राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत लाखनमाजरा ब्लॉक के नांदल गांव में किसानों को प्राकृतिक खेती के सिद्धांतों, तकनीक व इसके लाभों की जानकारी दी। मुख्य प्रशिक्षक डॉ. सुभाष चंद्र ने कहा, प्राकृतिक खेती से खेती की लागत कम, मिट्टी की उर्वरता में वृद्धि, पर्यावरण संरक्षण व आय में स्थिरता भी सुनिश्चित होती है।
किसान एवं सरपंच जयप्रकाश के फार्म पर हरियाणा कृषि एवं प्रबंधन एवं विस्तार प्रशिक्षण संस्थान (हमेटी) जींद के निदेशक डॉ. सुरेंद्र सिंह यादव के दिशा निर्देशानुसार सोमवार को प्रशिक्षण कार्यक्रम किया गया। इस दौरान बीजामृत से बीज उपचार, जीवामृत, धन जीवामृत व प्राकृतिक कीटनाशक तैयार करने की विधियों का प्रदर्शन भी किया।
किसानों को रासायनिक खेती से होने वाले नुकसान और प्राकृतिक खेती के दीर्घकालीन लाभों के प्रति जागरूक किया गया। कार्यक्रम में नांदल व आसपास के 55 किसानों ने भाग लिया। मौके पर समाज सेवी डॉ. मनजीत सिंह दहिया, बंसी लाल चिंडी, रामनिवास दलाल चिड़ी आदि किसानों ने मुख्य रूप से भाग लिया।
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