{"_id":"6adcf8c2ca6c36066c0b9004","slug":"chairman-educational-certificate-will-be-enquired-sirsa-news-c-128-1-svns1027-167383-2026-10-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sirsa News: चेयरमैन की शैक्षणिक योग्यता संबंधी दस्तावेज की जांच चुनाव आयोग का रिमाइंडर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sirsa News: चेयरमैन की शैक्षणिक योग्यता संबंधी दस्तावेज की जांच चुनाव आयोग का रिमाइंडर
Sat, 24 Oct 2026 11:58 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Sat, 24 Oct 2026 11:58 PM IST
विज्ञापन
सिरसा। राज्य चुनाव आयोग का जारी किया गया रिमाइंडर। शिकायतकर्ता
- रिटर्निंग अधिकारी के स्तर पर चल रही है जांच, राज्य चुनाव आयोग की गंभीरता से उठ रहे कई सवाल
नगर परिषद कार्यालय में चार पार्षदों की शैक्षणिक योग्यता की जांच उठ रही मांग
फोटो-- - 18
संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। राज्य चुनाव आयोग चेयरमैन वीर शांति स्वरूप की दसवीं और 12वीं की मार्कशीट के गलत व फर्जी होने की शिकायतों पर गंभीर है। आयोग ने एक माह के भीतर दूसरी बार उपायुक्त कार्यालय को दस्तावेज की जांच के लिए रिमाइंडर भेजा है।
इस रिमाइंडर में 31 अक्तूबर तक हर हाल में जांच रिपोर्ट भेजने को कहा गया है। प्रशासनिक अधिकारियों को अब इस मामले में जांच कर चुनाव आयोग को रिपोर्ट भेजनी है।
राज्य चुनाव आयोग ने इस मामले में संज्ञान लेते हुए 6 अक्तूबर को उपायुक्त को विशेष पत्र जारी किया था। इसमें 30 अक्तूबर तक रिपोर्ट सौंपने के आदेश दिए गए थे। इसके बाद भी रिपोर्ट न मिलने पर यह दूसरा रिमाइंडर भेजा गया है।
विज्ञापन
आयोग इस मामले में लगातार गंभीरता बनाए हुए है। रिटर्निंग अधिकारी व एसडीएम सिरसा राजेंद्र सिंह इस मामले की जांच करवा रहे हैं। नगर परिषद के चार पार्षदों की शैक्षणिक योग्यता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। चेयरमैन की जांच रिपोर्ट आने के बाद इन पार्षदों की भी जांच कराने की तैयारी है।
दस्तावेज पर उठते सवाल
चेयरमैन वीर शांति स्वरूप ने चुनाव के दौरान दस्तावेज जमा करवाए थे। इन दस्तावेज के अनुसार, उन्होंने 1989 में बिहार इंटरमीडिएट एजुकेशन काउंसिल पटना से प्रवेश लिया था। जून 1991 में 12वीं की परीक्षा उत्तीर्ण की थी। दसवीं की परीक्षा पंजाब स्कूल बोर्ड से पास की थी। इन दोनों मार्कशीट को लेकर भाजपा और कांग्रेस के पार्षद पहले दिन से ही सवाल उठा रहे हैं। भाजपा पार्षद भी पूर्व में इस मामले में शिकायत दर्ज करवा चुके हैं।
फर्जीवाड़े के दावे और जांच
राज्य चुनाव आयोग के समक्ष दावा किया गया है कि बिहार से लाई गई मार्कशीट फर्जी है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि चेयरमैन ने बिहार बोर्ड में कोई पढ़ाई नहीं की है। यह मार्कशीट चेयरमैन के चुनावों से पहले फर्जी तरीके से बनवाई गई हैं। राजनीतिक और अन्य माध्यमों का प्रयोग कर इन्हें तैयार किया गया है। इसलिए चेयरमैन की दोनों मार्कशीट की जांच आवश्यक है। इससे आमजन के सामने सच्चाई आ सकेगी।
पार्षद और शहरवासी भी जुटे खोजबीन में
राज्य चुनाव आयोग की जांच के साथ-साथ कुछ पार्षद और शहरवासी भी अपने स्तर पर जांच कर रहे हैं। वे दस्तावेज बनवाने वाले व्यक्ति को खोजने में जुटे हैं। पंजाब से लेकर बिहार तक की जानकारी खंगाली जा रही है। देश से बाहर गए एक व्यक्ति से भी संपर्क साधा गया है। सूत्रों के अनुसार, दावा किया जा रहा है कि संबंधित व्यक्ति द्वारा ही इन दस्तावेज को तैयार करवाया गया है।
विज्ञापन
नगर परिषद कार्यालय में चार पार्षदों की शैक्षणिक योग्यता की जांच उठ रही मांग
फोटो
संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। राज्य चुनाव आयोग चेयरमैन वीर शांति स्वरूप की दसवीं और 12वीं की मार्कशीट के गलत व फर्जी होने की शिकायतों पर गंभीर है। आयोग ने एक माह के भीतर दूसरी बार उपायुक्त कार्यालय को दस्तावेज की जांच के लिए रिमाइंडर भेजा है।
इस रिमाइंडर में 31 अक्तूबर तक हर हाल में जांच रिपोर्ट भेजने को कहा गया है। प्रशासनिक अधिकारियों को अब इस मामले में जांच कर चुनाव आयोग को रिपोर्ट भेजनी है।
विज्ञापन
राज्य चुनाव आयोग ने इस मामले में संज्ञान लेते हुए 6 अक्तूबर को उपायुक्त को विशेष पत्र जारी किया था। इसमें 30 अक्तूबर तक रिपोर्ट सौंपने के आदेश दिए गए थे। इसके बाद भी रिपोर्ट न मिलने पर यह दूसरा रिमाइंडर भेजा गया है।
विज्ञापन
आयोग इस मामले में लगातार गंभीरता बनाए हुए है। रिटर्निंग अधिकारी व एसडीएम सिरसा राजेंद्र सिंह इस मामले की जांच करवा रहे हैं। नगर परिषद के चार पार्षदों की शैक्षणिक योग्यता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। चेयरमैन की जांच रिपोर्ट आने के बाद इन पार्षदों की भी जांच कराने की तैयारी है।
दस्तावेज पर उठते सवाल
चेयरमैन वीर शांति स्वरूप ने चुनाव के दौरान दस्तावेज जमा करवाए थे। इन दस्तावेज के अनुसार, उन्होंने 1989 में बिहार इंटरमीडिएट एजुकेशन काउंसिल पटना से प्रवेश लिया था। जून 1991 में 12वीं की परीक्षा उत्तीर्ण की थी। दसवीं की परीक्षा पंजाब स्कूल बोर्ड से पास की थी। इन दोनों मार्कशीट को लेकर भाजपा और कांग्रेस के पार्षद पहले दिन से ही सवाल उठा रहे हैं। भाजपा पार्षद भी पूर्व में इस मामले में शिकायत दर्ज करवा चुके हैं।
फर्जीवाड़े के दावे और जांच
राज्य चुनाव आयोग के समक्ष दावा किया गया है कि बिहार से लाई गई मार्कशीट फर्जी है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि चेयरमैन ने बिहार बोर्ड में कोई पढ़ाई नहीं की है। यह मार्कशीट चेयरमैन के चुनावों से पहले फर्जी तरीके से बनवाई गई हैं। राजनीतिक और अन्य माध्यमों का प्रयोग कर इन्हें तैयार किया गया है। इसलिए चेयरमैन की दोनों मार्कशीट की जांच आवश्यक है। इससे आमजन के सामने सच्चाई आ सकेगी।
पार्षद और शहरवासी भी जुटे खोजबीन में
राज्य चुनाव आयोग की जांच के साथ-साथ कुछ पार्षद और शहरवासी भी अपने स्तर पर जांच कर रहे हैं। वे दस्तावेज बनवाने वाले व्यक्ति को खोजने में जुटे हैं। पंजाब से लेकर बिहार तक की जानकारी खंगाली जा रही है। देश से बाहर गए एक व्यक्ति से भी संपर्क साधा गया है। सूत्रों के अनुसार, दावा किया जा रहा है कि संबंधित व्यक्ति द्वारा ही इन दस्तावेज को तैयार करवाया गया है।