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Rohtak News: विजेंद्र से मिली किडनी दो मरीजों में प्रत्यारोपण का रात भरा चला ऑपरेशन
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अभिषेक कीरत
रोहतक। पीजीआई रोहतक में वीरवार शाम करीब छह बजे भिवानी के जुई कलां निवासी 37 वर्षीय विजेंद्र की दान की गई किडनी का दो मरीजों में प्रत्यारोपण शुरू हुआ जो रातभर चला। डॉक्टरों की टीम शुक्रवार सुबह चार बजे तक ऑपरेशन में जुटी रही। दोनों मरीज लंबे समय से किडनी का इंतजार कर रहे थे।
चिकित्सकों के अनुसार, किडनी को 17-18 घंटे के भीतर प्रत्यारोपित करना जरूरी होता है। हालांकि बेहतर परिणाम के लिए इसे 6-7 घंटे में पूरा करने का प्रयास किया जाता है। समय के साथ अंग की गुणवत्ता प्रभावित होती है, इसलिए पूरी प्रक्रिया तेज और सटीक ढंग से की गई।
ब्रेन डेड घोषित होने के बाद विजेंद्र के परिजनों को अंगदान के लिए काउंसिलिंग दी गई जिसके बाद उन्होंने सहमति दे दी। इसके बाद विभिन्न अस्पतालों से समन्वय कर जरूरतमंद मरीजों की पहचान की गई। पीजीआई में चार मरीजों का चयन हुआ जिनमें से दो अनफिट पाए गए जबकि दो का सफलतापूर्वक प्रत्यारोपण किया गया।
ऑपरेशन से पहले एनेस्थीसिया टीम ने आईसीयू में डोनर की विशेष निगरानी की, क्योंकि ऐसे मरीजों में हृदय रुकने का खतरा रहता है। पूरी प्रक्रिया में सर्जन, नेफ्रोलॉजिस्ट और अन्य विशेषज्ञों के बीच समन्वय अहम रहा।
इस दौरान रोहतक पुलिस ने ग्रीन कॉरिडोर बनाकर अंगों को समय पर पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 100 से अधिक पुलिसकर्मियों ने ट्रैफिक नियंत्रित कर दिल्ली और गुरुग्राम तक मार्ग सुगम बनाया।
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. कुंदन मित्तल ने बताया कि किडनी ट्रांसप्लांट के लिए आवश्यक एचएलए टेस्ट तुरंत कराया गया। उन्होंने लोगों से अंगदान के लिए आगे आने की अपील की। संवाद
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रोहतक। पीजीआई रोहतक में वीरवार शाम करीब छह बजे भिवानी के जुई कलां निवासी 37 वर्षीय विजेंद्र की दान की गई किडनी का दो मरीजों में प्रत्यारोपण शुरू हुआ जो रातभर चला। डॉक्टरों की टीम शुक्रवार सुबह चार बजे तक ऑपरेशन में जुटी रही। दोनों मरीज लंबे समय से किडनी का इंतजार कर रहे थे।
चिकित्सकों के अनुसार, किडनी को 17-18 घंटे के भीतर प्रत्यारोपित करना जरूरी होता है। हालांकि बेहतर परिणाम के लिए इसे 6-7 घंटे में पूरा करने का प्रयास किया जाता है। समय के साथ अंग की गुणवत्ता प्रभावित होती है, इसलिए पूरी प्रक्रिया तेज और सटीक ढंग से की गई।
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ब्रेन डेड घोषित होने के बाद विजेंद्र के परिजनों को अंगदान के लिए काउंसिलिंग दी गई जिसके बाद उन्होंने सहमति दे दी। इसके बाद विभिन्न अस्पतालों से समन्वय कर जरूरतमंद मरीजों की पहचान की गई। पीजीआई में चार मरीजों का चयन हुआ जिनमें से दो अनफिट पाए गए जबकि दो का सफलतापूर्वक प्रत्यारोपण किया गया।
ऑपरेशन से पहले एनेस्थीसिया टीम ने आईसीयू में डोनर की विशेष निगरानी की, क्योंकि ऐसे मरीजों में हृदय रुकने का खतरा रहता है। पूरी प्रक्रिया में सर्जन, नेफ्रोलॉजिस्ट और अन्य विशेषज्ञों के बीच समन्वय अहम रहा।
इस दौरान रोहतक पुलिस ने ग्रीन कॉरिडोर बनाकर अंगों को समय पर पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 100 से अधिक पुलिसकर्मियों ने ट्रैफिक नियंत्रित कर दिल्ली और गुरुग्राम तक मार्ग सुगम बनाया।
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. कुंदन मित्तल ने बताया कि किडनी ट्रांसप्लांट के लिए आवश्यक एचएलए टेस्ट तुरंत कराया गया। उन्होंने लोगों से अंगदान के लिए आगे आने की अपील की। संवाद