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Yamuna Nagar News: गोवर्धन लीला से बताया प्रभु भक्ति का महत्व
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Sat, 10 Jan 2026 12:32 AM IST
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मुख्यातिथि को सम्मानित करते आयोजक व कथा व्यास।प्रवक्ता
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व्यासपुर। श्री खेड़ा मंदिर हाल में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन कथा व्यास गौरव कृष्ण शास्त्री ने भगवान श्रीकृष्ण की गोवर्धन लीला का वर्णन कर प्रभु भक्ति का महत्व बताया।
उन्होेंने कहा कि गोवर्धन लीला सनातन धर्म में भक्ति, करुणा और अहंकार के विनाश का अद्भुत उदाहरण है। उन्होंने बताया कि वृंदावन में इंद्रदेव के क्रोध के कारण जब मूसलाधार वर्षा होने लगी और समस्त ब्रज डूबने लगा, तब ब्रजवासी भयभीत हो उठे। ऐसे संकट की घड़ी में भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों को इंद्र पूजा के स्थान पर गोवर्धन पर्वत की पूजा करने की प्रेरणा दी और यह संदेश दिया कि प्रकृति ही जीवन का आधार है। इंद्रदेव की ओर से की गई भीषण वर्षा से ब्रजवासियों को बचाने के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर ग्वाल-बालों, पशुओं सहित सभी ब्रजवासियों को उसकी छाया में सुरक्षित रखा। सात दिनों तक निरंतर वर्षा के बावजूद किसी को कोई कष्ट नहीं हुआ। अंततः इंद्रदेव को अपनी भूल का एहसास हुआ और उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण से क्षमा याचना की। कथा व्यास ने कहा कि गोवर्धन लीला यह संदेश देती है कि सच्ची भक्ति और अटूट विश्वास से हर संकट पर विजय प्राप्त की जा सकती है। अहंकार का अंत निश्चित है और केवल सच्ची भक्ति से ही भगवान की कृपा प्राप्त होती है। संगीतमय भजनों और भावपूर्ण कथा वाचन के दौरान श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो गए। इस अवसर पर मार्केट कमेटी चेयरमैन विपिन सिंगला, मुकेश बंसल, प्रेमलता और रविंद्र तायल ने पूजा-अर्चना करवाई। मुख्य अतिथि ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा जैसे आयोजन समाज में सद्भाव, संस्कार और नैतिक मूल्यों को सुदृढ़ करते हैं और युवा वर्ग को अपनी संस्कृति से जोड़ने का सशक्त माध्यम बनते हैं।
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उन्होेंने कहा कि गोवर्धन लीला सनातन धर्म में भक्ति, करुणा और अहंकार के विनाश का अद्भुत उदाहरण है। उन्होंने बताया कि वृंदावन में इंद्रदेव के क्रोध के कारण जब मूसलाधार वर्षा होने लगी और समस्त ब्रज डूबने लगा, तब ब्रजवासी भयभीत हो उठे। ऐसे संकट की घड़ी में भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों को इंद्र पूजा के स्थान पर गोवर्धन पर्वत की पूजा करने की प्रेरणा दी और यह संदेश दिया कि प्रकृति ही जीवन का आधार है। इंद्रदेव की ओर से की गई भीषण वर्षा से ब्रजवासियों को बचाने के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर ग्वाल-बालों, पशुओं सहित सभी ब्रजवासियों को उसकी छाया में सुरक्षित रखा। सात दिनों तक निरंतर वर्षा के बावजूद किसी को कोई कष्ट नहीं हुआ। अंततः इंद्रदेव को अपनी भूल का एहसास हुआ और उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण से क्षमा याचना की। कथा व्यास ने कहा कि गोवर्धन लीला यह संदेश देती है कि सच्ची भक्ति और अटूट विश्वास से हर संकट पर विजय प्राप्त की जा सकती है। अहंकार का अंत निश्चित है और केवल सच्ची भक्ति से ही भगवान की कृपा प्राप्त होती है। संगीतमय भजनों और भावपूर्ण कथा वाचन के दौरान श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो गए। इस अवसर पर मार्केट कमेटी चेयरमैन विपिन सिंगला, मुकेश बंसल, प्रेमलता और रविंद्र तायल ने पूजा-अर्चना करवाई। मुख्य अतिथि ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा जैसे आयोजन समाज में सद्भाव, संस्कार और नैतिक मूल्यों को सुदृढ़ करते हैं और युवा वर्ग को अपनी संस्कृति से जोड़ने का सशक्त माध्यम बनते हैं।
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