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Sirsa News: पन्नीवाला रुलदू की इथेनॉल फैक्ट्री में टेक्निकल यूरिया के 10 में 8 सैंपल फेल
Wed, 29 Jul 2026 11:13 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Wed, 29 Jul 2026 11:13 PM IST
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कृषि विभाग के अधिकारियों ने एसपी से मिलकर कार्रवाई की मांग
जांच में मिली कृषि ग्रेड यूरिया, सप्लायर फर्म पर कार्रवाई की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। पन्नीवाला रुलदू स्थित ई-20 इथेनॉल फैक्टरी में टेक्निकल ग्रेड यूरिया की आड़ में कृषि ग्रेड यूरिया के इस्तेमाल का मामला सामने आया है। फैक्टरी से लिए गए टेक्निकल ग्रेड यूरिया के 10 सैंपलों में से 8 सैंपल फेल पाए गए हैं। जांच रिपोर्ट में इन सैंपलों में कृषि ग्रेड यूरिया की पुष्टि हुई है। रिपोर्ट सामने आने के बाद कृषि विभाग ने मामले में कार्रवाई तेज कर दी है।
कृषि विभाग के अधिकारियों ने इस मामले में पुलिस अधीक्षक डबवाली जसलीन कौर से मुलाकात कर पूरे प्रकरण की गहन जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। अधिकारियों ने कहा कि केवल फैक्टरी स्तर पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं है।
अधिकारियों ने कहा कि दिल्ली से टेक्निकल ग्रेड यूरिया की सप्लाई करने वाली फर्म की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सके। जांच के माध्यम से यह पता लगाया जाना जरूरी है कि कृषि ग्रेड यूरिया को टेक्निकल ग्रेड यूरिया के रूप में सप्लाई करने का खेल कहां से संचालित हो रहा है और इसमें कौन-कौन लोग शामिल हैं।
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पुलिस अधीक्षक डबवाली ने अधिकारियों को मामले की हर पहलू से जांच करने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
पहले भी सामने आ चुके हैं मामले, कार्रवाई पर उठ रहे सवाल
सिरसा जिले में कृषि ग्रेड यूरिया को टेक्निकल ग्रेड यूरिया के नाम पर सप्लाई करने के मामले पहले भी सामने आ चुके हैं। पिछले कुछ महीनों में कई शिकायतों और जांचों के बावजूद अब तक ठोस कार्रवाई नहीं होने को लेकर सवाल उठते रहे हैं। कृषि विभाग का मानना है कि इस पूरे मामले में सप्लाई करने वाली फर्मों की भूमिका की जांच बेहद जरूरी है ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह नेटवर्क कहां तक फैला हुआ है। अधिकारियों के अनुसार, यह मामला केवल यूरिया की हेराफेरी तक सीमित नहीं है बल्कि इसमें आर्थिक अनियमितताओं की भी संभावना है।
266 रुपये की यूरिया को 2500 रुपये तक बेचने का खेल
अधिकारियों के अनुसार, कृषि उपयोग वाली यूरिया का मूल्य लगभग 266.66 रुपये प्रति बैग है जबकि टेक्निकल ग्रेड यूरिया की कीमत करीब 2200 से 2500 रुपये तक होती है। इसी अंतर का फायदा उठाकर कुछ लोग कृषि ग्रेड यूरिया को टेक्निकल ग्रेड यूरिया के रूप में बेचकर मोटा मुनाफा कमाने का प्रयास करते हैं। आरोप है कि इस खेल में सफेद बैग पर मोहर और नंबर लगाकर यूरिया की बिक्री की जाती है। इसके साथ बिल और जीएसटी संबंधी दस्तावेज भी तैयार किए जाते हैं। यह यूरिया हरियाणा, पंजाब और राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों में सप्लाई किए जाने की बात सामने आई है।
कोट
पन्नीवाला रुलदू इथेनॉल फैक्टरी से लिए गए 10 सैंपलों में से 8 फेल पाए गए हैं। इस मामले में पुलिस प्रशासन और कृषि विभाग अपने-अपने स्तर पर कार्रवाई कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि पुलिस अधीक्षक डबवाली से मुलाकात कर सप्लाई करने वाली दिल्ली की फर्म के खिलाफ भी ठोस कार्रवाई की मांग की गई है ताकि पूरे मामले का पर्दाफाश हो सके।
-डॉ. सुखदेव सिंह कंबोज, उप निदेशक, कृषि विभाग।
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जांच में मिली कृषि ग्रेड यूरिया, सप्लायर फर्म पर कार्रवाई की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। पन्नीवाला रुलदू स्थित ई-20 इथेनॉल फैक्टरी में टेक्निकल ग्रेड यूरिया की आड़ में कृषि ग्रेड यूरिया के इस्तेमाल का मामला सामने आया है। फैक्टरी से लिए गए टेक्निकल ग्रेड यूरिया के 10 सैंपलों में से 8 सैंपल फेल पाए गए हैं। जांच रिपोर्ट में इन सैंपलों में कृषि ग्रेड यूरिया की पुष्टि हुई है। रिपोर्ट सामने आने के बाद कृषि विभाग ने मामले में कार्रवाई तेज कर दी है।
कृषि विभाग के अधिकारियों ने इस मामले में पुलिस अधीक्षक डबवाली जसलीन कौर से मुलाकात कर पूरे प्रकरण की गहन जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। अधिकारियों ने कहा कि केवल फैक्टरी स्तर पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं है।
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अधिकारियों ने कहा कि दिल्ली से टेक्निकल ग्रेड यूरिया की सप्लाई करने वाली फर्म की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सके। जांच के माध्यम से यह पता लगाया जाना जरूरी है कि कृषि ग्रेड यूरिया को टेक्निकल ग्रेड यूरिया के रूप में सप्लाई करने का खेल कहां से संचालित हो रहा है और इसमें कौन-कौन लोग शामिल हैं।
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पुलिस अधीक्षक डबवाली ने अधिकारियों को मामले की हर पहलू से जांच करने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
पहले भी सामने आ चुके हैं मामले, कार्रवाई पर उठ रहे सवाल
सिरसा जिले में कृषि ग्रेड यूरिया को टेक्निकल ग्रेड यूरिया के नाम पर सप्लाई करने के मामले पहले भी सामने आ चुके हैं। पिछले कुछ महीनों में कई शिकायतों और जांचों के बावजूद अब तक ठोस कार्रवाई नहीं होने को लेकर सवाल उठते रहे हैं। कृषि विभाग का मानना है कि इस पूरे मामले में सप्लाई करने वाली फर्मों की भूमिका की जांच बेहद जरूरी है ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह नेटवर्क कहां तक फैला हुआ है। अधिकारियों के अनुसार, यह मामला केवल यूरिया की हेराफेरी तक सीमित नहीं है बल्कि इसमें आर्थिक अनियमितताओं की भी संभावना है।
266 रुपये की यूरिया को 2500 रुपये तक बेचने का खेल
अधिकारियों के अनुसार, कृषि उपयोग वाली यूरिया का मूल्य लगभग 266.66 रुपये प्रति बैग है जबकि टेक्निकल ग्रेड यूरिया की कीमत करीब 2200 से 2500 रुपये तक होती है। इसी अंतर का फायदा उठाकर कुछ लोग कृषि ग्रेड यूरिया को टेक्निकल ग्रेड यूरिया के रूप में बेचकर मोटा मुनाफा कमाने का प्रयास करते हैं। आरोप है कि इस खेल में सफेद बैग पर मोहर और नंबर लगाकर यूरिया की बिक्री की जाती है। इसके साथ बिल और जीएसटी संबंधी दस्तावेज भी तैयार किए जाते हैं। यह यूरिया हरियाणा, पंजाब और राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों में सप्लाई किए जाने की बात सामने आई है।
कोट
पन्नीवाला रुलदू इथेनॉल फैक्टरी से लिए गए 10 सैंपलों में से 8 फेल पाए गए हैं। इस मामले में पुलिस प्रशासन और कृषि विभाग अपने-अपने स्तर पर कार्रवाई कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि पुलिस अधीक्षक डबवाली से मुलाकात कर सप्लाई करने वाली दिल्ली की फर्म के खिलाफ भी ठोस कार्रवाई की मांग की गई है ताकि पूरे मामले का पर्दाफाश हो सके।
-डॉ. सुखदेव सिंह कंबोज, उप निदेशक, कृषि विभाग।