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Yamuna Nagar News: सीएससी संचालिका बन महिलाएं बढ़ा रहीं परिवार की आय, घर-घर पहुंचा रहीं सरकारी योजनाएं
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गांव सबलपुर में सीएससी पर मौजूद दीपाली। स्वयं
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अशोक कुमार
यमुनानगर। घरेलू जिम्मेदारियों के साथ स्वरोजगार की राह चुनकर जिले की महिलाएं अब परिवार की आर्थिक मजबूती का आधार बन रही हैं। कॉमन सर्विस सेंटर संचालिका के रूप में वे न केवल अपनी आय बढ़ा रही हैं, बल्कि ग्रामीणों तक सरकारी योजनाओं और डिजिटल सेवाओं की पहुंच भी आसान बना रही हैं। ग्रामीण क्षेत्र से लेकर शहरों तक महिलाओं ने सीएससी केंद्र स्थापित किए हैं और विभिन्न सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराने के साथ अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
जिले के व्यासपुर, सरस्वतीनगर और छछरौली क्षेत्र में महिला सीएससी संचालिकाएं विशेष रूप से सक्रिय हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में वे नियमित बैठकों के जरिये युवतियों और महिलाओं को डिजिटल सेवाओं, ऑनलाइन आवेदन, दस्तावेज तैयार कराने, सरकारी योजनाओं के लाभ और स्वरोजगार के अवसरों की जानकारी देती हैं। इससे ग्रामीण महिलाओं में डिजिटल जागरूकता बढ़ रही है और वे सरकारी सेवाओं के लिए शहरों के चक्कर लगाने से भी बच रही हैं।
सबलपुर गांव की दीपाली ने बताया कि शुरुआत में लोगों को ऑनलाइन सेवाओं के प्रति जागरूक करना चुनौतीपूर्ण था, लेकिन अब ग्रामीण जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र, आय, जाति, निवास प्रमाणपत्र, पेंशन, बैंकिंग और अन्य सेवाओं के लिए उनके केंद्र पर ही पहुंच रहे हैं। इससे उन्हें आर्थिक सहायता के साथ समाज में अलग पहचान भी मिली है।
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संधाय गांव की शमीम ने बताया कि सीएससी ने उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया है। पहले वे केवल गृहिणी थीं, लेकिन अब घर की जिम्मेदारियों के साथ अपना केंद्र भी संचालित कर रही हैं। उनका प्रयास रहता है कि अधिक से अधिक महिलाओं को डिजिटल सेवाओं का लाभ मिले और वे भी स्वरोजगार अपनाने के लिए आगे आएं।
चौराही गांव की ममता ने बताया कि ग्रामीण युवतियों के लिए समय-समय पर बैठकों का आयोजन कर उन्हें ऑनलाइन सेवाओं, सरकारी योजनाओं और डिजिटल लेनदेन की जानकारी दी जाती है। इससे कई युवतियों में स्वरोजगार करने के प्रति रुचि बढ़ी है और वे भी सीएससी से जुड़ने की जानकारी ले रही हैं।
तिगरा गांव की सोनिया ने बताया कि गांव में महिलाओं का आत्मविश्वास लगातार बढ़ रहा है। पहले छोटी-छोटी ऑनलाइन सेवाओं के लिए लोगों को शहर जाना पड़ता था, लेकिन अब अधिकांश कार्य गांव में ही हो रहे हैं। इससे समय और धन दोनों की बचत हो रही है और महिलाओं की आय में भी निरंतर वृद्धि हो रही है।
सीएससी जिला प्रबंधक नितिन शर्मा ने बताया कि जिले में बड़ी संख्या में महिलाएं सीएससी संचालिका के रूप में कार्य कर रही हैं। विशेषकर व्यासपुर, सरस्वतीनगर और छछरौली क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि महिलाएं ग्रामीणों को केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं की जानकारी भी दे रही हैं।
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यमुनानगर। घरेलू जिम्मेदारियों के साथ स्वरोजगार की राह चुनकर जिले की महिलाएं अब परिवार की आर्थिक मजबूती का आधार बन रही हैं। कॉमन सर्विस सेंटर संचालिका के रूप में वे न केवल अपनी आय बढ़ा रही हैं, बल्कि ग्रामीणों तक सरकारी योजनाओं और डिजिटल सेवाओं की पहुंच भी आसान बना रही हैं। ग्रामीण क्षेत्र से लेकर शहरों तक महिलाओं ने सीएससी केंद्र स्थापित किए हैं और विभिन्न सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराने के साथ अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
जिले के व्यासपुर, सरस्वतीनगर और छछरौली क्षेत्र में महिला सीएससी संचालिकाएं विशेष रूप से सक्रिय हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में वे नियमित बैठकों के जरिये युवतियों और महिलाओं को डिजिटल सेवाओं, ऑनलाइन आवेदन, दस्तावेज तैयार कराने, सरकारी योजनाओं के लाभ और स्वरोजगार के अवसरों की जानकारी देती हैं। इससे ग्रामीण महिलाओं में डिजिटल जागरूकता बढ़ रही है और वे सरकारी सेवाओं के लिए शहरों के चक्कर लगाने से भी बच रही हैं।
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सबलपुर गांव की दीपाली ने बताया कि शुरुआत में लोगों को ऑनलाइन सेवाओं के प्रति जागरूक करना चुनौतीपूर्ण था, लेकिन अब ग्रामीण जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र, आय, जाति, निवास प्रमाणपत्र, पेंशन, बैंकिंग और अन्य सेवाओं के लिए उनके केंद्र पर ही पहुंच रहे हैं। इससे उन्हें आर्थिक सहायता के साथ समाज में अलग पहचान भी मिली है।
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संधाय गांव की शमीम ने बताया कि सीएससी ने उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया है। पहले वे केवल गृहिणी थीं, लेकिन अब घर की जिम्मेदारियों के साथ अपना केंद्र भी संचालित कर रही हैं। उनका प्रयास रहता है कि अधिक से अधिक महिलाओं को डिजिटल सेवाओं का लाभ मिले और वे भी स्वरोजगार अपनाने के लिए आगे आएं।
चौराही गांव की ममता ने बताया कि ग्रामीण युवतियों के लिए समय-समय पर बैठकों का आयोजन कर उन्हें ऑनलाइन सेवाओं, सरकारी योजनाओं और डिजिटल लेनदेन की जानकारी दी जाती है। इससे कई युवतियों में स्वरोजगार करने के प्रति रुचि बढ़ी है और वे भी सीएससी से जुड़ने की जानकारी ले रही हैं।
तिगरा गांव की सोनिया ने बताया कि गांव में महिलाओं का आत्मविश्वास लगातार बढ़ रहा है। पहले छोटी-छोटी ऑनलाइन सेवाओं के लिए लोगों को शहर जाना पड़ता था, लेकिन अब अधिकांश कार्य गांव में ही हो रहे हैं। इससे समय और धन दोनों की बचत हो रही है और महिलाओं की आय में भी निरंतर वृद्धि हो रही है।
सीएससी जिला प्रबंधक नितिन शर्मा ने बताया कि जिले में बड़ी संख्या में महिलाएं सीएससी संचालिका के रूप में कार्य कर रही हैं। विशेषकर व्यासपुर, सरस्वतीनगर और छछरौली क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि महिलाएं ग्रामीणों को केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं की जानकारी भी दे रही हैं।

गांव सबलपुर में सीएससी पर मौजूद दीपाली। स्वयं

गांव सबलपुर में सीएससी पर मौजूद दीपाली। स्वयं

गांव सबलपुर में सीएससी पर मौजूद दीपाली। स्वयं