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Hindi News ›   India News ›   Tamil Nadu Assembly: DMK, AIADMK back CM Vijay's resolution mandating singing of 'Tamil Thai Vazhthu'

Tamil Thaai Vazhthu: सभी सरकारी कार्यक्रमों में तमिल एंथम अनिवार्य, तमिलनाडु विधानसभा में प्रस्ताव हुआ पारित

Mon, 10 Aug 2026 11:24 AM IST
निर्मल कांत एएनआई, चेन्नई।
एएनआई, चेन्नई। Published by: निर्मल कांत Updated Mon, 10 Aug 2026 11:24 AM IST
सार

तमिलनाडु विधानसभा में राज्य गीत को लेकर एक अहम प्रस्ताव पारित किया गया है। इस रिपोर्ट में जानिए मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय ने 'तमिल थाई वाजथु' को सबसे पहले गाने को लेकर क्या कहा, द्रमुक, अन्नाद्रमुक और कांग्रेस ने इस प्रस्ताव का समर्थन क्यों किया, राज्य गीत को लेकर प्रस्ताव में क्या-क्या प्रावधान हैं।

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Tamil Nadu Assembly: DMK, AIADMK back CM Vijay's resolution mandating singing of 'Tamil Thai Vazhthu'
तमिलनाडु विधानसभा - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक

विस्तार

तमिलनाडु विधानसभा में राज्य गीत से जुड़ा अहम प्रस्ताव सोमवार को पारित कर दिया गया है। द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (द्रमुक) और अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (अन्नाद्रमुक) के साथ कांग्रेस पार्टी ने इसका समर्थन किया। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने प्रस्ताव पेश किया था। इस प्रस्ताव में राज्य के शिक्षण संस्थानों, सरकारी कार्यालयों और अन्य सार्वजनिक संस्थानों में होने वाले कार्यक्रमों की शुरुआत से पहले राज्य गीत 'तमिल थाई वाजथु' औपचारिक रूप से अनिवार्य करने की बात कही गई है।
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मुख्यमंत्री ने क्या कहा?
प्रस्ताव पेश करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में तमिल थाई वाजथु को सबसे ज्यादा प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा, तमिल का मतलब गर्व है, तमिल का मतलब शक्ति है। जैसे ही आप 'तमिल' कहते हैं, पूरा तमिलनाडु एकजुट हो जाता है। तमिल थाई वाजथु को तमिलनाडु में पहला स्थान मिलना चाहिए। तमिल थाई वाजथु को पहला स्थान देना हमारा राज्य का अधिकार है। 
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विजय ने भावुक संबोधन में कहा, तमिल सिर्फ एक भाषा नहीं है, बल्कि हमारी जिंदगी और भावना भी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि मातृभाषा उतनी ही पवित्र है, जितनी किसी की मां।
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उन्होंने विधानसभा के सदस्यों से प्रस्ताव का सर्वसम्मति से समर्थन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) राज्य गीत के सम्मान की रक्षा के मामले में कोई समझौता नहीं करेगा।

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उन्होंने कहा, तमिल थाई वाजथु के सम्मान की रक्षा के मामले में टीवीके सरकार कोई समझौता नहीं करेगी। तमिल थाई वाजथु को सबसे पहले गाया जाना चाहिए, यह कहना राजनीतिक बहस का विषय नहीं बनना चाहिए। पार्टी के मतभेदों को अलग रखते हुए सभी सदस्यों को एकजुट होकर इस प्रस्ताव का समर्थन करना चाहिए। 

प्रस्ताव में क्या कहा गया है?
  • प्रस्ताव में कहा गया है कि तमिल दुनिया की सबसे पुरानी शास्त्रीय भाषाओं में से एक है। तमिल सभ्यता दुनिया की सबसे पुरानी सांस्कृतिक परंपराओं में से एक है।
  • इसमें बताया गया है कि 'तमिल थाई वाजथु' 1891 में मनोनमनियम सुंदरनार की ओर से लिखे गए नाटक 'मनोनमनियम' में मां तमिल की स्तुति के रूप में शामिल है।
  • 23 नवंबर 1970 को जारी एक सरकारी आदेश के जरिये इसे सरकारी कार्यक्रमों में सबसे पहले गाने की व्यवस्था लागू की गई थी।
  • प्रस्ताव में आगे कहा गया है कि 12 दिसंबर 2021 से 'तमिल थाई वाज्थु' को आधिकारिक तौर पर राज्य गीत का दर्जा दिया गया।
  • इसके बाद तमिलनाडु के शिक्षण संस्थानों, विश्वविद्यालयों, सरकारी कार्यालयों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और अन्य सार्वजनिक संस्थानों में होने वाले कार्यक्रमों से पहले इसे गाना अनिवार्य करने का आदेश दिया गया।

यह कदम केंद्रीय गृह मंत्रालय की हालिया एडवाइजरी की पृष्ठभूमि में आया है। मंत्रालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से 28 जनवरी के अपने निर्देश का 'सख्ती से पालन' करने को कहा। इस निर्देश में आधिकारिक कार्यक्रमों में राष्ट्रगान से पहले राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् बजाने की बात कही गई थी।
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