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आदिबद्री में धार्मिक पर्यटन को मिलेगी भी नई गति : धूमन
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Thu, 04 Jun 2026 03:54 AM IST
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सरस्वती उद्गम स्थल पर पूजा करने पहुंचे बोर्ड के वाइस चेयरमैन। डीआईपीआरओ
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यमुनानगर। सरस्वती हेरिटेज विकास बोर्ड के वाइस चेयरमैन धूमन सिंह किरमच तथा भाजपा युवा मोर्चा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष मुकेश गौड़ ने आदिबद्री स्थित सरस्वती नदी उद्गम स्थल के दर्शन कर सरस्वती नदी पुनर्जीवन परियोजना का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने क्षेत्र के धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला।
धूमन सिंह किरमच ने कहा कि आदिबद्री भारत की प्राचीन सांस्कृतिक एवं धार्मिक विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यह स्थल मां सरस्वती के उद्गम से जुड़ा हुआ है और इसका विशेष आध्यात्मिक महत्व है। उन्होंने बताया कि आदि शंकराचार्य ने भी अपने प्रवास के दौरान इस पवित्र स्थल की महत्ता को स्वीकार किया था। आदिबद्री में भगवान बद्रीनाथ, बाबा केदारनाथ और मां सरस्वती से जुड़े पवित्र स्थलों के दर्शन के लिए हर वर्ष हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए राज्य सरकार द्वारा आधारभूत ढांचे का विस्तार किया जा रहा है। सरस्वती नदी पुनर्जीवन परियोजना केवल विकास कार्य नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, इतिहास और आस्था के संरक्षण का महत्वपूर्ण अभियान है। इसके माध्यम से सरस्वती नदी के जीर्णोद्धार के साथ नई पीढ़ी को अपनी प्राचीन सभ्यता और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि आदिबद्री में विकसित हो रही सुविधाओं से धार्मिक पर्यटन को भी नई गति मिलेगी। संवाद
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धूमन सिंह किरमच ने कहा कि आदिबद्री भारत की प्राचीन सांस्कृतिक एवं धार्मिक विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यह स्थल मां सरस्वती के उद्गम से जुड़ा हुआ है और इसका विशेष आध्यात्मिक महत्व है। उन्होंने बताया कि आदि शंकराचार्य ने भी अपने प्रवास के दौरान इस पवित्र स्थल की महत्ता को स्वीकार किया था। आदिबद्री में भगवान बद्रीनाथ, बाबा केदारनाथ और मां सरस्वती से जुड़े पवित्र स्थलों के दर्शन के लिए हर वर्ष हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए राज्य सरकार द्वारा आधारभूत ढांचे का विस्तार किया जा रहा है। सरस्वती नदी पुनर्जीवन परियोजना केवल विकास कार्य नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, इतिहास और आस्था के संरक्षण का महत्वपूर्ण अभियान है। इसके माध्यम से सरस्वती नदी के जीर्णोद्धार के साथ नई पीढ़ी को अपनी प्राचीन सभ्यता और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि आदिबद्री में विकसित हो रही सुविधाओं से धार्मिक पर्यटन को भी नई गति मिलेगी। संवाद
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