सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Rohtak News ›   MDU Registrar Dr. Krishnakant's research gets international recognition

Rohtak News: एमडीयू कुलसचिव डॉ. कृष्णकांत के शोध को मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान

Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 08 Mar 2026 09:55 PM IST
विज्ञापन
MDU Registrar Dr. Krishnakant's research gets international recognition
06-डॉ. कृष्णकांत शर्मा, कुलसचिव, एमडीयू रोहतक।
विज्ञापन
रोहतक। महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) के कुलसचिव डॉ. कृष्णकांत के शोध कार्य को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। संयुक्त राष्ट्र की वैज्ञानिक संस्था यूनाइटेड नेशंस साइंटिफिक कमेटी ऑन द इफेक्ट्स ऑफ एटॉमिक रेडिएशन(यूएनएससीईएआर) की ओर से जारी वर्ष 2024 की रिपोर्ट में उनके शोध को संदर्भ के रूप में शामिल किया गया है।
Trending Videos


रिपोर्ट के अनुसार, वैज्ञानिक परिशिष्ट में डॉ. कृष्णकांत, भूपेंद्र सिंह और डॉ. मनीषा गर्ग की ओर से किए गए अध्ययन रेडियोलॉजिकल असेसमेंट ऑफ 222आरएन, 220आरएन, ईईआरसी एंड ईईटीसी इन रेजिडेंशियल ड्वेलिंग्स ऑफ डिस्ट्रिक्ट पलवल, साउथर्न हरियाणा (2022) को शामिल किया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

डॉ. कृष्णकांत और भूपेंद्र सिंह के एक अन्य शोध एनुअल इफेक्टिव डोज ड्यू टू इनहेलेशन ऑफ इंडोर रेडियोन्यूक्लिड्स एंड देयर प्रोजेनी मेजर्ड बाय ट्रैक एट्चेड टेक्नीक्स यूजिंग पिन्होल डोसीमीटर एंड डिपोजिशन- बेस्ड प्रोजेनी सेंसर्स (2023) को भी रिपोर्ट में संदर्भित किया गया है।

यह अध्ययन दक्षिण हरियाणा के पलवल जिले के आवासीय घरों में पाई जाने वाली प्राकृतिक रेडियोधर्मी गैस रेडॉन (आरएन-222) और थोरॉन (आरएन-220) के स्तर और उनके संभावित स्वास्थ्य प्रभावों के आकलन से संबंधित है। संवाद

------------------------------
लोगों के स्वास्थ्य पर बड़े खतरे की संभावना नहीं

शोध में विभिन्न प्रकार के घरों में इन गैस और उनके अपघटन उत्पादों की सांद्रता का वैज्ञानिक विश्लेषण किया गया। अध्ययन के अनुसार पलवल जिले के घरों में रेडॉन की औसत सांद्रता लगभग 32.2 Bq/m³ दर्ज की गई जो वैश्विक औसत 40 Bq/m³ से कम है। वहीं थोरॉन की औसत सांद्रता करीब 34.6 Bq/m³ पाई गई। वैज्ञानिकों के अनुसार, ये स्तर अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों के भीतर हैं इसलिए वर्तमान स्थिति में लोगों के स्वास्थ्य पर किसी बड़े खतरे की संभावना नहीं है।

--------------------

मौसम के साथ बदलता है गैस का स्तर

रेडॉन और थोरॉन गैस का स्तर मौसम के अनुसार बदलता है। सर्दियों में इनका स्तर अधिक पाया गया और गर्मियों में अपेक्षाकृत कम रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि सर्दियों में घरों की खिड़कियां और दरवाजे अधिकतर बंद रहने से वेंटिलेशन कम हो जाता है जिससे गैस का जमाव बढ़ सकता है। घरों के निर्माण में इस्तेमाल सामग्री, दीवारों और फर्श की संरचना व आसपास की मिट्टी की प्रकृति भी इन गैसों के स्तर को प्रभावित करती है।

-----------------------

वार्षिक विकिरण खुराक भी सुरक्षित सीमा में

शोध में स्वास्थ्य प्रभावों का आकलन करने के लिए वार्षिक प्रभावी विकिरण खुराक का भी अध्ययन किया गया। परिणामों के अनुसार रेडॉन, थोरॉन और उनके अपघटन उत्पादों से लोगों को मिलने वाली औसत वार्षिक विकिरण खुराक लगभग 0.74 mSv प्रति वर्ष आंकी गई जो अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा सीमा से काफी कम है।

--------------------

वर्जन
यूएनएससीईएआर-2024 रिपोर्ट में शोध का संदर्भ शामिल होना उनकी टीम के लिए गर्व की बात है। इससे पर्यावरणीय रेडियोधर्मिता और उसके स्वास्थ्य प्रभावों को लेकर वैश्विक वैज्ञानिक समझ को मजबूत करने में मदद मिलेगी। - डॉ. कृष्णकांत शर्मा, कुलसचिव रोहतक।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed