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Rohtak News: बहन के सहारे इंटरनेशनल क्रिकेटर बनने का सपना बुन रही निशु यादव
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32-निशु यादव।
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करिश्मा रंगा
रोहतक। जिले में आयोजित 69वीं स्कूल अंडर-17 राष्ट्रीय बालिका क्रिकेट चैंपियनशिप में इस बार सिसैयां गांव उत्तर प्रदेश की निशु यादव अपनी मेहनत और जुनून से अलग पहचान बना रही हैं। साधारण परिवार से आने वाली यह खिलाड़ी कठिन हालातों के बावजूद बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने की हिम्मत रखती है।
निशु यादव को बचपन से ही क्रिकेट में रुचि रही है। परिवार में खेल का माहौल होने के कारण उनका झुकाव इस ओर बढ़ता गया। उन्होंने महज 9 साल की उम्र में गली-मोहल्लों में अपने भाई और लड़कों के साथ खेलकर क्रिकेट की शुरुआत की। गांव में लड़कियों के लिए सुविधाओं की कमी के बावजूद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। संवाद
आर्थिक तंगी के बीच बहन बनी सहारा
निशु के पिता पेशे से टेलर हैं और सात भाई-बहनों के परिवार में आर्थिक स्थिति सीमित है। ऐसे में उनकी बहन आंचल यादव उनके सपनों की सबसे बड़ी ताकत बनकर सामने आई हैं। आंचल निजी स्कूल में पढ़ाकर निशु की किट, फीस और अन्य खर्च उठाती हैं। उनके पिता डाइट का ध्यान रखते हैं। परिवार का यह सहयोग ही निशु को आगे बढ़ने की ताकत देता है।
प्रतिदिन 7 घंटे की प्रैक्टिस से दो बार नेशनल स्तर में लिया हिस्सा
निशु रोजाना सुबह 5 बजे से 8 बजे तक ट्रेनिंग और दोपहर 2 बजे से शाम 7 बजे तक प्रैक्टिस करती हैं। वह बदायूं की एक पर्सनल अकादमी में कोच रजत राज से प्रशिक्षण ले रही हैं। उनकी मेहनत का ही नतीजा है कि वह दो बार नेशनल स्तर पर अंडर-17 और अंडर-19 में हिस्सा ले चुकी हैं। अंडर-19 में गोल्ड मेडल जीता था और अब अंडर-17 में भी अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं।
शेफाली वर्मा है प्रेरणा, इंटरनेशनल खेलना है लक्ष्य
निशु भारतीय महिला क्रिकेटर शेफाली वर्मा और केएल राहुल को अपना रोल मॉडल मानती हैं। उनका सपना है कि वह एक दिन भारत के लिए खेले और अपने गांव व परिवार का नाम रोशन करें। वह कहती हैं कि हालात चाहे जैसे भी हों, उनका लक्ष्य इंटरनेशनल क्रिकेट तक पहुंचना है।
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निशु यादव को बचपन से ही क्रिकेट में रुचि रही है। परिवार में खेल का माहौल होने के कारण उनका झुकाव इस ओर बढ़ता गया। उन्होंने महज 9 साल की उम्र में गली-मोहल्लों में अपने भाई और लड़कों के साथ खेलकर क्रिकेट की शुरुआत की। गांव में लड़कियों के लिए सुविधाओं की कमी के बावजूद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। संवाद
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आर्थिक तंगी के बीच बहन बनी सहारा
निशु के पिता पेशे से टेलर हैं और सात भाई-बहनों के परिवार में आर्थिक स्थिति सीमित है। ऐसे में उनकी बहन आंचल यादव उनके सपनों की सबसे बड़ी ताकत बनकर सामने आई हैं। आंचल निजी स्कूल में पढ़ाकर निशु की किट, फीस और अन्य खर्च उठाती हैं। उनके पिता डाइट का ध्यान रखते हैं। परिवार का यह सहयोग ही निशु को आगे बढ़ने की ताकत देता है।
प्रतिदिन 7 घंटे की प्रैक्टिस से दो बार नेशनल स्तर में लिया हिस्सा
निशु रोजाना सुबह 5 बजे से 8 बजे तक ट्रेनिंग और दोपहर 2 बजे से शाम 7 बजे तक प्रैक्टिस करती हैं। वह बदायूं की एक पर्सनल अकादमी में कोच रजत राज से प्रशिक्षण ले रही हैं। उनकी मेहनत का ही नतीजा है कि वह दो बार नेशनल स्तर पर अंडर-17 और अंडर-19 में हिस्सा ले चुकी हैं। अंडर-19 में गोल्ड मेडल जीता था और अब अंडर-17 में भी अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं।
शेफाली वर्मा है प्रेरणा, इंटरनेशनल खेलना है लक्ष्य
निशु भारतीय महिला क्रिकेटर शेफाली वर्मा और केएल राहुल को अपना रोल मॉडल मानती हैं। उनका सपना है कि वह एक दिन भारत के लिए खेले और अपने गांव व परिवार का नाम रोशन करें। वह कहती हैं कि हालात चाहे जैसे भी हों, उनका लक्ष्य इंटरनेशनल क्रिकेट तक पहुंचना है।
