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Rohtak News: सविता ने छत पर बनाई बगिया, ऑटोमेटिक फव्वारे से करती हैं सिंचाई
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मेरी बगिया : फोटो संख्या : 13 :
बगिया में रंग बिरंगे फूलों के अलावा औषधीय पौधे भी शामिल, पोषण के लिए करती हैं देसी खाद का प्रयोग
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहतक। रामगोपाल कॉलोनी निवासी सविता की बगिया में इन दिनों बयार बह रही है। चार साल पहले घर की छत पर बनी बगिया अब 150 से अधिक प्रजातियों के पौधों से सज चुकी है।
शिक्षिका सविता की बगिया में रंग-बिरंगे फूलों के अलावा फलदार, औषधीय व सजावटी पौधे भी शामिल हैं। गर्मी से पौधों के बचाव के लिए ग्रीन नेट के अलावा ऑटोमेटिक फव्वारा भी लगाया है। घर की बेकार वस्तुओं से उन्होंने शानदार सजावट कर पौधे लगाए हैं।
वे पौधों के लिए गोबर की खाद का प्रयोग करतीं हैं। राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय रुड़की में वे अंग्रेजी विषय की अध्यापिका हैं। उनका कहना है कि घर से बाहर जब सड़कों पर प्रदूषण बहुत है। इसलिए उन्होंने घर की छत पर ही बगिया लगाई है जिसमें विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए ताकि अच्छा महसूस हो साथ ही स्वच्छ हवा मिल सके।
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ऑटोमेटिक फव्वार दे रहा हरियाली
गर्मी की छुट्टियां में परिवार के साथ कई दिन बाहर जाना होता है जिससे छत पर लगे पौधे सूख जाते थे। ऐसे में उन्होंने अब उनकी देखभाल के लिए ऑटोमेटिक फव्वारा लगाया है जिसे वे फोन से ही चला सकते हैं और बंद भी कर सकते है।
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चिड़ियाें की चहचहाहट से मन हर्षित :
घर की छत पर प्राकृतिक नजारा होने के कारण चिड़िया व अन्य पक्षी भी आते हैं। सुबह चिड़ियाें की चहचहाहट सुनकर मन हर्षित हो उठता है। उनका मानना है कि हमें जीवन में प्रकृति के नजदीक रहना चाहिए। घर की बेकार समझी जाने वाली खाली बोतल, टायर व डिब्बे आदि से ही वे गमले तैयार करती हैं।
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बगिया में इन प्रजातियों के पौधे :
उनकी बगिया में अपराजिता, गुलदाउदी, बोगनविलिया, गुलाब, सदाबहार, पेटूनिया, गेंदा, गुड़हल, चंपा आदि फूलों के अलावा पुदीना, पालक, धनिया, बैंगन, हरी मिर्च, टमाटर आदि सब्जियों के पौधे भी लगाए हैं। वे सब्जियां इस बगिया से ही प्राप्त करतीं है। जेड प्लांट, मनी प्लांट, पेंसिल, कैक्टस, पान की बेल, पाम, किन्नू, अजवाइन, अंगूर, नींबू, क्रिसमस ट्री, स्पाइडर प्लांट, कढ़ी पत्ता, स्नेक प्लांट आदि विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए हैं।
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उनके लिए सभी पौधे यादगार
वे मानती हैं कि उनके लिए बगिया के सभी पौधे यादगार हैं। चाहे झज्जर में सड़क किनारे लगी बोगनविलिया की टहनी से बनाए पौधे हो या हिमाचल प्रदेश से आई सजावट बेल। प्रत्येक अवसर पर वे घर में कोई न कोई पौधा जरूर लगती हैं। सविता की शादी 2008 में रोहतक निवासी नरेंद्र सिंह के साथ हुई थी। नरेंद्र भी पौधों की देखभाल में उनका सहयोग करते हैं।
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बगिया में रंग बिरंगे फूलों के अलावा औषधीय पौधे भी शामिल, पोषण के लिए करती हैं देसी खाद का प्रयोग
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहतक। रामगोपाल कॉलोनी निवासी सविता की बगिया में इन दिनों बयार बह रही है। चार साल पहले घर की छत पर बनी बगिया अब 150 से अधिक प्रजातियों के पौधों से सज चुकी है।
शिक्षिका सविता की बगिया में रंग-बिरंगे फूलों के अलावा फलदार, औषधीय व सजावटी पौधे भी शामिल हैं। गर्मी से पौधों के बचाव के लिए ग्रीन नेट के अलावा ऑटोमेटिक फव्वारा भी लगाया है। घर की बेकार वस्तुओं से उन्होंने शानदार सजावट कर पौधे लगाए हैं।
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वे पौधों के लिए गोबर की खाद का प्रयोग करतीं हैं। राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय रुड़की में वे अंग्रेजी विषय की अध्यापिका हैं। उनका कहना है कि घर से बाहर जब सड़कों पर प्रदूषण बहुत है। इसलिए उन्होंने घर की छत पर ही बगिया लगाई है जिसमें विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए ताकि अच्छा महसूस हो साथ ही स्वच्छ हवा मिल सके।
ऑटोमेटिक फव्वार दे रहा हरियाली
गर्मी की छुट्टियां में परिवार के साथ कई दिन बाहर जाना होता है जिससे छत पर लगे पौधे सूख जाते थे। ऐसे में उन्होंने अब उनकी देखभाल के लिए ऑटोमेटिक फव्वारा लगाया है जिसे वे फोन से ही चला सकते हैं और बंद भी कर सकते है।
चिड़ियाें की चहचहाहट से मन हर्षित :
घर की छत पर प्राकृतिक नजारा होने के कारण चिड़िया व अन्य पक्षी भी आते हैं। सुबह चिड़ियाें की चहचहाहट सुनकर मन हर्षित हो उठता है। उनका मानना है कि हमें जीवन में प्रकृति के नजदीक रहना चाहिए। घर की बेकार समझी जाने वाली खाली बोतल, टायर व डिब्बे आदि से ही वे गमले तैयार करती हैं।
बगिया में इन प्रजातियों के पौधे :
उनकी बगिया में अपराजिता, गुलदाउदी, बोगनविलिया, गुलाब, सदाबहार, पेटूनिया, गेंदा, गुड़हल, चंपा आदि फूलों के अलावा पुदीना, पालक, धनिया, बैंगन, हरी मिर्च, टमाटर आदि सब्जियों के पौधे भी लगाए हैं। वे सब्जियां इस बगिया से ही प्राप्त करतीं है। जेड प्लांट, मनी प्लांट, पेंसिल, कैक्टस, पान की बेल, पाम, किन्नू, अजवाइन, अंगूर, नींबू, क्रिसमस ट्री, स्पाइडर प्लांट, कढ़ी पत्ता, स्नेक प्लांट आदि विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए हैं।
उनके लिए सभी पौधे यादगार
वे मानती हैं कि उनके लिए बगिया के सभी पौधे यादगार हैं। चाहे झज्जर में सड़क किनारे लगी बोगनविलिया की टहनी से बनाए पौधे हो या हिमाचल प्रदेश से आई सजावट बेल। प्रत्येक अवसर पर वे घर में कोई न कोई पौधा जरूर लगती हैं। सविता की शादी 2008 में रोहतक निवासी नरेंद्र सिंह के साथ हुई थी। नरेंद्र भी पौधों की देखभाल में उनका सहयोग करते हैं।