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Sonipat News: मयूर नाच, छपेली और नागा नृत्य की दीं मनमोहक प्रस्तुतियां
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Tue, 17 Mar 2026 03:21 AM IST
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16जेएनडी25: सीआरएसयू में कार्यक्रम में अपनी कला दिखाते कलाकार। संवाद
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जींद। चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय में सोमवार को अतुल्य भारत कार्यक्रम के अंतर्गत तीन दिवसीय फोक डांस फेस्टिवल का शुभारंभ हुआ। इसमें विद्यार्थियों ने मयूर नाच, छपेली और नागा नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियां पेश कर समां बांध दिया। यहां देश व राज्यों से आए 100 कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों का लोहा मनवाया।
संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र प्रयागराज और विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में उत्सव में बतौर मुख्य अतिथि प्रो. कैलाश चंद्र शर्मा ने शिरकत की। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समृद्ध लोक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम हैं। विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. राजेश बंसल ने कहा कि सांस्कृतिक कार्यक्रम शिक्षण संस्थानों की आत्मा होते हैं।
कार्यक्रम समन्वयक डॉ. कृष्ण कुमार ने बताया कि इस महोत्सव का उद्देश्य आधुनिक युग में युवाओं को अपनी जड़ों और सांस्कृतिक धरोहर पर गर्व करने के लिए प्रेरित करना है। महोत्सव के पहले दिन मध्य प्रदेश, नागालैंड, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से लघु भारत के दर्शन कराए।
उत्तर प्रदेश ब्रज की खुशबू लिए मयूर नाच और फूलों की होली की प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। राजस्थान चरी नृत्य में महिला कलाकारों ने सिर पर जलती हुई चरी रखकर अद्भुत संतुलन दिखाया। वहीं घूमर ने राजस्थानी वैभव की झलक पेश की। नागालैंड पारंपरिक योद्धा वेशभूषा में पूर्वोत्तर भारत की युद्ध शैली वाले नृत्य ने दर्शकों में रोमांच भर दिया।
उत्तराखंड व हरियाणा उत्तराखंड की टीम ने छपेली नृत्य से वाहवाही लूटी तो हरियाणा की टीम ने घूमर के माध्यम से प्रदेश की लोक संस्कृति को जीवंत किया। मध्य प्रदेश फोक बैंड की मधुर धुनों और पारंपरिक वाद्ययंत्रों ने पूरे वातावरण को संगीतमय बना दिया।
कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि विश्वविद्यालय लोक विधाओं के संरक्षण के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्हाेंने कहा कि उन्हें यहां आकर बहुत कुछ सीखने और अपनी कला को बड़े मंच पर साझा करने का अनूठा अवसर मिला है।
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संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र प्रयागराज और विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में उत्सव में बतौर मुख्य अतिथि प्रो. कैलाश चंद्र शर्मा ने शिरकत की। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समृद्ध लोक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम हैं। विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. राजेश बंसल ने कहा कि सांस्कृतिक कार्यक्रम शिक्षण संस्थानों की आत्मा होते हैं।
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कार्यक्रम समन्वयक डॉ. कृष्ण कुमार ने बताया कि इस महोत्सव का उद्देश्य आधुनिक युग में युवाओं को अपनी जड़ों और सांस्कृतिक धरोहर पर गर्व करने के लिए प्रेरित करना है। महोत्सव के पहले दिन मध्य प्रदेश, नागालैंड, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से लघु भारत के दर्शन कराए।
उत्तर प्रदेश ब्रज की खुशबू लिए मयूर नाच और फूलों की होली की प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। राजस्थान चरी नृत्य में महिला कलाकारों ने सिर पर जलती हुई चरी रखकर अद्भुत संतुलन दिखाया। वहीं घूमर ने राजस्थानी वैभव की झलक पेश की। नागालैंड पारंपरिक योद्धा वेशभूषा में पूर्वोत्तर भारत की युद्ध शैली वाले नृत्य ने दर्शकों में रोमांच भर दिया।
उत्तराखंड व हरियाणा उत्तराखंड की टीम ने छपेली नृत्य से वाहवाही लूटी तो हरियाणा की टीम ने घूमर के माध्यम से प्रदेश की लोक संस्कृति को जीवंत किया। मध्य प्रदेश फोक बैंड की मधुर धुनों और पारंपरिक वाद्ययंत्रों ने पूरे वातावरण को संगीतमय बना दिया।
कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि विश्वविद्यालय लोक विधाओं के संरक्षण के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्हाेंने कहा कि उन्हें यहां आकर बहुत कुछ सीखने और अपनी कला को बड़े मंच पर साझा करने का अनूठा अवसर मिला है।

16जेएनडी25: सीआरएसयू में कार्यक्रम में अपनी कला दिखाते कलाकार। संवाद

16जेएनडी25: सीआरएसयू में कार्यक्रम में अपनी कला दिखाते कलाकार। संवाद