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Sonipat News: डीक्रस्ट में मकान आवंटन पर विवाद गहराया
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Fri, 10 Apr 2026 01:29 AM IST
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सोनीपत। दीनबंधु छोटू राम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (डीक्रस्ट), मुरथल में आवास आवंटन को लेकर विवाद तूल पकड़ने लगा है। अधिकारी पर अपने रिश्तेदार को विवेकाधीन कोटे से मकान देने का आरोप है। मामला राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग तक पहुंच गया है। आयोग ने विश्वविद्यालय प्रशासन से 15 दिन के भीतर जवाब मांगा है।
दिसंबर 2025 में विश्वविद्यालय प्रशासन ने विभिन्न श्रेणियों के मकानों के आवंटन की प्रक्रिया शुरू की थी, जिसमें बी-टाइप के चार मकान शामिल थे। हालांकि चार माह बाद तक इन मकानों का नियमित आवंटन नहीं किया गया।
आरोप है कि इसी बीच एक अधिकारी ने बी-15 नंबर मकान अपने रिश्तेदार को विवेकाधीन कोटे से आवंटित कर दिया गया, जबकि संबंधित व्यक्ति के पास पहले से ही विश्वविद्यालय में आवास उपलब्ध बताया जा रहा है।
नियमों के अनुसार विवेकाधीन कोटे का उपयोग केवल विशेष परिस्थितियों या आवश्यक सेवाओं के लिए किया जाता है, ऐसे में इस आवंटन को लेकर पारदर्शिता और नियमों के पालन पर सवाल उठने लगे हैं।
डीक्रूटा (शैक्षणिक यूनियन) ने आरोप लगाया है कि विश्वविद्यालय में कई वरिष्ठ फैकल्टी सदस्य और कर्मचारी लंबे समय से मकानों के आवंटन का इंतजार कर रहे हैं लेकिन प्रशासन इस दिशा में गंभीरता नहीं दिखा रहा। एक वरिष्ठ फैकल्टी सदस्य ने मामले को लेकर राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग में शिकायत दर्ज कराई है।
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दिसंबर 2025 में विश्वविद्यालय प्रशासन ने विभिन्न श्रेणियों के मकानों के आवंटन की प्रक्रिया शुरू की थी, जिसमें बी-टाइप के चार मकान शामिल थे। हालांकि चार माह बाद तक इन मकानों का नियमित आवंटन नहीं किया गया।
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आरोप है कि इसी बीच एक अधिकारी ने बी-15 नंबर मकान अपने रिश्तेदार को विवेकाधीन कोटे से आवंटित कर दिया गया, जबकि संबंधित व्यक्ति के पास पहले से ही विश्वविद्यालय में आवास उपलब्ध बताया जा रहा है।
नियमों के अनुसार विवेकाधीन कोटे का उपयोग केवल विशेष परिस्थितियों या आवश्यक सेवाओं के लिए किया जाता है, ऐसे में इस आवंटन को लेकर पारदर्शिता और नियमों के पालन पर सवाल उठने लगे हैं।
डीक्रूटा (शैक्षणिक यूनियन) ने आरोप लगाया है कि विश्वविद्यालय में कई वरिष्ठ फैकल्टी सदस्य और कर्मचारी लंबे समय से मकानों के आवंटन का इंतजार कर रहे हैं लेकिन प्रशासन इस दिशा में गंभीरता नहीं दिखा रहा। एक वरिष्ठ फैकल्टी सदस्य ने मामले को लेकर राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग में शिकायत दर्ज कराई है।