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Rohtak News: अब स्कूलों में हर साल नहीं बदली जाएगी वर्दी, नियम तोड़े तो होगी कार्रवाई
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10-अमर उजाला में 02 अप्रैल को प्रकाशित खबर।
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रोहतक। अब निजी स्कूल हर साल वर्दी नहीं बदल पाएंगे और न ही अभिभावकों को किसी विशेष प्रकाशक की महंगी किताबें या स्टेशनरी खरीदने के लिए मजबूर कर सकेंगे। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई स्कूल नियमों का उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ हरियाणा स्कूल शिक्षा नियम-2003 के नियम 10 के तहत कार्रवाई की जाएगी।
निजी विद्यालयों की ओर से अभिभावकों को अतिरिक्त खर्च का दबाव डाला जा रहा है। हर साल-छह महीने में ड्रेस व किताबें बदले जाने से अभिभावकों की जेब पर असर पड़ रहा है। अभिभावकों की परेशानी को अमर उजाला ने प्रमुखता से उठाया था। अब मुख्यालय ने जिला शिक्षा अधिकारी व मौलिक शिक्षा अधिकारी को पत्र जारी निजी विद्यालयों पर कार्रवाई के आदेश जारी किए हैं।
जिला अधिकारी ने बताया कि स्कूल यूनिफॉर्म के डिजाइन और रंग में कम से कम 5 वर्षों तक कोई बदलाव नहीं कर सकता है। स्कूलों को केवल एनसीईआरटी या सरकारी बोर्ड की ओर से मान्यता प्राप्त पुस्तकें ही पढ़ानी होंगी। निजी प्रकाशकों की किताबें खरीदने के लिए बच्चों या अभिभावकों को विवश करना अवैध होगा।
उन्होंने बताया कि निजी स्कूल प्रबंधन किसी एक दुकान या फर्म से ड्रेस-पुस्तकें खरीदने के लिए अभिभावक को मजबूर नहीं कर सकते हैं। अभिभावक अपनी मर्जी से कहीं से भी सामान खरीद सकते हैं। आदेशों की अवहेलना करने वाले स्कूलों को दंडित किया जाएगा जिसमें मान्यता रद्द करने तक की कार्रवाई शामिल हो सकती है।
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वर्जन
मुख्यालय के आदेशों का कड़ाई से पालन करने के लिए निजी स्कूलों में औचक निरीक्षण किया जाएगा। अभिभावक मनमानी करने वाले स्कूलों की शिकायत जिला स्तर पर मुख्यालय में कर सकते हैं।
- दिलजीत सिंह, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी।
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मंडल आयुक्त और जिला शिक्षा अधिकारियों को अनेक बार शिकायत दी जा चुकी है। विद्यालय व विक्रेता अभिभावकों को हर साल वर्दी और महंगी किताबें खरीदने को विवश कर रहे हैं।
- यशवंत मलिक, राज्य प्रधान, अभिभावक संघ।
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निजी विद्यालयों की ओर से अभिभावकों को अतिरिक्त खर्च का दबाव डाला जा रहा है। हर साल-छह महीने में ड्रेस व किताबें बदले जाने से अभिभावकों की जेब पर असर पड़ रहा है। अभिभावकों की परेशानी को अमर उजाला ने प्रमुखता से उठाया था। अब मुख्यालय ने जिला शिक्षा अधिकारी व मौलिक शिक्षा अधिकारी को पत्र जारी निजी विद्यालयों पर कार्रवाई के आदेश जारी किए हैं।
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जिला अधिकारी ने बताया कि स्कूल यूनिफॉर्म के डिजाइन और रंग में कम से कम 5 वर्षों तक कोई बदलाव नहीं कर सकता है। स्कूलों को केवल एनसीईआरटी या सरकारी बोर्ड की ओर से मान्यता प्राप्त पुस्तकें ही पढ़ानी होंगी। निजी प्रकाशकों की किताबें खरीदने के लिए बच्चों या अभिभावकों को विवश करना अवैध होगा।
उन्होंने बताया कि निजी स्कूल प्रबंधन किसी एक दुकान या फर्म से ड्रेस-पुस्तकें खरीदने के लिए अभिभावक को मजबूर नहीं कर सकते हैं। अभिभावक अपनी मर्जी से कहीं से भी सामान खरीद सकते हैं। आदेशों की अवहेलना करने वाले स्कूलों को दंडित किया जाएगा जिसमें मान्यता रद्द करने तक की कार्रवाई शामिल हो सकती है।
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मुख्यालय के आदेशों का कड़ाई से पालन करने के लिए निजी स्कूलों में औचक निरीक्षण किया जाएगा। अभिभावक मनमानी करने वाले स्कूलों की शिकायत जिला स्तर पर मुख्यालय में कर सकते हैं।
- दिलजीत सिंह, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी।
मंडल आयुक्त और जिला शिक्षा अधिकारियों को अनेक बार शिकायत दी जा चुकी है। विद्यालय व विक्रेता अभिभावकों को हर साल वर्दी और महंगी किताबें खरीदने को विवश कर रहे हैं।
- यशवंत मलिक, राज्य प्रधान, अभिभावक संघ।

10-अमर उजाला में 02 अप्रैल को प्रकाशित खबर।

10-अमर उजाला में 02 अप्रैल को प्रकाशित खबर।
