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Sirsa News: बिजली निगम के निजीकरण के विरोध में कर्मचारी सड़क पर उतरे
Wed, 29 Jul 2026 11:02 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Wed, 29 Jul 2026 11:02 PM IST
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बिजली निगम के कर्मचारी नेता उपायुक्त को ज्ञापन सौंपते हुए। संवाद
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कर्मचारियों ने लघु सचिवालय पहुंचकर सौंपा ज्ञापन, बोले- निजीकरण से किसान और आम जनता होंगे प्रभावित
फोटो-- -- 32 संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। बिजली निगम के निजीकरण के विरोध में बुधवार को कर्मचारियों ने सड़कों पर उतरकर जोरदार प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए निजीकरण की प्रक्रिया को तुरंत रोकने की मांग उठाई। उन्होंने उपायुक्त परिसर के मुख्य गेट को बंद कर दिया और धरना लगा दिया।
इस पर उपायुक्त की गाड़ी को अंदर जानी की जगह नहीं मिली। ऐसे में उन्होंने गाड़ी से उतरकर बिजली निगम कर्मचारियों का ज्ञापन लिया। इसके बाद कर्मचारियों ने प्रदर्शन खत्म किया। प्रदर्शन से पहले बिजली निगम के कर्मचारी निगम परिसर में एकत्रित हुए जहां से उन्होंने विरोध मार्च निकाला।
यह मार्च विभिन्न मार्गों से होते हुए लघु सचिवालय पहुंचा। यहां कर्मचारियों ने उपायुक्त शांतनु शर्मा को मुख्यमंत्री के नाम मांग पत्र सौंपकर बिजली निगम को निजी हाथों में देने की प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की।
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प्रदर्शन के दौरान कर्मचारी नेताओं ने कहा कि बिजली निगम का निजीकरण केवल कर्मचारियों के रोजगार और अधिकारों का मुद्दा नहीं है बल्कि इसका सीधा प्रभाव किसानों और आम उपभोक्ताओं पर भी पड़ेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार निजी कंपनियों और पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से निगम के निजीकरण की दिशा में आगे बढ़ रही है।
उन्होंने कहा कि यदि बिजली व्यवस्था निजी हाथों में गई तो बिजली सेवाएं महंगी हो सकती हैं और ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ किसानों को भी कई परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि बिजली जैसी मूलभूत सुविधा को सार्वजनिक क्षेत्र में ही बनाए रखना जनहित में है।
कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने निजीकरण का फैसला वापस नहीं लिया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर आम जनता और किसानों को साथ लेकर प्रदेश स्तर पर बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
कर्मचारी नेताओं ने घोषणा की कि बिजली निगम के कर्मचारी 11, 12 और 13 अगस्त को हड़ताल पर रहेंगे। इसके बाद भी यदि सरकार ने मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की जाएगी।
प्रदर्शन की अध्यक्षता एएचपीसी वर्कर यूनियन के सर्कल सचिव मदनलाल कंबोज, एचएसईबी वर्कर यूनियन के सर्कल सचिव जितेंद्र मोगा, एसी/बीसी यूनियन के सर्कल सचिव देवानंद और इंजीनियर एसोसिएशन के नेता राजेश मदेरणा ने संयुक्त रूप से की। मंच संचालन एएचपीसी वर्कर यूनियन केंद्रीय कमेटी के नेता राजेश भाकर और एचएसईबी वर्कर यूनियन के यूनिट नेता सुरेश मंगल ने किया।
आंदोलन की आगामी रणनीति
कर्मचारी नेताओं ने बताया कि मांगों को लेकर 3 से 5 अगस्त तक सभी कार्यकारी अभियंता कार्यालयों पर विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे। इसके बाद 6 से 8 अगस्त तक जनजागरण अभियान चलाया जाएगा। मांगें पूरी नहीं होने पर 11 से 13 अगस्त तक प्रदेशव्यापी हड़ताल का आयोजन किया जाएगा। राजेश भाकर ने कहा कि बिजली को निजी हाथों में सौंपना आम जनता के हितों के साथ खिलवाड़ है।
ज्ञापन के माध्यम से उठाई गईं प्रमुख मांगें
एग्रो डिस्कॉम, समानांतर लाइसेंस और स्मार्ट मीटर नीति को रद्द किया जाए। सभी कच्चे कर्मचारियों को स्थायी नीति बनाकर नियमित किया जाए। समान काम समान वेतन सहित सभी सरकारी लाभ दिए जाएं। सभी कर्मचारियों को 7 हजार रुपये जोखिम भत्ता दिया जाए। खाली पदों पर स्थायी भर्ती की जाए।
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सिरसा। बिजली निगम के निजीकरण के विरोध में बुधवार को कर्मचारियों ने सड़कों पर उतरकर जोरदार प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए निजीकरण की प्रक्रिया को तुरंत रोकने की मांग उठाई। उन्होंने उपायुक्त परिसर के मुख्य गेट को बंद कर दिया और धरना लगा दिया।
इस पर उपायुक्त की गाड़ी को अंदर जानी की जगह नहीं मिली। ऐसे में उन्होंने गाड़ी से उतरकर बिजली निगम कर्मचारियों का ज्ञापन लिया। इसके बाद कर्मचारियों ने प्रदर्शन खत्म किया। प्रदर्शन से पहले बिजली निगम के कर्मचारी निगम परिसर में एकत्रित हुए जहां से उन्होंने विरोध मार्च निकाला।
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यह मार्च विभिन्न मार्गों से होते हुए लघु सचिवालय पहुंचा। यहां कर्मचारियों ने उपायुक्त शांतनु शर्मा को मुख्यमंत्री के नाम मांग पत्र सौंपकर बिजली निगम को निजी हाथों में देने की प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की।
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प्रदर्शन के दौरान कर्मचारी नेताओं ने कहा कि बिजली निगम का निजीकरण केवल कर्मचारियों के रोजगार और अधिकारों का मुद्दा नहीं है बल्कि इसका सीधा प्रभाव किसानों और आम उपभोक्ताओं पर भी पड़ेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार निजी कंपनियों और पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से निगम के निजीकरण की दिशा में आगे बढ़ रही है।
उन्होंने कहा कि यदि बिजली व्यवस्था निजी हाथों में गई तो बिजली सेवाएं महंगी हो सकती हैं और ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ किसानों को भी कई परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि बिजली जैसी मूलभूत सुविधा को सार्वजनिक क्षेत्र में ही बनाए रखना जनहित में है।
कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने निजीकरण का फैसला वापस नहीं लिया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर आम जनता और किसानों को साथ लेकर प्रदेश स्तर पर बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
कर्मचारी नेताओं ने घोषणा की कि बिजली निगम के कर्मचारी 11, 12 और 13 अगस्त को हड़ताल पर रहेंगे। इसके बाद भी यदि सरकार ने मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की जाएगी।
प्रदर्शन की अध्यक्षता एएचपीसी वर्कर यूनियन के सर्कल सचिव मदनलाल कंबोज, एचएसईबी वर्कर यूनियन के सर्कल सचिव जितेंद्र मोगा, एसी/बीसी यूनियन के सर्कल सचिव देवानंद और इंजीनियर एसोसिएशन के नेता राजेश मदेरणा ने संयुक्त रूप से की। मंच संचालन एएचपीसी वर्कर यूनियन केंद्रीय कमेटी के नेता राजेश भाकर और एचएसईबी वर्कर यूनियन के यूनिट नेता सुरेश मंगल ने किया।
आंदोलन की आगामी रणनीति
कर्मचारी नेताओं ने बताया कि मांगों को लेकर 3 से 5 अगस्त तक सभी कार्यकारी अभियंता कार्यालयों पर विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे। इसके बाद 6 से 8 अगस्त तक जनजागरण अभियान चलाया जाएगा। मांगें पूरी नहीं होने पर 11 से 13 अगस्त तक प्रदेशव्यापी हड़ताल का आयोजन किया जाएगा। राजेश भाकर ने कहा कि बिजली को निजी हाथों में सौंपना आम जनता के हितों के साथ खिलवाड़ है।
ज्ञापन के माध्यम से उठाई गईं प्रमुख मांगें
एग्रो डिस्कॉम, समानांतर लाइसेंस और स्मार्ट मीटर नीति को रद्द किया जाए। सभी कच्चे कर्मचारियों को स्थायी नीति बनाकर नियमित किया जाए। समान काम समान वेतन सहित सभी सरकारी लाभ दिए जाएं। सभी कर्मचारियों को 7 हजार रुपये जोखिम भत्ता दिया जाए। खाली पदों पर स्थायी भर्ती की जाए।