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Yamuna Nagar News: हथिनीकुंड बैराज का जलस्तर घटने से पनबिजली उत्पादन प्रभावित
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Mon, 19 Jan 2026 01:28 AM IST
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यमुना नदी के ऊपर बना हथिनीकुंड बैराज। आर्काइव
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संवाद न्यूज एजेंसी
प्रतापनगर/यमुनानगर। पहाड़ी क्षेत्रों में हो रही बर्फबारी से नदियों के जलस्तर में भारी गिरावट आई है। इसका असर पन बिजली इकाइयों पर देखा जा रहा है। इकाइयों को चलने के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है।
पश्चिमी यमुना नहर पर चार पनबिजली परियोजनाओं को चलाने के लिए 5400 क्यूसेक पानी की जरूरत होती है, लेकिन यमुना नदी में लगातार घट रहे जलस्तर के कारण केवल मात्र 2300 से 3500 क्यूसेक के बीच पानी की सप्लाई मिल रही है। हथिनीकुंड बैराज के गेज रीडर अली नवाज व मनीष कुमार ने बताया कि रविवार को प्रातः 7 बजे बैराज पर 2300 क्यूसेक पानी दर्ज किया गया। सुबह 8 बजे भी यह आंकड़ा 2309 क्यूसेक पर स्थिर रहा, लेकिन 9 बजे यह घटकर 2490 क्यूसेक रह गया। दिन में 10 बजे अचानक पानी का प्रवाह बढ़कर 2752 क्यूसेक दर्ज किया गया और 11 बजे यह 3530 क्यूसेक तक पहुंच गया।
दोपहर 12 बजे 3656 क्यूसेक पानी मापा गया, जो उस दिन का सर्वाधिक स्तर रहा। इसके बाद दोपहर 1 बजे जलस्तर गिरकर 2951 क्यूसेक रह गया। 2 बजे 2254 क्यूसेक, 3 बजे 2067 क्यूसेक, 4 बजे 1938 क्यूसेक, शाम 5 बजे 1812 क्यूसेक और शाम 6 बजे भी 1713 व 7 बजे 2355 क्यूसेक बहाव दर्ज किया गया। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि यमुना नदी में दिए जाने वाले जल की मात्रा बेहद सीमित है, जिससे डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों में जल उपलब्धता पर दबाव बढ़ सकता है।
यमुना के पानी पर सिंचाई करने वाले क्षेत्रों के किसानों को भी आगामी दिनों में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। पश्चिमी यमुना नहर में पानी की मात्रा 1660 क्यूसेक दर्ज की गई है, जो सामान्य परिस्थितियों की तुलना में कम मानी जा रही है।
रबी सीजन के दौरान गेहूं, सरसों, जौ और चने जैसी फसलों को सिंचाई की आवश्यकता अधिक होती है, ऐसे में जलस्तर में कमी किसानों के लिए चुनौती उत्पन्न कर सकती है। यूपी की ओर छोड़ा जाने वाला पानी भी सीमित है। शाकुंभरी, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर तथा पड़ोसी क्षेत्रों में जल वितरण नीतियों पर इसका सीधा प्रभाव पड़ेगा।
पनबिजली इकाइयों की यह है स्थिति
यमुना जल पर आधारित चार पन बिजली इकाइयां हैं और प्रत्येक इकाई की बिजली उत्पादन क्षमता 16 मेगावाट है। यह इकाइयां ताजेवाला, नैनावाली, भूड़कलां व बेगमपुर में है। एक इकाई पर दो-दो मशीनें लगी हैं। सामान्य बिजली उत्पादन के लिए सभी इकाइयों को 5400 क्यूसिक पानी चाहिए। 5400 क्यूसिक पानी मिलने पर यह इकाइयां प्रति 24 घंटे में 10 से 12 लाख यूनिट बिजली उत्पादन की क्षमता रखती हैं। लेकिन अभी पानी की मात्रा 1660 क्यूसेक दर्ज किया गया है जोकि काफी कम है।
सर्दी के मौसम में बारिश न होने व पहाड़ों में बर्फबारी के चलते जलस्तर में कमी आना स्वाभाविक है। पन बिजली परियोजनाओं को हथिनीकुंड बैराज से पानी उपलब्ध करवाया जा रहा है। हथिनीकुंड बैराज से हरियाणा के साथ साथ यूपी को भी उनके हिस्से का पानी दिया जाता है। -विजय गर्ग, एक्सईएन, सिंचाई विभाग।
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प्रतापनगर/यमुनानगर। पहाड़ी क्षेत्रों में हो रही बर्फबारी से नदियों के जलस्तर में भारी गिरावट आई है। इसका असर पन बिजली इकाइयों पर देखा जा रहा है। इकाइयों को चलने के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है।
पश्चिमी यमुना नहर पर चार पनबिजली परियोजनाओं को चलाने के लिए 5400 क्यूसेक पानी की जरूरत होती है, लेकिन यमुना नदी में लगातार घट रहे जलस्तर के कारण केवल मात्र 2300 से 3500 क्यूसेक के बीच पानी की सप्लाई मिल रही है। हथिनीकुंड बैराज के गेज रीडर अली नवाज व मनीष कुमार ने बताया कि रविवार को प्रातः 7 बजे बैराज पर 2300 क्यूसेक पानी दर्ज किया गया। सुबह 8 बजे भी यह आंकड़ा 2309 क्यूसेक पर स्थिर रहा, लेकिन 9 बजे यह घटकर 2490 क्यूसेक रह गया। दिन में 10 बजे अचानक पानी का प्रवाह बढ़कर 2752 क्यूसेक दर्ज किया गया और 11 बजे यह 3530 क्यूसेक तक पहुंच गया।
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दोपहर 12 बजे 3656 क्यूसेक पानी मापा गया, जो उस दिन का सर्वाधिक स्तर रहा। इसके बाद दोपहर 1 बजे जलस्तर गिरकर 2951 क्यूसेक रह गया। 2 बजे 2254 क्यूसेक, 3 बजे 2067 क्यूसेक, 4 बजे 1938 क्यूसेक, शाम 5 बजे 1812 क्यूसेक और शाम 6 बजे भी 1713 व 7 बजे 2355 क्यूसेक बहाव दर्ज किया गया। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि यमुना नदी में दिए जाने वाले जल की मात्रा बेहद सीमित है, जिससे डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों में जल उपलब्धता पर दबाव बढ़ सकता है।
यमुना के पानी पर सिंचाई करने वाले क्षेत्रों के किसानों को भी आगामी दिनों में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। पश्चिमी यमुना नहर में पानी की मात्रा 1660 क्यूसेक दर्ज की गई है, जो सामान्य परिस्थितियों की तुलना में कम मानी जा रही है।
रबी सीजन के दौरान गेहूं, सरसों, जौ और चने जैसी फसलों को सिंचाई की आवश्यकता अधिक होती है, ऐसे में जलस्तर में कमी किसानों के लिए चुनौती उत्पन्न कर सकती है। यूपी की ओर छोड़ा जाने वाला पानी भी सीमित है। शाकुंभरी, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर तथा पड़ोसी क्षेत्रों में जल वितरण नीतियों पर इसका सीधा प्रभाव पड़ेगा।
पनबिजली इकाइयों की यह है स्थिति
यमुना जल पर आधारित चार पन बिजली इकाइयां हैं और प्रत्येक इकाई की बिजली उत्पादन क्षमता 16 मेगावाट है। यह इकाइयां ताजेवाला, नैनावाली, भूड़कलां व बेगमपुर में है। एक इकाई पर दो-दो मशीनें लगी हैं। सामान्य बिजली उत्पादन के लिए सभी इकाइयों को 5400 क्यूसिक पानी चाहिए। 5400 क्यूसिक पानी मिलने पर यह इकाइयां प्रति 24 घंटे में 10 से 12 लाख यूनिट बिजली उत्पादन की क्षमता रखती हैं। लेकिन अभी पानी की मात्रा 1660 क्यूसेक दर्ज किया गया है जोकि काफी कम है।
सर्दी के मौसम में बारिश न होने व पहाड़ों में बर्फबारी के चलते जलस्तर में कमी आना स्वाभाविक है। पन बिजली परियोजनाओं को हथिनीकुंड बैराज से पानी उपलब्ध करवाया जा रहा है। हथिनीकुंड बैराज से हरियाणा के साथ साथ यूपी को भी उनके हिस्से का पानी दिया जाता है। -विजय गर्ग, एक्सईएन, सिंचाई विभाग।