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Sirsa News: हरियाणा हो या राजस्थान नहरों में दूषित पानी नहीं किया जाएगा बर्दाश्त, होगा आंदोलन

Wed, 08 Jul 2026 12:16 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा Updated Wed, 08 Jul 2026 12:16 AM IST
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haryana rajasthan farmers ready for andolan
सिरसा। जाट धर्मशाला में राजस्थान व हरियाणा के किसान बैठक प्रेसवार्ता करते हुए।  संवाद 
चोपटा क्षेत्र में सेम व बरसाती पानी निकालने के प्रोजेक्ट पर विवाद तेज, किसान नेताओं ने प्रशासन व सरकार की मंशा पर उठाए सवाल
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फोटो --

संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। जाट धर्मशाला में मंगलवार को हरियाणा और राजस्थान के किसान नेता एक साथ नजर आए। मुद्दा था नहराना और बरुवाली नहर में हिसार-घग्गर नाले का सेम व बरसाती पानी डालने का। दो सप्ताह पहले शुरू हुआ विवाद अब आंदोलन का रूप लेने लगा है। किसान नेताओं के साथ-साथ चोपटा व राजस्थान क्षेत्र के किसान भी एक मंच पर आने लगे हैं। भले ही चोपटा क्षेत्र के नहराना ड्रेन प्रोजेक्ट को निरस्त करने का दावा प्रशासनिक अधिकारी कर रहे हैं। वहीं, इस मामले में किसानों ने निर्णय लिया है कि 13 जुलाई को चोपटा में संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक बुलाएंगे और आगामी रणनीति बनाएंगे।

दोनों राज्यों के किसान नेताओं ने सरकार के खिलाफ शुद्ध पेयजल आपूर्ति के लिए बिगुल बजा दिया है। उन्होंने कहा कि हरियाणा हो या राजस्थान, जिस नहर में भाखड़ा का पानी बहता है उसमें सेम या बरसात का पानी नहीं डालने दिया जाएगा। सरकार को यदि ऐसा करना है तो वह घग्गर में पानी उपचारित कर डाले या अलग से गुड़ियाखेड़ा के साथ-साथ राजस्थान के लिए माइनर निकाले। राजस्थान के लोग हरियाणा का अतिरिक्त पानी लेने के लिए तैयार हैं मगर पीने के पानी में दूषित पानी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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इसी मुद्दे पर जाट धर्मशाला में दोनों राज्यों के किसान नेताओं ने संयुक्त रूप से प्रेसवार्ता की। अखिल भारतीय किसान सभा हनुमानगढ़ के जिलाध्यक्ष मंगेज चौधरी ने कहा कि सरकार ने हिसार-घग्गर ड्रेन के पानी को पंप कर नहराना ड्रेन में डालने के लिए 35 लाख रुपये का टेंडर लगाया था और काम शुरू किया था। किसानों के विरोध के बाद उसे प्रोजेक्ट को रोक दिया गया है। सरकार की मंशा थी कि चोपटा के सेम के पानी को नहराना ड्रेन में डाला जाए। इससे राजस्थान के लिए पीने के पानी की आपूर्ति होती है। सीधेतौर पर भाखड़ा के पानी में यह बदबूदार और बीमारियों से भरा पानी डालने से राजस्थान के लोगों को विभिन्न प्रकार की बीमारियां हो जाएंगी। उनके स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा।
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दिल्ली का पानी भी घग्गर में लाने की तैयारी
किसान नेताओं ने कहा कि सेम के साथ-साथ हिसार-घग्गर के अंदर हिसार से लेकर जींद, हिसार व अन्य जिलों के एसटीपी का पानी भी डाला जाता है। इसमें औद्योगिक इकाइयों का अपशिष्ट होता है। यह सीधे तौर पर स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाता है। सरकार इस गंदे पानी को पीने के पानी में डालकर कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों को बढ़ावा देना चाहती है। इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इतना ही नहीं, भविष्य में रोहतक तक इसे पहुंचाया जा चुका है। जल्द ही दिल्ली को हिसार-घग्गर ड्रेन से जोड़ दिया जाएगा। दिल्ली व अन्य जिलों का दूषित पानी इस ड्रेन में डाला जाएगा और उसे घग्गर के माध्यम से राजस्थान में छोड़ा जाएगा। यह बेहद खतरनाक है। सरकार को यदि इस प्रोजेक्ट पर काम करना है तो पहले इस सारे पानी को वैज्ञानिक तकनीक से उपचारित करे ताकि पानी कम से कम कृषि के उपयोग योग्य हो। सीधेतौर पर गंदे पानी को राजस्थान भेजने से फसलें भी जानलेवा साबित होंगी।
गुड़ियाखेडा से अलग ड्रेन बनाकर सेम व बरसाती पानी राजस्थान पहुंचाए सरकार
मंगेज चौधरी ने कहा कि एक तो सेम की समस्या के कारण पहले ही पैंतालिसा के किसान परेशान हैं। ऊपर से सरकार ने इस प्रोजेक्ट का टेंडर लगाकर किसानों की सिरदर्दी बढ़ा दी है। उन्होंने कहा कि सरकार को अगर व्यवस्था करनी ही है तो गुड़ियाखेड़ा से अलग से ड्रेन निकालकर राजस्थान को सेम व बरसाती पानी दें। सेम के पानी को उपचारित जरूर करें ताकि इसका प्रयोग फसलों के लिए किया जा सके।
केमिकलयुक्त पानी नहरों में डालना यानी लोगों को मौत के मुंह में पहुंचाना
स्वर्ण सिंह विर्क ने कहा कि सरकार इस ड्रेन को जींद, रोहतक फिर दिल्ली तक लेकर जाना चाहती है। दिल्ली तक का केमिकल युक्त पानी अब यहां आएगा। इसे पेयजल आपूर्ति की नहरों में डालना लोगों को मौत के मुंह में पहुंचाने जैसा है। इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। चोपटा क्षेत्र की बरुवाली, नहराना दोनों ड्रेनों के साथ-साथ घग्गर के अंदर भी इस पानी को डालने का विरोध किया जाएगा। घग्गर में भी सरकार को इस पानी को डालना है तो पहले इसे उपचारित करे ताकि राजस्थान के लोग इसका सदुपयोग कर सकें।
दोनों राज्यों को आपस में भिड़वाना चाहती है सरकार
अखिल भारतीय किसान सभा के जिला संगठन कमेटी सदस्य सुरजीत सिंह ऐलनाबाद ने कहा कि सरकार के इस निर्णय से किसानों के साथ-साथ आमजन को भी नुकसान है। इस प्रकार के प्रोजेक्ट से सरकार की मंशा साफ है कि वह दोनों राज्यों के लोगों को आपस में भिड़वाना चाहती है। यह होने नहीं दिया जाएगा। गंदे पानी को किसी भी कीमत पर नहरों में नहीं छोडने दिया जाएगा। इस पर लगातार महापंचायत कर विरोध जताया जाएगा।
सेम से सबसे चोपटा क्षेत्र प्रभावित

तहसील प्रधान नाथूसरी चोपटा अभिमन्यु सहारण ने कहा कि सेम के पानी से सबसे ज्यादा चोपटा क्षेत्र के लोग परेशान हैं। बारिश होने के बाद भी इसी क्षेत्र के लोगों को नुकसान उठाना पड़ता है। इसका मतलब यह नहीं है कि पीने के पानी में सेम के दूषित पानी की आपूर्ति की जाए। बरुवाली व नहराना दोनों ड्रेन में इसे नहीं डालने दिया जाएगा। सेम के कारण पैंतालिसावासी अनेक बीमारियों चपेट में हैं। अगर बरुवाली नहर में भी सेम का पानी छोड़ा जाएगा तो 25 गांवों के किसानों के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ेगा। पहले ही भाखड़ा का पानी नहरों में कम आता है।

उपचारित व साफ पानी दें, जैसलमेर तक ले जाने के लिए तैयार
राजस्थान के किसान नेताओं ने कहा कि किसानों के आंदोलन के बाद राजस्थान प्रशासन हरकत में जरूर आया है। इसीलिए इस मुद्दे पर उच्चस्तरीय बैठक जल्द ही होगी। बारिश या बाढ़ का पानी कितना भी हरियाणा दे, हम चुरू से लेकर जैसलमेर तक इस पानी को लेकर जाने के लिए तैयार हैं। दूषित पानी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि हालांकि सरकार ने प्रोजेक्ट बंद कर दिया है लेकिन उन्हें विश्वास नहीं है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर सरकार ने इस प्रोजेक्ट के तहत नहरों में ड्रेन का पानी डालने की कोशिश की तो किसान बड़े आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे। इस मौके पर राजेंद्र रूपावास, हमजिंद्र सिद्धू, मांगेराम पनिहारी सहित अन्य किसान नेता उपस्थित थे।
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