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Rohtak News: जन्म के तुंरत बाद घुट्टी या बाहर का दूध पिलाना खतरनाक
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रोहतक। नवजात शिशु को जन्म के तुरंत बाद घुट्टी या बाहर का दूध पिलाना उसके स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इससे संक्रमण का खतरा बढ़ने के साथ बौद्धिक विकास भी प्रभावित हो सकता है।
डीन छात्र कल्याण एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. सविता सिंघल ने बताया कि जन्म के बाद निकलने वाला मां का पहला गाढ़ा पीला दूध (कॉलेस्ट्रम) शिशु के लिए पहली वैक्सीन की तरह काम करता है। कॉलेस्ट्रम संक्रमण से बचाने में अहम भूमिका निभाता है। जन्म के बाद घुट्टी या बाहर का दूध पीने वाले बच्चे की क्षमता मां का दूध पीने वाले शिशुओं की तुलना में छह फीसदी तक कम हो सकती है।
स्त्री रोग विशेषज्ञने बताया कि कॉलेस्ट्रम में सबसे अधिक एंटीबॉडी होती हैं जो नवजात को विभिन्न संक्रमणों से बचाने में मदद करती हैं। जन्म के बाद करीब शुरुआती 10 घंटे तक आने वाले पीले और गाढ़े दूध को कॉलेस्ट्रम कहा जाता है। 24 से 48 घंटे बाद मां का सामान्य तरल दूध आना शुरू होता है। यदि जन्म के तुरंत बाद शिशु को घुट्टी या ऊपर का दूध दिया जाता है तो वह कॉलेस्ट्रम कम पीता है और स्तनपान में रुचि भी घट सकती है। इससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। गंभीर संक्रमण की स्थिति में बच्चे की जान पर भी बन सकती है।
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प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत कर बीमारियों से बचाता
डॉ. सविता सिंघल ने बताया कि कॉलेस्ट्रम शिशु की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करता है। इसमें मौजूद एंटीबॉडी डायरिया सहित कई तरह के संक्रमणों से बचाने में मदद करती हैं। कॉलेस्ट्रम नहीं मिलने पर बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो सकती है, जिससे एलर्जी और श्वसन संबंधी संक्रमणों का खतरा बढ़ जाता है।
ऊपर के दूध से जुड़े जोखिम
डॉ. सविता सिंघल ने बताया कि ऊपर का दूध प्रायः बोतल के माध्यम से दिया जाता है। इसकी तैयारी में स्वच्छता, पानी की गुणवत्ता और सही मात्रा का विशेष ध्यान रखना पड़ता है। थोड़ी-सी लापरवाही भी संक्रमण का कारण बन सकती है। इसके विपरीत मां का दूध स्वाभाविक रूप से सुरक्षित, स्वच्छ और शिशु के लिए सबसे पौष्टिक आहार है।
छह महीने तक स्तनपान के लाभ
जन्म से छह महीने तक केवल स्तनपान कराने से बच्चे का शारीरिक और बौद्धिक विकास बेहतर होता है। ऐसे बच्चों की बौद्धिक क्षमता अन्य बच्चों की तुलना में करीब छह फीसदी अधिक हो सकती है। इसके साथ ही मां और शिशु के बीच भावनात्मक जुड़ाव मजबूत होता है तथा स्तनपान से मां के मोटापे का जोखिम भी कम होता है।
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डीन छात्र कल्याण एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. सविता सिंघल ने बताया कि जन्म के बाद निकलने वाला मां का पहला गाढ़ा पीला दूध (कॉलेस्ट्रम) शिशु के लिए पहली वैक्सीन की तरह काम करता है। कॉलेस्ट्रम संक्रमण से बचाने में अहम भूमिका निभाता है। जन्म के बाद घुट्टी या बाहर का दूध पीने वाले बच्चे की क्षमता मां का दूध पीने वाले शिशुओं की तुलना में छह फीसदी तक कम हो सकती है।
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स्त्री रोग विशेषज्ञने बताया कि कॉलेस्ट्रम में सबसे अधिक एंटीबॉडी होती हैं जो नवजात को विभिन्न संक्रमणों से बचाने में मदद करती हैं। जन्म के बाद करीब शुरुआती 10 घंटे तक आने वाले पीले और गाढ़े दूध को कॉलेस्ट्रम कहा जाता है। 24 से 48 घंटे बाद मां का सामान्य तरल दूध आना शुरू होता है। यदि जन्म के तुरंत बाद शिशु को घुट्टी या ऊपर का दूध दिया जाता है तो वह कॉलेस्ट्रम कम पीता है और स्तनपान में रुचि भी घट सकती है। इससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। गंभीर संक्रमण की स्थिति में बच्चे की जान पर भी बन सकती है।
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प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत कर बीमारियों से बचाता
डॉ. सविता सिंघल ने बताया कि कॉलेस्ट्रम शिशु की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करता है। इसमें मौजूद एंटीबॉडी डायरिया सहित कई तरह के संक्रमणों से बचाने में मदद करती हैं। कॉलेस्ट्रम नहीं मिलने पर बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो सकती है, जिससे एलर्जी और श्वसन संबंधी संक्रमणों का खतरा बढ़ जाता है।
ऊपर के दूध से जुड़े जोखिम
डॉ. सविता सिंघल ने बताया कि ऊपर का दूध प्रायः बोतल के माध्यम से दिया जाता है। इसकी तैयारी में स्वच्छता, पानी की गुणवत्ता और सही मात्रा का विशेष ध्यान रखना पड़ता है। थोड़ी-सी लापरवाही भी संक्रमण का कारण बन सकती है। इसके विपरीत मां का दूध स्वाभाविक रूप से सुरक्षित, स्वच्छ और शिशु के लिए सबसे पौष्टिक आहार है।
छह महीने तक स्तनपान के लाभ
जन्म से छह महीने तक केवल स्तनपान कराने से बच्चे का शारीरिक और बौद्धिक विकास बेहतर होता है। ऐसे बच्चों की बौद्धिक क्षमता अन्य बच्चों की तुलना में करीब छह फीसदी अधिक हो सकती है। इसके साथ ही मां और शिशु के बीच भावनात्मक जुड़ाव मजबूत होता है तथा स्तनपान से मां के मोटापे का जोखिम भी कम होता है।