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Rohtak News: चेयरमैन 12.50 लाख व पार्षद खर्च कर सकेंगे तीन लाख रुपये
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सांपला। राज्य निर्वाचन आयोग ने अध्यक्ष व पार्षद का चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों की ओर से चुनाव के दौरान किए जाने वाले अधिकतम खर्च की सीमा निर्धारित की है। चेयरमैन के लिए साढ़े 12 लाख रुपये और पार्षद के लिए तीन लाख रुपये अधिकतम खर्च सीमा निर्धारित की गई है।
निर्वाचन आयोग ने चुनाव अवधि के दौरान पर्यवेक्षक लगा दिए हैं। प्रत्येक उम्मीदवार के खर्चे पर कड़ी नजर रहेगी। यह जानकारी पर्यवेक्षक हरीश गुप्ता ने दी। वह बुधवार को सांपला में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक उम्मीदवार को नामांकन पत्र दाखिल करने की तिथि से लेकर चुनाव परिणाम घोषित होने तक प्रतिदिन अपने चुनाव का विस्तृत सत्य लेखा जोखा रखना होगा। यह लेखा जोखा सभी संबंधित वाउचर एवं सहायक दस्तावेजों से ही दर्ज किया जाएगा। किसी भी प्रकार की लापरवाही या अपूर्ण वितरण को गंभीर उल्लंघन माना जाएगा।
उन्होंने कहा कि चुनाव प्रचार से संबंधित सभी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष खर्च चुनाव में शामिल किए जाएंगे। इनमें प्रमुख रूप से प्रचार के लिए उपयोग किए जाने वाले वाहन ईंधन, वाहन किराया, पंफ्लेट, पोस्टर, बैनर एवं अन्य प्रचार सामग्री की छपाई, समाचार पत्रों एवं अन्य माध्यमों में विज्ञान, डाक एवं स्टेशनरी खर्च, चुनावी सभा, कार्यक्रम, भोजन, चाय नाश्ता व अन्य खर्च शामिल है।
30 दिन में देना होगा ब्योरा
उम्मीदवार को चुनाव परिणाम घोषित होने के 30 दिन के अंदर अपना पूर्ण चुनाव खर्च का ब्योरा अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। निर्धारित सीमा से ज्यादा भी खर्च नहीं करना होगा। अगर वह समय पर अपना खर्च की रिपोर्ट प्रशासन को देने में असफल रहता है तो उनके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाएगी और उम्मीदवार को 5 वर्ष तक चुनाव लड़ने के लिए भी अयोग्य घोषित किया जा सकता है। प्रशासन की टीम प्रत्येक उम्मीदवार के खर्च रजिस्टर का तीसरे दिन निरीक्षण करेंगी। मतदान समाप्ति के अगले दिन आयोग को विस्तृत विश्लेषणात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी।
शराब ठेकों पर निगरानी
चुनाव अवधि के दौरान इलाके में अंग्रेजी शराब की दुकानों व देशी शराब के थोक विक्रेताओं पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। किसी उम्मीदवार की ओर से चुनाव में शराब का उपयोग नहीं किया जाएगा। इसके लिए पुलिस विभाग को भी निर्देश दिए गए हैं। पुलिस अभियान चलाकर अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाए।
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निर्वाचन आयोग ने चुनाव अवधि के दौरान पर्यवेक्षक लगा दिए हैं। प्रत्येक उम्मीदवार के खर्चे पर कड़ी नजर रहेगी। यह जानकारी पर्यवेक्षक हरीश गुप्ता ने दी। वह बुधवार को सांपला में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।
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उन्होंने कहा कि प्रत्येक उम्मीदवार को नामांकन पत्र दाखिल करने की तिथि से लेकर चुनाव परिणाम घोषित होने तक प्रतिदिन अपने चुनाव का विस्तृत सत्य लेखा जोखा रखना होगा। यह लेखा जोखा सभी संबंधित वाउचर एवं सहायक दस्तावेजों से ही दर्ज किया जाएगा। किसी भी प्रकार की लापरवाही या अपूर्ण वितरण को गंभीर उल्लंघन माना जाएगा।
उन्होंने कहा कि चुनाव प्रचार से संबंधित सभी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष खर्च चुनाव में शामिल किए जाएंगे। इनमें प्रमुख रूप से प्रचार के लिए उपयोग किए जाने वाले वाहन ईंधन, वाहन किराया, पंफ्लेट, पोस्टर, बैनर एवं अन्य प्रचार सामग्री की छपाई, समाचार पत्रों एवं अन्य माध्यमों में विज्ञान, डाक एवं स्टेशनरी खर्च, चुनावी सभा, कार्यक्रम, भोजन, चाय नाश्ता व अन्य खर्च शामिल है।
30 दिन में देना होगा ब्योरा
उम्मीदवार को चुनाव परिणाम घोषित होने के 30 दिन के अंदर अपना पूर्ण चुनाव खर्च का ब्योरा अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। निर्धारित सीमा से ज्यादा भी खर्च नहीं करना होगा। अगर वह समय पर अपना खर्च की रिपोर्ट प्रशासन को देने में असफल रहता है तो उनके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाएगी और उम्मीदवार को 5 वर्ष तक चुनाव लड़ने के लिए भी अयोग्य घोषित किया जा सकता है। प्रशासन की टीम प्रत्येक उम्मीदवार के खर्च रजिस्टर का तीसरे दिन निरीक्षण करेंगी। मतदान समाप्ति के अगले दिन आयोग को विस्तृत विश्लेषणात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी।
शराब ठेकों पर निगरानी
चुनाव अवधि के दौरान इलाके में अंग्रेजी शराब की दुकानों व देशी शराब के थोक विक्रेताओं पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। किसी उम्मीदवार की ओर से चुनाव में शराब का उपयोग नहीं किया जाएगा। इसके लिए पुलिस विभाग को भी निर्देश दिए गए हैं। पुलिस अभियान चलाकर अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाए।
