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Rohtak News: पीजीआई के डॉ. रमेश वर्मा बने तकनीकी मूल्यांकन समिति के सदस्य
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5-कुलपति डॉ. एचके अग्रवाल के साथ डॉ. रमेश आर्य। स्रोत: पीजीआई
- फोटो : बहराइच में चिलचिलाती धूप में कपड़ा लपेटकर गुजरते लोग।
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रोहतक। स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के सामुदायिक चिकित्सा विभाग के डॉ. रमेश वर्मा को केंद्रीय स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से गठित तकनीकी मूल्यांकन समिति का सदस्य नियुक्त किया गया है। यह समिति आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित स्वास्थ्य तकनीकों का मूल्यांकन करेगी।
स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के अनुसार, यह समिति हेल्थ टेक्नोलॉजी असेसमेंट इन इंडिया के तहत गठित की गई है। इसका उद्देश्य स्वास्थ्य क्षेत्र में साक्ष्य आधारित व पारदर्शी निर्णयों को बढ़ावा देना है। इसमें देशभर के 11 विशेषज्ञ शामिल हैं जिनमें एम्स नई दिल्ली, जिपमेर पुडुचेरी व पीजीआई चंडीगढ़ के विशेषज्ञ भी हैं। समिति की अध्यक्षता मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज दिल्ली के सेवानिवृत्त प्रोफेसर डॉ. सिद्धार्थ रामजी करेंगे।
डॉ. रमेश वर्मा ने बताया कि समिति एआई आधारित तकनीकों की क्लीनिकल प्रभावशीलता, लागत-दक्षता व स्वास्थ्य सेवाओं में समानता जैसे पहलुओं की जांच करेगी। यह दवाओं, उपकरणों व स्वास्थ्य कार्यक्रमों में एआई के उपयोग पर नीतिगत सिफारिशें देंगी।
160 से अधिक शोध पत्र, सात पुस्तकें लिख चुके
डॉ. रमेश चंद्र 160 से अधिक शोध पत्र, सात पुस्तकें लिख चुके और सात राष्ट्रीय स्तर की पुस्तकों में अध्याय दर्ज करा चुके हैं। वे आठ क्लीनिकल ट्रायल में जांचकर्ता रहे हैं। कोविड के दौरान उन्होंने को वैक्सीन ट्रायल में सह-जांचकर्ता के रूप में भी काम किया था। कुलपति डॉ. एचके अग्रवाल ने डॉ. रमेश वर्मा की नियुक्ति पर कहा कि यह पूरे विश्वविद्यालय और हरियाणा के लिए गौरव की बात है।
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स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के अनुसार, यह समिति हेल्थ टेक्नोलॉजी असेसमेंट इन इंडिया के तहत गठित की गई है। इसका उद्देश्य स्वास्थ्य क्षेत्र में साक्ष्य आधारित व पारदर्शी निर्णयों को बढ़ावा देना है। इसमें देशभर के 11 विशेषज्ञ शामिल हैं जिनमें एम्स नई दिल्ली, जिपमेर पुडुचेरी व पीजीआई चंडीगढ़ के विशेषज्ञ भी हैं। समिति की अध्यक्षता मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज दिल्ली के सेवानिवृत्त प्रोफेसर डॉ. सिद्धार्थ रामजी करेंगे।
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डॉ. रमेश वर्मा ने बताया कि समिति एआई आधारित तकनीकों की क्लीनिकल प्रभावशीलता, लागत-दक्षता व स्वास्थ्य सेवाओं में समानता जैसे पहलुओं की जांच करेगी। यह दवाओं, उपकरणों व स्वास्थ्य कार्यक्रमों में एआई के उपयोग पर नीतिगत सिफारिशें देंगी।
160 से अधिक शोध पत्र, सात पुस्तकें लिख चुके
डॉ. रमेश चंद्र 160 से अधिक शोध पत्र, सात पुस्तकें लिख चुके और सात राष्ट्रीय स्तर की पुस्तकों में अध्याय दर्ज करा चुके हैं। वे आठ क्लीनिकल ट्रायल में जांचकर्ता रहे हैं। कोविड के दौरान उन्होंने को वैक्सीन ट्रायल में सह-जांचकर्ता के रूप में भी काम किया था। कुलपति डॉ. एचके अग्रवाल ने डॉ. रमेश वर्मा की नियुक्ति पर कहा कि यह पूरे विश्वविद्यालय और हरियाणा के लिए गौरव की बात है।

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