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Sirsa News: सेम से पीड़ित किसानों की नहीं हुई सुनवाई, अधिकारियों के दावे हवा-हवाई

संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा Updated Tue, 24 Mar 2026 11:42 PM IST
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farmers bothered by waterlogging officers not in action
 घग्गर नदी में गिरता ड्रेन का पानी और बाहर पड़े गेट।
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-- सेम का दंश --एक महीना बीत जाने के बाद भी नहीं हुआ गेट लगाने का कार्य शुरू
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-- आज जिला उपायुक्त के साथ पुनः होगी बैठक।
-- कार्य शुरू न करने पर अनिश्चितकालीन धरना लगाने की चेतावनी।

फोटो ----35 ,36

संवाद न्यूज एजेंसी
रानियां। सेम से पीड़ित किसानों की धरने के बाद भी सुनवाई नहीं हुई। एक माह पहले किसानों ने ओटू हेड पर धरना दिया था। उपायुक्त के समक्ष हिसार घग्गर ड्रेन पर लिफ्ट पंप और गेट लगाने के आदेश दिए गए थे। एक माह बीत जाने के बाद काम नहीं हुआ है। ऐसे में बुधवार को किसान एकजुट होकर उपायुक्त से मुलाकात करेंगे और उसके बाद आगामी निर्णय लेंगे।

किसान नेता प्रकाश मामेरा, महावीर, रामकुमार व अन्य ने बताया कि हिसार घग्गर ड्रेन को बने करीब 25 साल हो गए। पहले गांव मंदोरी, शाहपुरिया, तरकांवाली, नाथूसरी, रुपाणा, दड़बा, गुड़िया खेड़ा व माधोसिंघाना क्षेत्र को सेम के पानी से बचने के लिए बनाया गया था। कुछ वर्षों के बाद अन्य गांवों को भी इससे जोड़ दिया गया और वहां का सेम व बरसात का पानी ड्रेन में डाला जाने लगा।
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किसानों ने बताया कि गांव गुड़िया खेड़ा के पास हिसार घग्गर ड्रेन गांव से करीब 15 फीट ऊंचाई पर बना हुआ है। 4 सालों से बरसात के दिनों में अत्यधिक मात्रा में पानी छोड़े जाने से यह गांव गुड़िया खेड़ा के क्षेत्र में ओवरफ्लो होकर टूट जाता है। इसके साथ लगते गांव नाथूसरी, तरकांवाली व रुपाणा व माधोसिंघाना क्षेत्र की हजारों एकड़ फसल जलमग्न होकर बर्बाद हो जाती हैं।
किसानों की मानें तो ड्रेन के टूटने से करीब 6 महीना तक उनके खेतों में 15 से 20 फीट तक पानी खड़ा रहता है। इस कारण ढाणियों में लोग रह नहीं पाते हैं। पक्के मकान भी क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। आर्थिक तौर पर यह ड्रेन किसानों के लिए घातक सिद्ध हो रही है।
गेट न होने से होता है ओवरफ्लो
किसान नेता प्रकाश ममेरा, महावीर व रामकुमार ने बताया कि बरसात के दिनों में घग्गर नदी उफान पर होती है। हिसार घग्गर ड्रेन का पानी घग्गर नदी में नहीं जाता। इससे ड्रेन ओवरफ्लो होकर गुड़िया खेड़ा क्षेत्र में टूट जाती है। अगर ड्रेन के अंतिम छोर पर गेट लगा दिए जाएं, सेम के पानी को लिफ्ट पंप के माध्यम से घग्गर नदी में डाला जाए तो सभी 10 गांवों की करीब 3 लाख एकड़ फसल को डूबने से बचाया जा सकता है।
ये हैं मौजूदा हालात
किसानों के प्रदर्शन करने के बाद आश्वासन मिला था कि एक महीने के अंदर गेट लगाने का काम पूरा हो जाएगा और अधिकारी मौका निरीक्षण कर कार्रवाई करेंगे लेकिन अब तक गेट का काम अधूरा पड़ा है। हालांकि, गांव गुड़िया खेड़ा के पीछे ड्रेन की सफाई कार्य करने का कार्य जारी है। वहीं, गुड़िया खेड़ा के ग्रामीणों की मानें तो उन्होंने कई बार प्रशासन के सामने गांव के समीप ड्रेन के ऊंचे तटबंधों को पक्का करने की मांग उठाई गई थी। प्रशासन ने अब तक न तो तटबंधों को पक्का करने का कार्य शुरू किया और न ही उनकी समस्या का कोई हल निकाला।
आज जिला उपयुक्त के साथ होगी पुनः बैठक
किसान नेता प्रकाश ममेरा ने बताया कि प्रदर्शन पर बनी किसानों और प्रशासन के बीच सहमति पर एक महीना बीत जाने के बाद भी विभाग की ओर से किसी प्रकार का कार्य शुरू नहीं किया गया। इसको लेकर किसान संगठन का प्रतिनिधिमंडल बुधवार को उपायुक्त के साथ बैठक कर दोबारा से इस मामले में बातचीत करेगा। कोई सकारात्मक परिणाम सामने नहीं आते हैं तो अनिश्चितकालीन धरना देने की योजना बनाई जाएगी। इसको लेकर प्रशासन स्वयं जिम्मेदार होगा।
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