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Sonipat News: 1.21 लाख बच्चों को बांटे जाएंगे ओआरएस के पैकेट

संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत Updated Tue, 16 Jun 2026 05:42 PM IST
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ORS packets will be distributed to 1.21 lakh children.
फोटो : सोनीपत के नागरिक अस्पताल में महिला को ओआरएस के पैकेट व जिंक की टेबलेट वितरित करती सिविल
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संवाद न्यूज एजेंसी

सोनीपत। गर्मी में बच्चों को डायरिया से बचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से मंगलवार को जिला नागरिक अस्पताल समेत सभी स्वास्थ्य केंद्रों में ओरल रीहाइड्रेशन थैरेपी (ओआरटी) सेंटर खोले गए। इसका शुभारंभ सिविल सर्जन डॉ. अनुराधा जैन ने जिला अस्पताल से किया।
डायरिया रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से 31 जुलाई तक अभियान चलाया जाएगा। इसके तहत 0 से 5 साल तक के 1.21 लाख बच्चों के लिए दो-दो ओआरएस पैकेट वितरित किए जाएंगे। साथ ही जिंक की 14 टैबलेट दी जाएंगी। आशा कार्यकर्ताओं के सहारे घर-घर जाकर यह अभियान चलाया जाएगा।
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एएनएम व जीएनएम भी नजर रखेंगी कि किस घर में उल्टी-दस्त के मरीज हैं। ऐसे मरीज को जिंक की टैबलेट का पैकेट दिया जाएगा। एक पैकेट में 14 गोलियां होती हैं। साथ ही यह भी बताया जाएगा कि अगर इस दवा से आराम नहीं मिलता है तो नजदीक के स्वास्थ्य केंद्र में जाएं।
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ओआरटी सेंटरों पर ज्यादा गंभीर मरीजों के लिए ओआरएस का घोल और जिंक की टैबलेट हर समय उपलब्ध रहेगी। गंभीर मरीजों को तुरंत घोल पिलाकर उनकी हालत स्थिर की जाएगी। यहां लोगों को डायरिया, उल्टी से बचाव के तरीके बताए जाएंगे।
डायरिया पीड़ित बच्चों को ओआरएस के दो पैकेट दिए जाएं। 6 माह तक के बच्चे को जिंक की आधी गोली व 6 माह से ऊपर के बच्चों को एक गोली 14 दिन तक दी जाएगी।
बाल रोग विशेषज्ञ डाॅ. अंलकृता जैन ने बताया कि यदि बच्चा उल्टी-दस्त से पीड़ित है तो उसे साफ उबला हुआ पानी ठंडा करके पिलाएं। उसकी साफ-सफाई का ज्यादा ध्यान रखें। उसे पानी ज्यादा से ज्यादा पिलाएं। केला, चावल, दही खिलाएं। बच्चों को ओआरएस का घोल पिलाएं। यदि फिर भी आराम न हो तो डॉक्टर को दिखाएं।

डायरिया रोको अभियान का उद्देश्य बचपन में दस्त के कारण शून्य बाल मृत्यु लक्ष्य को प्राप्त करना है। करीब दो महीने तक चलने वाले इस अभियान में लोगों को डायरिया की रोकथाम के उपायों के प्रति जागरूक किया जाएगा।
उप सिविल सर्जन डॉ. नीरज यादव का कहना है कि डायरिया रोको अभियान देशभर में चलाया जा रहा है। डायरिया से शरीर में पानी की कमी हो जाती है। वहीं, बच्चे कुपोषण के शिकार हो जाते हैं। कई बार परिजन बच्चों को अनावश्यक दवाइयां देते हैं। लोगों को बताया जाएगा कि उल्टी-दस्त से पीड़ित बच्चों को जरूरी दवाएं ही देनी हैं।
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