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Sirsa News: हाईकोर्ट से पुलिस कर्मियों को झटका, याचिका खारिज, चलेगा मुकदमा
Wed, 29 Jul 2026 11:23 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Wed, 29 Jul 2026 11:23 PM IST
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सिंघपुरा चौकी में हुई युवक की मौत का मामला : हाईकोर्ट ने समनिंग ऑर्डर और सेशन कोर्ट के फैसलों को ठहराया सही
संवाद न्यूज एजेंसी
डबवाली। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने वर्ष 2016 के चर्चित सिंघपुरा पुलिस चौकी कस्टोडियल डेथ मामले में आरोपी पुलिस कर्मियों को बड़ा झटका दिया है। न्यायमूर्ति मनीषा बत्रा की एकलपीठ ने पुलिस कर्मियों की याचिका खारिज कर दी। इसके साथ ही सत्र न्यायालय, सिरसा के आदेश और जेएमआईसी डबवाली के समन आदेश को बरकरार रखा गया।
आरोपी पुलिस कर्मियों पर भारतीय दंड संहिता की धारा 304, 342, 506 और 34 आईपीसी के तहत मुकदमा चलाने का रास्ता साफ हो गया। यह मामला 12 जून 2016 का है। शिकायतकर्ता जगदीश के अनुसार, उनका बेटा संदीप अपने दो साथियों के साथ सिरसा जा रहा था।
आरोप है कि गांव दादू के पास पुलिस कर्मियों ने उन्हें रोका। संदीप को साथियों सहित सिंघपुरा पुलिस चौकी ले जाकर अवैध रूप से हिरासत में रखा गया। शिकायत में मारपीट करने और तबीयत बिगड़ने पर समय पर इलाज न कराने का आरोप है। बाद में कालांवाली के अस्पताल में संदीप को मृत घोषित कर दिया गया।
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घटना के बाद धारा 176 सीआरपीसी के तहत हुई न्यायिक जांच में मौत को प्राकृतिक बताया गया था। मृतक के पिता की निजी शिकायत पहले खारिज हो गई थी जिसे सत्र न्यायालय, सिरसा ने 2023 में पुनर्विचार के लिए वापस भेज दिया।
हाईकोर्ट का फैसला
जेएमआईसी डबवाली ने आरोपी पुलिस कर्मियों को समन जारी किए थे। इन समन को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि हिरासत में मौत जैसे मामलों में मजिस्ट्रियल जांच अंतिम नहीं मानी जा सकती। प्रथमदृष्टया उपलब्ध साक्ष्य मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त आधार प्रदान करते हैं। विशेषकर प्रत्यक्षदर्शी गवाह विकास (CW-5) का बयान महत्वपूर्ण है।
ट्रायल कोर्ट को निर्देश
अदालत ने कहा कि मौत प्राकृतिक थी या पुलिस की कथित लापरवाही अथवा मारपीट के कारण हुई। इसका अंतिम निर्णय ट्रायल कोर्ट करेगा। यह निर्णय साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर होगा। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने याचिका खारिज की। हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को मामले की सुनवाई स्वतंत्र रूप से आगे बढ़ाने के निर्देश दिए।
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संवाद न्यूज एजेंसी
डबवाली। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने वर्ष 2016 के चर्चित सिंघपुरा पुलिस चौकी कस्टोडियल डेथ मामले में आरोपी पुलिस कर्मियों को बड़ा झटका दिया है। न्यायमूर्ति मनीषा बत्रा की एकलपीठ ने पुलिस कर्मियों की याचिका खारिज कर दी। इसके साथ ही सत्र न्यायालय, सिरसा के आदेश और जेएमआईसी डबवाली के समन आदेश को बरकरार रखा गया।
आरोपी पुलिस कर्मियों पर भारतीय दंड संहिता की धारा 304, 342, 506 और 34 आईपीसी के तहत मुकदमा चलाने का रास्ता साफ हो गया। यह मामला 12 जून 2016 का है। शिकायतकर्ता जगदीश के अनुसार, उनका बेटा संदीप अपने दो साथियों के साथ सिरसा जा रहा था।
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आरोप है कि गांव दादू के पास पुलिस कर्मियों ने उन्हें रोका। संदीप को साथियों सहित सिंघपुरा पुलिस चौकी ले जाकर अवैध रूप से हिरासत में रखा गया। शिकायत में मारपीट करने और तबीयत बिगड़ने पर समय पर इलाज न कराने का आरोप है। बाद में कालांवाली के अस्पताल में संदीप को मृत घोषित कर दिया गया।
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घटना के बाद धारा 176 सीआरपीसी के तहत हुई न्यायिक जांच में मौत को प्राकृतिक बताया गया था। मृतक के पिता की निजी शिकायत पहले खारिज हो गई थी जिसे सत्र न्यायालय, सिरसा ने 2023 में पुनर्विचार के लिए वापस भेज दिया।
हाईकोर्ट का फैसला
जेएमआईसी डबवाली ने आरोपी पुलिस कर्मियों को समन जारी किए थे। इन समन को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि हिरासत में मौत जैसे मामलों में मजिस्ट्रियल जांच अंतिम नहीं मानी जा सकती। प्रथमदृष्टया उपलब्ध साक्ष्य मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त आधार प्रदान करते हैं। विशेषकर प्रत्यक्षदर्शी गवाह विकास (CW-5) का बयान महत्वपूर्ण है।
ट्रायल कोर्ट को निर्देश
अदालत ने कहा कि मौत प्राकृतिक थी या पुलिस की कथित लापरवाही अथवा मारपीट के कारण हुई। इसका अंतिम निर्णय ट्रायल कोर्ट करेगा। यह निर्णय साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर होगा। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने याचिका खारिज की। हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को मामले की सुनवाई स्वतंत्र रूप से आगे बढ़ाने के निर्देश दिए।