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बचपन में जवानी के लक्षण: चार साल की बच्ची को पीरियड्स, पांच वर्ष के बच्चे में मुंहासे; चौंकाने वाले आंकड़े
Mon, 10 Aug 2026 09:12 AM IST
Sharukh Khan
अभिषेक कीरत, अमर उजाला, रोहतक
अभिषेक कीरत, अमर उजाला, रोहतक
Published by: Sharukh Khan
Updated Mon, 10 Aug 2026 09:12 AM IST
सार
बचपन में जवानी के लक्षण दिखाई दे रहे हैं। चार साल की बच्ची में पीरियड्स और पांच वर्ष के बच्चे में मुंहासे और बाल उगने के मामले सामने आ रहे हैं। पीजीआई में हर माह छह नए केस आ रहे हैं। पीजीआई रोहतक में करीब 40 बच्चों को हर माह हार्मोन रोकने के इंजेक्शन दिए जा रहे हैं।
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pgi rohtak
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
चार साल की उम्र में माहवारी और पांच साल की उम्र में चेहरे पर मुंहासे व शरीर पर बाल उगना सामान्य बचपन की तस्वीर नहीं है। पीजीआई रोहतक के पीडियाट्रिक एंडोक्रायनोलॉजी क्लीनिक में ऐसे मामले लगातार सामने आ रहे हैं।
क्लीनिक में हर माह करीब छह नए बच्चे समय से पहले यौवन के लक्षणों के साथ पहुंच रहे हैं। फिलहाल करीब 40 बच्चों को हर माह लीयूपरोलाइड जैसे हार्मोन-सप्रेसिंग इंजेक्शन दिए जा रहे हैं। इनमें सात लड़के हैं।
चिकित्सा की भाषा में लड़कियों में आठ साल और लड़कों में नौ साल से पहले यौवन के स्पष्ट लक्षण शुरू होना प्रीकोशियस प्यूबर्टी (असामयिक यौवनारंभ) कहलाता है। इसमें शरीर में यौवन से जुड़े हार्मोन समय से पहले सक्रिय हो जाते हैं।
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लड़कियों में स्तनों का विकास, तेजी से लंबाई बढ़ना और समय से पहले माहवारी, जबकि लड़कों में अंडकोष व जननांगों का विकास, शरीर पर बाल, आवाज में बदलाव और मांसपेशियों का विकास इसके प्रमुख संकेत हो सकते हैं।
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क्लीनिक में हर माह करीब छह नए बच्चे समय से पहले यौवन के लक्षणों के साथ पहुंच रहे हैं। फिलहाल करीब 40 बच्चों को हर माह लीयूपरोलाइड जैसे हार्मोन-सप्रेसिंग इंजेक्शन दिए जा रहे हैं। इनमें सात लड़के हैं।
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चिकित्सा की भाषा में लड़कियों में आठ साल और लड़कों में नौ साल से पहले यौवन के स्पष्ट लक्षण शुरू होना प्रीकोशियस प्यूबर्टी (असामयिक यौवनारंभ) कहलाता है। इसमें शरीर में यौवन से जुड़े हार्मोन समय से पहले सक्रिय हो जाते हैं।
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लड़कियों में स्तनों का विकास, तेजी से लंबाई बढ़ना और समय से पहले माहवारी, जबकि लड़कों में अंडकोष व जननांगों का विकास, शरीर पर बाल, आवाज में बदलाव और मांसपेशियों का विकास इसके प्रमुख संकेत हो सकते हैं।
पीजीआई में करीब चार साल की बच्ची को माहवारी जैसी ब्लीडिंग होने पर लाया गया। जांच में उसके यौवन से जुड़े हार्मोन उम्र के हिसाब से बढ़े हुए मिले। इसके बाद विशेषज्ञों ने उपचार शुरू किया और उसे नियमित हार्मोन-सप्रेसिंग इंजेक्शन दिए जा रहे हैं।
एक अन्य मामले में करीब पांच साल का बच्चा उम्र से काफी बड़ा दिख रहा था। उसके चेहरे पर मुंहासे और निजी अंगों पर बाल आने लगे थे। ऐसे लक्षण समय से पहले हार्मोनल बदलाव की ओर संकेत कर सकते हैं और इनकी विशेषज्ञ से जांच जरूरी होती है।
हर माह छह नए बच्चे, लड़कियों की संख्या ज्यादा
पीजीआई के पीडियाट्रिक एंडोक्रायनोलॉजी क्लीनिक की चिकित्सक प्रो. अंजलि वर्मा के अनुसार, हर माह करीब छह नए मामले सामने आ रहे हैं। इनमें लड़कियों की संख्या अधिक है। हरियाणा के सभी जिलों के अलावा राजस्थान और उत्तर प्रदेश से भी बच्चे उपचार के लिए पहुंच रहे हैं।
पीजीआई के पीडियाट्रिक एंडोक्रायनोलॉजी क्लीनिक की चिकित्सक प्रो. अंजलि वर्मा के अनुसार, हर माह करीब छह नए मामले सामने आ रहे हैं। इनमें लड़कियों की संख्या अधिक है। हरियाणा के सभी जिलों के अलावा राजस्थान और उत्तर प्रदेश से भी बच्चे उपचार के लिए पहुंच रहे हैं।
डॉ. वर्मा के अनुसार, वर्ष 2019 में ऐसे मामलों की संख्या महीने में करीब दो-तीन नए मामलों तक थी। अब जागरूकता बढ़ने के साथ अधिक बच्चे विशेषज्ञ उपचार तक पहुंच रहे हैं। हालांकि, मामलों की संख्या बढ़ने के पीछे केवल एक कारण मानना उचित नहीं है।
लीयूपरोलाइड इंजेक्शन से रोके जा रहे हार्मोन
डॉ. अंजलि वर्मा ने बताया कि इस बीमारी में कम उम्र में ही दिमाग से सामान्य के मुकाबले ज्यादा हार्मोन निकलने लगते हैं। इनको रोकने के लिए बच्चों को हर महीने लीयूपरोलाइड इंजेक्शन लगाया जाता है।
डॉ. अंजलि वर्मा ने बताया कि इस बीमारी में कम उम्र में ही दिमाग से सामान्य के मुकाबले ज्यादा हार्मोन निकलने लगते हैं। इनको रोकने के लिए बच्चों को हर महीने लीयूपरोलाइड इंजेक्शन लगाया जाता है।
कुछ वर्षों तक हर महीने यह इंजेक्शन लगाने के बाद 11 से 12 साल तक आते-आते इंजेक्शन लगाना बंद कर दिया जाता है। इसके बाद सामान्य रूप से यौवन की प्रक्रिया दोबारा शुरू हो जाती है। वहीं, कम उम्र में यौवन के हर मामले में तुरंत दवा शुरू करना जरूरी नहीं माना जाता।
लड़कों में मामला दिखे तो जांच और भी जरूरी
विशेषज्ञों के अनुसार, लड़के में नौ साल से पहले यौवन के लक्षण दिखाई दें तो चिकित्सकीय जांच को गंभीरता से लेना चाहिए। कुछ मामलों में मस्तिष्क से संबंधित कारण भी हो सकते हैं। आवश्यकता के अनुसार हार्मोन जांच, बोन-एज एक्स-रे और अन्य जांचें की जाती हैं। कुछ बच्चों में मस्तिष्क की एमआरआई भी आवश्यक हो सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, लड़के में नौ साल से पहले यौवन के लक्षण दिखाई दें तो चिकित्सकीय जांच को गंभीरता से लेना चाहिए। कुछ मामलों में मस्तिष्क से संबंधित कारण भी हो सकते हैं। आवश्यकता के अनुसार हार्मोन जांच, बोन-एज एक्स-रे और अन्य जांचें की जाती हैं। कुछ बच्चों में मस्तिष्क की एमआरआई भी आवश्यक हो सकती है।