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Rohtak News: हेपेटाइटिस-बी संक्रमण रोक 609 बच्चों को दिया नया जीवन
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अभिषेक कीरत
रोहतक। पीजीआई की रिसर्च ने मां से बच्चे में फैलने वाले हेपेटाइटिस-बी संक्रमण को रोकने में बड़ी सफलता हासिल की है। विशेष प्रक्रिया अपनाकर अब तक 609 बच्चों को सुरक्षित किया गया है। गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. प्रवीण मल्होत्रा ने बताया कि रिसर्च से साबित हुआ है कि संक्रमण को मां से बच्चे में फैलने से रोका जा सकता है।
संक्रमण रोकने की प्रक्रिया
डॉ. प्रवीण मल्होत्रा ने बताया कि हर गर्भवती का डिलीवरी से पहले हेपेटाइटिस टेस्ट किया जाता है। संक्रमण अधिक मिलने पर दवा दी जाती है। डिलीवरी पीजीआई में कराई जाती है और जन्म लेते ही नवजात को हेपेटाइटिस-बी इम्यूनोग्लोबिन का टीका निशुल्क लगाया जाता है। इसके बाद तीन बार का वैक्सीनेशन कोर्स पूरा कराया जाता है। एक साल तक बच्चों की मॉनिटरिंग होती है और बाद में टेस्ट नॉर्मल आते हैं।
पीजीआई का गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग हरियाणा का एकमात्र मॉडल ट्रीटमेंट सेंटर है जिसे नेशनल वायरल हेपेटाइटिस कंट्रोल प्रोग्राम के तहत तैयार किया गया है। यह देश में सबसे ज्यादा काला पीलिया मरीजों का इलाज करने वाला केंद्र है। रोजाना 80–100 मरीज यहां आते हैं जिनमें 15–20 नए और 60–70 पुराने मरीज शामिल होते हैं। अब तक लगभग 39 हजार मरीज यहां रजिस्ट्रेशन करवा चुके हैं। संवाद
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एक छत के नीचे निशुल्क इलाज
संस्थान में टेस्ट, दवाइयां, एंडोस्कोपी, फाइब्रोस्कैन और भर्ती की सुविधा मुफ्त मिलती है। 20 विशेषज्ञों की टीम काम करती है। अब तक 38 हजार एंडोस्कोपी और 49 हजार फाइब्रोस्कैन निशुल्क किए जा चुके हैं। हरियाणा ही नहीं, अन्य राज्यों से भी मरीज यहां पहुंचते हैं।
क्या है हेपेटाइटिस-बी संक्रमण...
यह लिवर का एक गंभीर संक्रमण है जो लिवर में सूजन पैदा करता है। यह संक्रमण मुख्य रूप से संक्रमित रक्त, यौन संपर्क या प्रसव के दौरान मां से बच्चे में फैलता है।
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रोहतक। पीजीआई की रिसर्च ने मां से बच्चे में फैलने वाले हेपेटाइटिस-बी संक्रमण को रोकने में बड़ी सफलता हासिल की है। विशेष प्रक्रिया अपनाकर अब तक 609 बच्चों को सुरक्षित किया गया है। गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. प्रवीण मल्होत्रा ने बताया कि रिसर्च से साबित हुआ है कि संक्रमण को मां से बच्चे में फैलने से रोका जा सकता है।
संक्रमण रोकने की प्रक्रिया
डॉ. प्रवीण मल्होत्रा ने बताया कि हर गर्भवती का डिलीवरी से पहले हेपेटाइटिस टेस्ट किया जाता है। संक्रमण अधिक मिलने पर दवा दी जाती है। डिलीवरी पीजीआई में कराई जाती है और जन्म लेते ही नवजात को हेपेटाइटिस-बी इम्यूनोग्लोबिन का टीका निशुल्क लगाया जाता है। इसके बाद तीन बार का वैक्सीनेशन कोर्स पूरा कराया जाता है। एक साल तक बच्चों की मॉनिटरिंग होती है और बाद में टेस्ट नॉर्मल आते हैं।
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पीजीआई का गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग हरियाणा का एकमात्र मॉडल ट्रीटमेंट सेंटर है जिसे नेशनल वायरल हेपेटाइटिस कंट्रोल प्रोग्राम के तहत तैयार किया गया है। यह देश में सबसे ज्यादा काला पीलिया मरीजों का इलाज करने वाला केंद्र है। रोजाना 80–100 मरीज यहां आते हैं जिनमें 15–20 नए और 60–70 पुराने मरीज शामिल होते हैं। अब तक लगभग 39 हजार मरीज यहां रजिस्ट्रेशन करवा चुके हैं। संवाद
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संस्थान में टेस्ट, दवाइयां, एंडोस्कोपी, फाइब्रोस्कैन और भर्ती की सुविधा मुफ्त मिलती है। 20 विशेषज्ञों की टीम काम करती है। अब तक 38 हजार एंडोस्कोपी और 49 हजार फाइब्रोस्कैन निशुल्क किए जा चुके हैं। हरियाणा ही नहीं, अन्य राज्यों से भी मरीज यहां पहुंचते हैं।
क्या है हेपेटाइटिस-बी संक्रमण...
यह लिवर का एक गंभीर संक्रमण है जो लिवर में सूजन पैदा करता है। यह संक्रमण मुख्य रूप से संक्रमित रक्त, यौन संपर्क या प्रसव के दौरान मां से बच्चे में फैलता है।