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गुप्त नवरात्र : आज से नौ दिन की जाएगी शक्ति की उपासना

संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर Updated Mon, 19 Jan 2026 01:20 AM IST
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Gupt Navratri: The worship of Shakti will be performed for nine days starting today
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संवाद न्यूज एजेंसी
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जगाधरी। अध्यात्म, शक्ति उपासना व तंत्र में आस्था रखने वालों के लिए माघ मास की गुप्त नवरात्र आज से प्रारंभ हो रही है। इस बार गुप्त नवरात्रि पर्व 19 जनवरी से आरंभ होकर 27 जनवरी को संपन्न होगी। नौ दिन चलने वाले पर्व में आदि शक्ति की उपासना की जाती है। मान्यता है कि इसमें बाहरी दुनिया से दूरी बनाकर एकांत में शक्ति उपासना की जाती है।
ज्योतिषाचार्य पंडित महेश शांडिल्य ने बताया कि वर्ष में चार बार नवरात्रि पूजा होती है। चैत्र और अश्विन नवरात्रि में सार्वजनिक रूप से देवी के नौ स्वरूपों की आराधना की जाती है।
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वहीं, माघ और आषाढ़ मास की नवरात्रि गुप्त होती है। इस नवरात्रि में साधक मानसिक, आध्यात्मिक और तांत्रिक शक्तियों की प्राप्ति के लिए कठिन तप और जप करते हैं। पंडित ललित शर्मा ने बताया कि माघ गुप्त नवरात्रि की सबसे बड़ी विशेषता दस महाविद्याओं की उपासना है। साधक अपनी विशेष मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए इन शक्तियों की आराधना करते हैं।
इनमें मां काली, मां तारा, मां त्रिपुर सुंदरी, मां भुवनेश्वरी, मां छिन्नमस्ता, मां त्रिपुर भैरवी, मां धूमावती, मां बगलामुखी, मां मातंगी और मां कमला देवी शामिल हैं। मान्यता है कि इन दस शक्तियों की साधना से जीवन के रोग, भय, दोष, आर्थिक संकट और मानसिक कष्ट समाप्त होते हैं।
आचार्य त्रिलोक महाराज ने बताया कि इस वर्ष गुप्त नवरात्रि और भी विशेष मानी जा रही है। चूंकि इस दौरान सर्वार्थ सिद्धि योग और द्विपुष्कर योग के दुर्लभ संयोग बन रहे हैं।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इन योगों में की साधना कई गुना फल प्रदान करती है। ऐसे में यह समय तंत्र साधना, मंत्र सिद्धि और आध्यात्मिक उन्नति के लिए अत्यंत श्रेष्ठ माना जा रहा है। मान्यता है कि गुप्त रूप से की गई साधना शीघ्र फलदायी होती है और साधक को अलौकिक अनुभूतियां प्रदान करती है।
साधक इस मुहूर्त में करें घट स्थापना

पंचांग के अनुसार माघ शुक्ल प्रतिपदा तिथि 19 जनवरी मध्यरात्रि एक बजकर 21 मिनट से प्रारंभ होगी। उदया तिथि मान्य होने के कारण उसी दिन गुप्त नवरात्रि की शुरुआत होगी। घटस्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 07:14 से 10:46 बजे तक रहेगा। इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:11 से 12:53 बजे तक रहेगा। साधक कलश स्थापना कर अखंड ज्योत प्रज्वलित कर संकल्प भी ले सकते हैं।
साधना की दिनचर्या और समापन विधि

पंडित महेश शांडिल्य ने बताया कि गुप्त नवरात्रि के दौरान सुबह-शाम शिव परिवार और भैरव महाराज की पूजा अनिवार्य मानी गई है। दुर्गा सप्तशती, दुर्गा चालीसा और विशेष मंत्रों का जप किया जाता है। तांत्रिक और अघौरी साधक रात्रि में विशेष साधना करते हैं। नवमी तिथि को कन्या पूजन, हवन और भोज के साथ नवरात्रि व्रत का विधिवत समापन किया जाता है। मान्यता है कि इस प्रकार की साधना साधक के जीवन की दिशा और दशा दोनों बदल सकती है।
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