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Rohtak News: संध्या जैन ने पौधों में से पौध निकालकर घर को बनाया हरा-भरा

Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 19 Apr 2026 11:54 PM IST
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Sandhya Jain transformed her home into a lush green haven by propagating new plants from existing ones.
13 ग्रीन रोड स्थित मकान के आंगन में बनाई बगिया में पौधों की देखभाल करतीं संध्या जैन। संवाद
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रोहतक। ग्रीन रोड निवासी संध्या जैन ने घर के आंगन में छह साल पहले 20 पौधों से बगिया बनाई जिसमें अब 800 से अधिक पौधे हैं। रिश्तेदार व आस-पड़ोस की महिलाएं भी बगिया की सराहना करती हैं। संध्या बीए पास हैं। वह बताती हैं जब भी फुटाव के समय जब नए पौधे निकलते हैं तो उनको दूसरे गमलों में लगाती हैं। इस कारण हरियाली बढ़ती चली गई।
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संध्या की शादी 1992 में विवेक जैन के साथ हुई थी जो बिजनेसमैन हैं। शादी की सालगिरह पर उन्होंने घर के आंगन में आम और बेलगिरी के पौधे लगाए थे जो अब पेड़ बन गए हैं। उनके तीन बच्चे हैं। बच्चों के जन्मदिन पर भी वह घर में पौधे ही लगाती हैं। पौधों से अब वह छोटे पौधे तैयार करती हैं और परिचितों को गिफ्ट भी देती हैं।
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संध्या का मानना है कि हम जितना प्रकृति के नजदीक रहेंगे उतना ही तन और मन से स्वस्थ बने रहेंगे। वे सुबह-शाम अपने घर आंगन में प्राणायाम भी करती हैं। पौध लगाने के लिए वे दूसरों को भी प्रेरित करती हैं।
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बगिया में इन प्रजातियों के पौधे
संध्या की बगिया में बोगनविलिया, गुडहल, गुलाब, गेंदा, सदाबहार, मनी प्लांट की अनेक प्रजातियां, स्नेक प्लांट, स्पाइडर प्लांट, फाइकस, जेड प्लांट, पाम की अलग-अलग प्रजातियों के पौधे हैं। नीम, बेलगिरी, नींबू, आम, चीकू, बरगद, सिंगोनियम, बोनसाई, संतरा, कढ़ी पत्ता, मोरिंगा सहित कैक्टस की भी विभिन्न प्रजातियां हैं।
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गोवा से लाया पौधा दे रहा हरियाली

संध्या ने बताया कि पौधों से नई पौध तैयार करने का उनको बहुत शौक है। इसी के चलते वह जब कभी घर से बाहर जाती हैं तो वहां से कोई न कोई पौधा जरूर लेकर आती हैं और आंगन में लगाती हैं। वह गोवा गईं तो सड़क किनारे एक पौधे ने आकर्षित किया। वह पौधा अपने साथ ले आईं और गमले में लगा दिया। यह पौधा अब हरियाली दे रहा है।
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फल सब्जियों के वेस्ट से बनाती हैं खाद
संध्या रसोई के लिए प्रयोग होने वाली फल-सब्जियाें के वेस्ट से ही वे खाद तैयार कर लेती हैं और उसी का प्रयोग पौधों में करती हैं। कटाई-छटाई से लेकर पौधों में पानी भी खुद देती हैं। पौधों को भीषण गर्मी से बचाने के लिए ग्रीन नेट का प्रयोग भी किया है।
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