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Rohtak News: कैंसर मरीजों को हर साल 150 कृत्रिम जबड़े, 100 नेत्र और 26 कान देकर नया जीवन दे रहा पीजीआईडीएस

Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Wed, 29 Apr 2026 12:51 AM IST
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PGIDS is giving new life to cancer patients by providing 150 artificial jaws, 100 eyes and 26 ears every year.
10-रोहतक निवासी ऋषि के जबड़े की पहले की ​स्थिति। स्रोत : पीजीआई - फोटो : बायो गैस प्लांट का शुभारंभ करते कमांडेंट अमरेंद्र कुमार वरुण।
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अभिषेक कीरत
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रोहतक। नेशनल ओरल कैंसर रजिस्ट्री के अनुसार भारत में हर साल मुंह के कैंसर के लगभग 60,000 नए मामले सामने आते हैं। पीजीआई का डेंटल कॉलेज चेहरे के कैंसर मरीजों को कृत्रिम नाक, कान व जबड़ा देकर नया जीवन दे रहा है।
पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ डेंटल साइंसेज की प्राचार्य डॉ. मनु राठी का कहना है कि संस्थान में हर साल 150 ओरल कैंसर के कारण कृत्रिम जबड़े, 100 नेत्र व 26 कान तैयार कर पीड़ितो नया जीवन दिया जा रहा है।
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इस बीमारी के इलाज में सर्जरी, कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी की जाती है। सर्जरी में कैंसर प्रभावित अंग निकालने के कारण मरीज का चेहरा खराब हो जाता है जिससे मरीज का जीवन सामाजिक रूप से अलगाव महसूस करता है। संवाद
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सर्जरी के बाद खाना व बोलना हो जाता है मुश्किल
चेहरे के कैंसर में सर्जरी के दौरान जबड़े की हड्डियों के साथ आंख, नाक, कान व गाल जैसे अंगों को निकालना पड़ता है। इससे चेहरे की दशा बिगड़ जाती है। रेडिएशन के कारण लार ग्रंथियां प्रभावित होती हैं। मुंह सूखने लगता है। खाना व बोलना मुश्किल हो जाता है। चेहरे पर निशानों के कारण मरीज सामाजिक अलगाव का सामना करते हैं।
लार की कमी दूर करने के लिए बनाते हैं खास डेन्चर
कृत्रिम अंग में आर्टिफिशियल स्लाइवा (कृत्रिम लार) के लिए चैंबर होता है। यह मुंह में नमी बनाए रखता है। कॉलेज का प्रोस्थोडोंटिक्स विभाग प्रोस्थेसिस (कृत्रिम अंग) आधुनिक तकनीक के जरिए मरीजों के लिए कृत्रिम अंग की डिजिटल प्लानिंग करता है। मरीज के हिसाब से अंग का वजन संतुलित किया जाता है।
मुंह से नाक में खाना जाने से रोकता है ऑब्ट्यूरेटर
जिन मरीजों के तालू में कैंसर प्रभावित अंग निकालने के कारण छेद हो जाता है उनके लिए ऑब्ट्यूरेटर नामक डेन्चर बनाए जाते हैं। यह मुंह व नाक के बीच रुकावट पैदा कर खाने-पीने के चीजों को नाक में प्रवेश से रोकता है। वहीं बीमारी के अंतिम चरणों में मरीजों को आराम देने के लिए डेन्चर में सॉफ्ट लाइनर लगाई जाती है। इससे अंतिम समय में दर्द से राहत मिल सके और मरीज को खाने में परेशानी न हो।
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ये बोले मरीज:
2023 में ओरल कैंसर के कारण ऑपरेशन के दौरान जबड़ा निकाला गया था। इसके बाद खाने-पीने व बोलने में बहुत परेशानी आती थी। फिर 2025 में पीजीआईडीएस में सर्जरी से कृत्रिम जबड़ा लगाया। अब कोई परेशानी नहीं है। नया जीवन मिल गया है। -ऋषि, रोहतक
नाक पर एक दाना होने के बाद कैंसर की स्थिति बन गई थी। इससे पूरा नाक ही लगभग खत्म हो गया था। फिर पीजीआई में सर्जरी कर कृत्रिम नाक लगवाई। इससे काफी लाभ मिला है। बीना, रोहतक

10-रोहतक निवासी ऋषि के जबड़े की पहले की स्थिति। स्रोत : पीजीआई

10-रोहतक निवासी ऋषि के जबड़े की पहले की स्थिति। स्रोत : पीजीआई- फोटो : बायो गैस प्लांट का शुभारंभ करते कमांडेंट अमरेंद्र कुमार वरुण।

10-रोहतक निवासी ऋषि के जबड़े की पहले की स्थिति। स्रोत : पीजीआई

10-रोहतक निवासी ऋषि के जबड़े की पहले की स्थिति। स्रोत : पीजीआई- फोटो : बायो गैस प्लांट का शुभारंभ करते कमांडेंट अमरेंद्र कुमार वरुण।

10-रोहतक निवासी ऋषि के जबड़े की पहले की स्थिति। स्रोत : पीजीआई

10-रोहतक निवासी ऋषि के जबड़े की पहले की स्थिति। स्रोत : पीजीआई- फोटो : बायो गैस प्लांट का शुभारंभ करते कमांडेंट अमरेंद्र कुमार वरुण।

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