीं दी गई है। सूत्र बताते हैं कि अभी कोई जांच नहीं की गई है। नमूनों के संग्रह सरकारी लैब में हैं। अफसर कुछ बता नहीं पा रहे हैं कि वह इन नमूनों का क्या करेंगे। सूत्र बताते हैं कि निजी लैब से जांच कराने की तैयारी है जिसके बाद सौदेबाजी की आशंका है। हालांकि, इस संबंध में खाद्य विभाग के अधिकारी कुछ भी बोलने से बच रहे हैं।

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