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Supreme Court: आंखों के उपचार के लिए विदेश जा सकेंगे अभिषेक बनर्जी, सुप्रीम कोर्ट से मिली अनुमति; क्या कहा?
Mon, 10 Aug 2026 01:39 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Mon, 10 Aug 2026 01:39 PM IST
सार
Supreme Court: टीएमसी नेता अब अपनी आंखों के उपचार के लिए तीन हफ्ते के लिए विदेश जा सकेंगे। शीर्ष कोर्ट से उन्हें विदेश जाने की अनुमति मिल गई है। उन्होंने कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। क्या था पूरा मामला, पढ़िए रिपोर्ट-
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद अभिषेक बनर्जी को राहत दी है। शीर्ष कोर्ट ने उन्हें आंखों के इलाज के लिए तीन हफ्ते विदेश जाने की अनुमति दी। अभिषेक बनर्जी ने कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी।
हाईकोर्ट ने क्या कहा था?
कलकत्ता हाईकोर्ट ने अभिषेक बनर्जी की यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी थी कि वह एसएसकेएम अस्पताल के मेडिकल बोर्ड के सामने अपनी मेडिकल जांच कराने के लिए तैयार नहीं थे। कोर्ट का कहना था कि मेडिकल बोर्ड की विशेषज्ञ राय के आधार पर ही विदेश जाकर इलाज कराने की जरूरत का आकलन किया जा सकता है।
हाईकोर्ट ने कहा था कि डायमंड हार्बर के सांसद अभिषेक बनर्जी अपनी मेडिकल स्थिति की जांच के लिए अगले दिन कोलकाता के एसएसकेएम अस्पताल में गठित मेडिकल बोर्ड के सामने पेश होने को तैयार नहीं थे।
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ये भी पढ़ें: कावेरी जल विवाद: तमिलनाडु की याचिका पर 13 अगस्त को सुनवाई, कर्नाटक से पानी छोड़ने की मांग
याचिका खारिज करते हुए हाई कोर्ट ने कहा, 'आवेदक (बनर्जी) की ओर से दी गई दलील को देखते हुए कि वे कोलकाता के एसएसकेएम अस्पताल में मेडिकल बोर्ड के सामने पेश नहीं होंगे, यह कोर्ट मानती है कि इस याचिका के जरिए उठाया गया मुद्दा अब और लंबित नहीं रखा जाना चाहिए।'
हाईकोर्ट ने कहा कि अगर अभिषेक बनर्जी मेडिकल बोर्ड के सामने पेश होते, तो मेडिकल विशेषज्ञों की राय के आधार पर अदालत यह जांच कर सकती थी कि उन्हें आंखों के इलाज के लिए विदेश जाने की वास्तव में जरूरत है या नहीं।
विदेश में इलाज की मांग पर कोर्ट का रुख क्या था?
हाईकोर्ट ने पहले कहा था कि जांच जारी रहने के दौरान वह याचिकाकर्ता को विदेश यात्रा की अनुमति देने के पक्ष में नहीं है। कोर्ट ने यह भी कहा था कि कोलकाता में आंखों के इलाज के लिए कई नामी और प्रतिष्ठित क्लिनिक मौजूद हैं।
मामला आखिर किस प्राथमिकी से जुड़ा है?
अभिषेक बनर्जी ने अपने खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने की भी मांग की थी। यह प्राथमिकी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण से पहले 27 अप्रैल को आयोजित एक जनसभा में विपक्षी दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ कथित टिप्पणियों से जुड़ी है।
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हाईकोर्ट ने क्या कहा था?
कलकत्ता हाईकोर्ट ने अभिषेक बनर्जी की यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी थी कि वह एसएसकेएम अस्पताल के मेडिकल बोर्ड के सामने अपनी मेडिकल जांच कराने के लिए तैयार नहीं थे। कोर्ट का कहना था कि मेडिकल बोर्ड की विशेषज्ञ राय के आधार पर ही विदेश जाकर इलाज कराने की जरूरत का आकलन किया जा सकता है।
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हाईकोर्ट ने कहा था कि डायमंड हार्बर के सांसद अभिषेक बनर्जी अपनी मेडिकल स्थिति की जांच के लिए अगले दिन कोलकाता के एसएसकेएम अस्पताल में गठित मेडिकल बोर्ड के सामने पेश होने को तैयार नहीं थे।
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याचिका खारिज करते हुए हाई कोर्ट ने कहा, 'आवेदक (बनर्जी) की ओर से दी गई दलील को देखते हुए कि वे कोलकाता के एसएसकेएम अस्पताल में मेडिकल बोर्ड के सामने पेश नहीं होंगे, यह कोर्ट मानती है कि इस याचिका के जरिए उठाया गया मुद्दा अब और लंबित नहीं रखा जाना चाहिए।'
हाईकोर्ट ने कहा कि अगर अभिषेक बनर्जी मेडिकल बोर्ड के सामने पेश होते, तो मेडिकल विशेषज्ञों की राय के आधार पर अदालत यह जांच कर सकती थी कि उन्हें आंखों के इलाज के लिए विदेश जाने की वास्तव में जरूरत है या नहीं।
विदेश में इलाज की मांग पर कोर्ट का रुख क्या था?
हाईकोर्ट ने पहले कहा था कि जांच जारी रहने के दौरान वह याचिकाकर्ता को विदेश यात्रा की अनुमति देने के पक्ष में नहीं है। कोर्ट ने यह भी कहा था कि कोलकाता में आंखों के इलाज के लिए कई नामी और प्रतिष्ठित क्लिनिक मौजूद हैं।
मामला आखिर किस प्राथमिकी से जुड़ा है?
अभिषेक बनर्जी ने अपने खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने की भी मांग की थी। यह प्राथमिकी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण से पहले 27 अप्रैल को आयोजित एक जनसभा में विपक्षी दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ कथित टिप्पणियों से जुड़ी है।